पंचतत्व में विलीन हुए शहीद सौरभ कटारा, 17 दिन पहले ही हुई थी शादी

शहीद सौरभ कटारा की पार्थिव देह तिरंगे में लिपटे हुए भरतपुर के रूपवास के गांव बरौली ब्राह्मण पहुंची.   

पंचतत्व में विलीन हुए शहीद सौरभ कटारा, 17 दिन पहले ही हुई थी शादी
तिरंगे में लिपटा सौरभ कटारा का शव

देवेन्द्र सिंह, भरतपुर: शहीद सौरभ कटारा की पार्थिव देह तिरंगे में लिपटे हुए भरतपुर के रूपवास के गांव बरौली ब्राह्मण पहुंची. आज सूर्य ग्रहण होने के चलते शहीद का अंतिम संस्कार रोके रखा. सूर्य ग्रहण पूर्ण होने के बाद ही शहीद के छोटे भाई ने उनकी पार्थिक देह को मुखाग्नि दी. हर तरफ सौरभ कटारा अमर रहे और भारत माता की जय के जयघोष से आसमान गूंज उठा. वहीं हर आंख नम थी. चेहरे पर मायूसी, लेकिन इस बात का गर्व कि उनका वीर सपूत आज अपने बलिदान से उनके गांव का नाम देश दुनिया मे रोशन कर गया है.

तिरंगे में लिपटा सौरभ कटारा का शव जैसे ही उनके पैतृक गांव पहुंचा तो हर आंखों में आंसू और जुबान पर भारत माता के जयकारों की गूंज थी. खुद वीरांगना पूनम ने अर्थी को कांधा दिया. महज 17 दिन में ही इस 'पूनम' का 'चांद' अस्त हो गया. सौरभ कटारा और पूनम की शादी सिर्फ 17 दिन पहले ही हुई थी. 17 दिनों के अंदर अपने शहीद पति को कांधा देकर पूनम ने दिखा दिया कि भारत की बेटियां भी बहादुर होती हैं.

शहीद सौरभ की अंतिम यात्रा जिस भी गली से गुजरी हर तरह सौरभ तुम अमर रहो के नारे सुनाई दिए. देश के लिए अपनी जान न्यौछावर करने वाले बरौली ब्राह्मण गांव के सौरभ कटारा को पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई. सौरभ की सहादत पर परिजनों को गर्व है. परिजनों ने कहा कि देश के लिए एक सौरभ, एक बेटा तो क्या हजारों बेटे और भाई कुर्बान करने के लिए हम तैयार हैं.

सौरभ कटारा जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा में सोमवार की रात को हुए बम विस्फोट में घायल हो गए थे. 24 दिसंबर को इलाज के दौरान सौरभ सेना के अस्पताल में शहीद हो गये थे. सौरभ आर्मी में चालक के पद पर कार्यरत थे. चार साल पहले आर्मी ज्वॉइन की थी. शहीद सौरभ कटारा की शादी आठ दिसंबर को हुई थी. 

सौरभ की शहादत पर हिंदुस्तान को गर्व है. सौरभ अपने पीछे अपनी नवविवाहिता वीरांगना को छोड़ गये हैं. कुछ दिन पहले ही सौरभ शादी की खुशियां मनाकर ड्यूटी पर लाटे थे.