कोटा: कोरोना रिपोर्ट आने से पहले परिजनों को सौंपा गया शव, लेकन अंतिम संस्कार से पहले...

अस्पताल प्रशासन ने रिपोर्ट आने से पहले ही परिजनों को शव सौंप दिया. परिजन व रिश्तेदार भी मुक्तिधाम पर अंतिम संस्कार करने पहुंच गए.

कोटा: कोरोना रिपोर्ट आने से पहले परिजनों को सौंपा गया शव, लेकन अंतिम संस्कार से पहले...
अस्पताल ने रिपोर्ट आए बिना ही शव परिजनों को सौंप दिया गया.

मुकेश सोनी/कोटा: राजस्थान के कोटा में कोरोना वायरस (Coronavirus) कहर मचा रहा है. दिन-ब-दिन रिकॉर्ड पॉजिटिव केस सामने आ रहे हैं. संक्रमण कम होने के बजाय और बढ़ता ही जा रहा है. इस बीच, एमबीएस (MBS) अस्पताल की एक गम्भीर लापरवाही सामने आई है.

अस्पताल प्रशासन ने रिपोर्ट आने से पहले ही परिजनों को शव सौंप दिया. परिजन व रिश्तेदार भी मुक्तिधाम पर अंतिम संस्कार करने पहुंच गए. इस बीच, मेडिकल कॉलेज की लैब से जारी रिपोर्ट में मरीज के कोरोना पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई थी तो, प्रशासन के हाथ पांव फूल गए. आनन-फानन में मरीज का पता किया तो सामने आया कि, शव का तो अंतिम संस्कार कर दिया गया है.

दरअसल, सुल्तानपुर के किशोरपुरा निवासी युवक (40) को तबियत खराब होने पर 7 अगस्त को एमबीएस अस्पताल में भर्ती करवाया था. जानकारी के मुताबिक, उसे कैंसर (Cancer) की बीमारी थी. 12 अगस्त को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. उसका कोविड जांच के लिए सैंपल लिया गया था. लेकिन अस्पताल में तालमेल की कमी के चलते शव को नए अस्पताल में शिफ्ट करने के बजाय, परिजनों को सौंप दिया गया.

इसके बाद, परिजनों ने सुबह विधि-विधान से शव का अंतिम संस्कार कर दिया. जब मरीज के कोरोना संक्रमित होने का पता चला तो, हड़कम्प मचा गया. इसके बाद, नायब तहसीलदार व पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे. वहीं, एमबीएस अस्पताल अधीक्षक डॉ नवीन सक्सेना का कहना है कि, इमरजेंसी व कैंसर वार्ड के बीच तालमेल नहीं था.

उन्होंने कहा कि, मरीज की भर्ती पर्ची पर कोविड सैंपल की जानकारी लिखी हुई थी. लेकिन सीपीआर नोट में कोविड सैंपल का जिक्र नहीं था. सीपीआर नोट में कोविड सैंपल का जिक्र नहीं होने के कारण सीएमओ डॉ ज्ञान सिंह चौधरी ने शव परिजनों को सौंप दिया.

गाइडलाइन का नहीं हुआ पालन
कोविड-19 गाइडलाइन के तहत मरीज की मौत के बाद सैंपल लिया गया है तो, जांच रिपोर्ट आने तक उसे अस्पताल में रखा जाता है. नेगेटिव रिपोर्ट आने पर ही परिजनों को शव सुपुर्द किया जाता है. कोरोना पॉजिटिव आने पर जिला प्रशासन की देखरेख में परिजनों की मौजूदगी में, शव का अंतिम संस्कार किया जाता है. इस मामले में अस्पताल प्रशासन की ओर से गाइडलाइन का पालन नहीं किया गया. रिपोर्ट आए बिना ही शव परिजनों को सौंप दिया गया.

इधर, एमबीएस अस्पताल अधीक्षक डॉ नवीन सक्सेना ने बताया कि, कैंसर विभाग वालों को सूचित करना चाहिए था, चूक उनके स्तर से हुई है. आरएमओ को निर्देश दिए हैं कि, सभी सीएमओ शव को रिलीज करने से पहले दो बार चेक कर लें कि मरीज का कोविड सैंपल लिया गया था या नहीं. रिपार्ट नहीं आने की स्थिति में शव को नए अस्पताल की मोर्चरी में शिफ्ट करवाएं.