डीडवाना: 20 हजार के पार पहुंचा प्रवासी पक्षियों की मौत का आंकड़ा

हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद भले ही सरकार अब एक्टिव मोड में नजर आ रही है, लेकिन जो किया जा रहा है वह ऊंट के मुंह में जीरे से ज्यादा कुछ भी नहीं है. 

 डीडवाना: 20 हजार के पार पहुंचा प्रवासी पक्षियों की मौत का आंकड़ा
अब तक हजारों की संख्या में प्रवासी पक्षी काल के गाल में समा चुके हैं.

हनुमान तंवर, डीडवाना: सांभर झील में प्रवासी पक्षियों की मौत का मामला प्रदेश भर में गरमाया हुआ है. अब तक हजारों की संख्या में प्रवासी पक्षी काल के गाल में समा चुके हैं. वहीं हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद अब राज्य सरकार भी एक्टिव मोड में नजर आ रही है.

नागौर जिले में खारे पानी की दो झीले हैं और दोनों ही झीलें प्रवासी पक्षियों के लिए पसंदीदा क्षेत्र मानी जाती हैं. सुदूर पर्वतीय और ठंडे प्रदेशों से आने वाले प्रवासी पक्षियों का आरामगाह कहे जाने वाली सांभर झील इन दोनों झीलों में सबसे बड़ी झील है सांभर झील. इस झील में हजारों की तादाद में प्रवासी पक्षी हर साल आते हैं लेकिन इस बार यह झील प्रवासी पक्षियों के आरामगाह की जगह कब्रगाह बन गई. 

नहीं पता लगा पाए पक्षियों की मौत का कारण
10 नवंबर को यहां प्रवासी पक्षियों के शव मिलने का सिलसिला सांभर क्षेत्र से शुरू हुआ जो आज तक बदस्तूर जारी है. अब तक स्थानीय लोगों की माने तो यह आंकड़ा 20,000 के पार पहुंच चुका है लेकिन सरकारी आंकड़ा अभी तक 10,000 को पार नहीं कर पाया है. सरकार जो भी आंकड़ा मानें लेकिन यह जरूर मान रही है कि यहां प्रवासी पक्षियों की मौत हुई है लेकिन 10 दिन बाद भी आज तक सरकार या प्रशासन यह पता लगाने में कामयाब नहीं हो पाया कि आखिर इन बेजुबान पक्षियों की मौत का कारण क्या है?

हर रोज मिल रहे 1500 पक्षियों के शव
हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद भले ही सरकार अब एक्टिव मोड में नजर आ रही है, लेकिन जो किया जा रहा है वह ऊंट के मुंह में जीरे से ज्यादा कुछ भी नहीं है. 90 वर्ग मील क्षेत्र में फैली हुई झील में जहां हर रोज 15 सौ से ज्यादा पक्षियों के शव मिल रहे हैं. वहीं सरकार का दावा है कि 4 रेस्क्यू सेंटर खोले गए हैं, लेकिन सरकार के ही मंत्री सुखराम विश्नोई का कहना है कि एक रेस्क्यू सेंटर खोला गया है और जरूरत पड़ी तो और सेंटर खोले जाएंगे.

पक्षियों की रक्षा पर उठ रहे सवाल
सर्दी का मौसम शुरू हो चुका है और प्रवासी पक्षियों के आने का यही समय माना जाता है. आने वाले दिनों में सांभर झील में हजारों की तादाद में फ्लेमिंगो पहुंचने वाले हैं ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर इन आने वाली प्रवासी पक्षियों की रक्षा कैसे की जाएगी? प्रदेश सरकार भी मामले को लेकर गंभीर नजर आ रही है. अब देखना होगा कि सरकार पक्षियों के संरक्षक को लेकर क्या कदम उठाती है?

Edited by: Pooja Sharma, News Desk