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मीडिया दबाव में है, चाहते हुए भी सच नहीं दिखा पा रहा है: अशोक गहलोत

गहलोत के मुताबिक 2004 के अंदर जब वाजपेई जी की गवर्नमेंट थी तब भी इंडिया शाइनिंग, फील गुड का माहौल बनाया गया विज्ञापनों के जरिए एग्जिट पोल उनके पक्ष में आए थे और सरकार 10 साल रही यूपीए की. 

मीडिया दबाव में है, चाहते हुए भी सच नहीं दिखा पा रहा है: अशोक गहलोत
गहलोत ने कहना है कि जरूरी नहीं है कि एग्जिट पोल हमेशा सही हो

राजस्थान: सभी एग्जिट पोल राजस्थान में कांग्रेस को 5 सीट से अधिक देते हुए नजर नहीं आ रहे हैं. राजस्थान में पिछला विधानसभा चुनाव भाजपा ने जीता था तो लोकसभा चुनाव में भी 25 सीट जीतकर क्लीन स्वीप किया था इससे पिछली बार के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने 25 में से 20 सीटें जीती थी. वहीं एग्जिट पोल के नतीजों पर राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत का कहना है कि यह कोई पहली बार ऐसी स्थिति नहीं बनी है कई बार पहले भी एग्जिट पोल आए थे और पूरी तरह गलत साबित हुए थे.

गहलोत के मुताबिक 2004 के अंदर जब वाजपेई जी की गवर्नमेंट थी तब भी इंडिया शाइनिंग, फील गुड का माहौल बनाया गया विज्ञापनों के जरिए एग्जिट पोल उनके पक्ष में आए थे और सरकार 10 साल रही यूपीए की. उसके बाद में भी पिछले राज्यों में चुनाव हुए तब भी ऐसी स्थिति बनी थी तो जरूरी नहीं है कि एग्जिट पोल हमेशा सही हो बल्कि अधिकांश वक्त में ये गलत साबित हुए हैं. मैंने तमाम 25 सीट पर बातचीत करी है कैंडिडेट से भी कल रात को मुझे पूरा यकीन है कि सबका कॉन्फिडेंस बढ़ा हुआ है. हमारे कार्यकर्ता मजबूत है और 23 को जाएंगे काउंटिंग के अंदर पूरी तैयारी के साथ जा रहे हैं और एग्जिट पोल से किसी को भ्रम पैदा नहीं हुआ है.

वहीं गठबंधन के सवाल पर गहलोत ने कहा कि 'मैं उसके अंदर इंवॉल्व नहीं हूं मीडिया में यह खबर आ गई थी कि मुझे जिम्मेदारी सौंपी गई है वह गलत निराधार थी. पर पहले से ही जब मैं हेड क्वार्टर मैं था एआईसीसी में तब से ही प्रीपोल और पोस्टपोल के लिए बातचीत चलती रहती है और एक टीम बनी हुई है जो इस काम को कर रही है. मैं हेड क्वार्टर में था तब मैं शामिल था. हेड क्वार्टर के जनरल सेक्रेटरी जो बनते हैं वह इंवॉल्व रहते उसके अंदर इसलिए यह काम तो हर पॉलीटिकल पार्टी करती रहती है और वह हो रहा है काम उसमें कोई दिक्कत नहीं है.

जबकि मध्यप्रदेश सरकार के विश्वास मत को लेकर गहलोत का मानना है कि 'यह तमाम खाली बस मीडिया के अंदर प्रचार करने के लिए, कोई गवर्नर ना तो बुला सकते हैं, ना बुलाते हैं, ना परंपरा है, इसलिए यह तो खाली न्यूज़ वैल्यू के अलावा कुछ भी नहीं है. मध्य प्रदेश की सरकार पूरी तरह मजबूत है, 5 साल चलेगी, चाहे मध्य प्रदेश हो, राजस्थान हो या छत्तीसगढ़ हो, हां बीजेपी के कुछ साथियों को सपने आने लग गए हैं वो उनके सपने चकनाचूर हो जाएंगे आप खुद देखेंगे.

साथ ही ईवीएम को लेकर सवाल उठने पर अशोक गहलोत ने कहा कि यह बात में कई बार पहले कह चुका हूं कि सुप्रीम कोर्ट माननीय सर्वोच्च न्यायालय स्वयं कन्वींस हो गए थे कि ईवीएम में गड़बड़ हो सकती है, टेंपरिंग हो सकती है. तभी तो उन्होंने वीवीपैट का प्रावधान किया इसका मतलब तो तय है कि इसमें टैंपरिंग होने की संभावना तभी तो वीवीपैट लाया गया तो वो संभावना तो है. इसीलिए मांग उचित है कि 50% काउंटिंग करो, या 25% करो और मैंने सुना है कल धरना दे रहे हैं. मिस्टर चंद्रबाबू नायडू तो यह नौबत क्यों आ रही है? 

गहलोत ने कहा कि पिछले सप्ताह हम लोग गए थे इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया में, मैं भी साथ था, कल भी शायद हम जा सकते हैं तब भी मैंने यह क्वेश्चन किया था वहां पर कि सुप्रीम कोर्ट जब मान चुका है टैंपरिंग हो सकती है तब ही वीवीपैट आया है. क्यों नहीं दुनिया के तमाम मुल्कों में अमेरिका में, इंग्लैंड में, विकसित राष्ट्रों के अंदर यह मशीनें समाप्त हो गई है तो हिंदुस्तान जैसे मुल्क में संदेह पैदा हो गया जनता में और इतने बड़े डेमोक्रेटिक मुल्क के अंदर संदेह नहीं रहना चाहिए. 

जबकि इलेक्शन कमीशन की निष्पक्षता पर सवाल  पर अशोक गहलोत ने कहा कि निष्पक्षता पर सवाल नहीं उठ रहे हैं, निष्पक्ष रहा ही नहीं इलेक्शन कमीशन यह सिद्ध हो गया है पूरे इलेक्शन के अंदर और आजादी के बाद में पहली बार जिस कदर इलेक्शन कमीशन के ऊपर आरोप लगे हैं ऐसे आरोप पहले कभी नहीं लगे थे. कोई जवाब देते हुए नहीं बनता है इलेक्शन कमीशन के अंदर यह स्थिति बन गई है. 1 मेंबर का 4 पत्र लिखना कुछ मायने रखता है, सुप्रीम कोर्ट के चार जजेज का प्रेस कॉन्फ्रेंस करना मायने रखता है, सीबीआई, इनकम टैक्स, ईडी का दुरुपयोग मायने रखता है. तो आप देश को किस दिशा में ले जाना चाहते हो पूरा मुल्क देख रहा है और इसीलिए मैं बार-बार कहता हूं मीडिया दबाव के अंदर है चाहते हुए भी सच नहीं दिखा पा रहा है.