राजस्थान: लॉकडाउन में मानसिक तनाव की स्थितियों में इजाफा, बीमा कंपनी लाएंगी प्रावधान

वरिष्ठ आर्थिक विशेषज्ञ संदीप अग्रवाल का कहना है कि, हालिया दौर में बढ़े मामलों के बाद, अब बीमा कंपनियां इसे प्रमुखता से अपने प्लान में शामिल करने की तैयारी में हैं.

राजस्थान: लॉकडाउन में मानसिक तनाव की स्थितियों में इजाफा, बीमा कंपनी लाएंगी प्रावधान
देश में 25 करोड़ लोग मानसिक विकार से पीड़ित हैं.

जयपुर: कोविड-19 (COVID-19) महामारी के बाद से डिप्रेशन और ऐंगजाइटी के मामलों में बढ़ोतरी हुई है. देश में 25 करोड़ लोग मानसिक विकार से पीड़ित हैं. 7 अप्रैल 2017 को मेंटल हेल्‍थकेयर एक्‍ट (2017) पारित हुआ था. तब तक मानसिक बीमारी इंश्‍योरेंस के दायरे में नहीं आती थी. लेकिन, 7 जुलाई 2018 से इसमें बदलाव हुआ.

एक्‍ट में सेक्‍शन 21 (4) जुड़ा.  यह कहता है कि, सभी बीमा कंपनियों को मानसिक बीमारी का इलाज करने के लिए मेडिकल इंश्‍योरेंस में प्रावधान करने होंगे. यह वैसे ही होगा जैसा किसी अन्‍य बीमारी के मामले में होता है. इसके बाद अगस्‍त 2018 में बीमा नियामक इरडा ने सभी बीमा कंपनियों को निर्देश जारी कर दिए.

इसमें एक्‍ट के प्रावधानों का अनुपालन करने के लिए कहा गया. इरडा ने 30 सितंबर 2019 को इसे लेकर दिशा-निर्देश जारी किए. इसमें मानसिक बीमारी, तनाव और मानसिक विकारों के एक्‍सक्‍लूजन पर रोक लगा दी गई. वरिष्ठ आर्थिक विशेषज्ञ संदीप अग्रवाल का कहना है कि, हालिया दौर में बढ़े मामलों के बाद, अब बीमा कंपनियां इसे प्रमुखता से अपने प्लान में शामिल करने की तैयारी में हैं.

जमीनी हकीकत यह है कि, बहुत थोड़ी बीमा कंपनियों ने इरडा (IRDA) के दिशा-निर्देशों का पालन किया है. स्थिति यहां तक आ गई कि, 16 जून 2020 को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) को केंद्र सरकार को निर्देश देने पड़े. वरिष्ठ बीमा सलाहकार बृज किशन का कहना है कि, बीमा कंपनियों की ओर से प्रदान बीमा कवर में अगर मेंटल इलनेस कवर लेने जा रहे हैं तो चेक कर लें कि, बीमारी के लिए अस्‍पताल में भर्ती होने की जरूरत है या उसका थेरेपी और दवाओं के जरिए इलाज किया जाएगा.

बात पहले वाली हो तो अस्‍पताल में भर्ती होने के खर्च को कवर करने वाले कॉम्प्रिहेंसिव इनडेमनिटी प्‍लान को लें. वहीं, दूसरी वाली स्थिति में ऐसे प्‍लान की जरूरत होगी, जिनमें ओपीडी (OPD) भी ऑफर किया जाता है. बीमा कंपनियां अपनी दरों को रिवाइज करने पर भी काम कर रही हैं. ऐसे में मानसिक रोग को बीमा कवर में शामिल करने बाद तय शुल्क में इजाफा तय है.