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राजस्थान में विधायकों ने की एमएलए फंड बढ़ाने की मांग, लिखा सामूहिक पत्र

विधायक निधि कोष से राजस्थान का प्रत्येक विधायक अपने निर्वाचन क्षेत्र में सालाना सवा दो करोड़ रुपए के तक के विकास करा सकता है.

राजस्थान में विधायकों ने की एमएलए फंड बढ़ाने की मांग, लिखा सामूहिक पत्र
एमएलए फण्ड को सवा दो करोड़ से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपए सालाना करने की मांग उठ रही है.

जयपुर: राजस्थान के सभी विधायक अपना एमएलए लेड फंड बढ़वाना चाहते हैं और इसकी कवायद भी शुरू हो गई है. विधायकों ने एकजुट होकर विधायक निधि कोष बढ़ाने की मांग की है. पार्टी लाइन से ऊपर उठकर एक सुर में बोल रहे विधायकों ने मुख्यमन्त्री अशोक गहलोत को सामूहिक चिठ्ठी भी लिखी है. 

विधायक निधि कोष से राजस्थान का प्रत्येक विधायक अपने निर्वाचन क्षेत्र में सालाना सवा दो करोड़ रुपए के तक के विकास करा सकता है. इस योजना में सार्वजनिक हित के काम कराये जा सकते हैं. पिछली बार विधायक कोष में 25 लाख सालाना की बढ़ोत्तरी वसुंधरा राजे की सरकार ने साल 2016-17 में की थी. अब एक बार फिर एमएलए लेड फण्ड का दायरा सवा दो करोड़ से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपए सालाना करने की मांग उठ रही है.

भले ही किसी मुद्दे पर कांग्रेस-बीजेपी और माकपा-बसपा के विधायक एकराय न रखते हों, लेकिन विधायक कोष के मामले में ऐसा कतई नहीं है. सभी विधायक एक सुर में एमएलए लेड फण्ड बढ़ाने की मांग कर रहे हैं. यही कारण है कि सभी ने मिलकर सामूहिक पत्र मुख्यमन्त्री अशोक गहलोत को लिखा है. अपनी मांग के समर्थन में विधायक बढ़ती महंगाई और विकास कार्यों पर बढ़ती लागत के साथ ही विधानसभा क्षेत्र के बढ़ते दायरे और लोगों की अपेक्षाओं के तर्क भी दे रहे हैं. 

विधायक निधि में बढ़ोतरी की मांग के लिए सभी विधायक एकजुट दिख रहे हैं, ऐसे में इसका बढ़ना भी तय है. लेकिन सवाल यह है कि आखिर कितने विधायक हैं जो सालाना अपने एमएलए लेड फंड को खर्च भी करते हैं. पिछले तीन साल के हालात पर नजर डालें तो साल 2015-16 में 33 हज़ार 177 लाख 55 हज़ार रुपये खर्च करके 3208 प्रोजेक्ट पर काम हुआ. जबकि साल 2017-18 में योजना से 47,307 लाख 58 हज़ार यानि रुपए यानि 473 करोड़ रुपए खर्च किये गए. जिससे 12 हज़ार 897 विकास कार्य प्रदेश में हुए. वहीं साल 2018-19 में नवम्बर 2018 तक 29,997 लाख 67 हज़ार रुपये, यानि 299 करोड़ 97 लाख रुपए खर्च करके 7 हज़ार 244 काम हुए.

इन आंकड़ों पर गौर करने पर पता चलता है कि साल 2015-16 के मुकाबले 2017-18 औऱ 2018-19 के आठ महीनों में विधायकों ने अपने कोष से खूब पैसा खर्च किया. 2017-18 में तो विधायक कोष के पैंतालीस हज़ार करोड़ के फण्ड के पार यह खर्चा पहुंच गया. इसका सीधा सा मतलब है कि यह पैसा 2017 के पहले फण्ड में पैन्डिंग चले आ रहे पैसे से लिया गया. अब सवाल यह है कि जब विधायक सवा दो करोड़ रुपया सालाना भी पूरा खर्च नहीं कर पा रहे. पांच करोड़ रुपए के लिए प्रदेश की सबसे बड़ी पंचायत के सदस्यों के पास क्या कार्य योजना है?