जिस ठेकेदार पर बंदर पकड़ने का जिम्मा, उसका अनुभव प्रमाण पत्र ही निकला फर्जी

नगर निगम में एक ठेके के साथ अन्य ठेकों में कथित गड़बड़ी की शिकायत और जांच की मांग पिछले दिनों भी की गई थी.

जिस ठेकेदार पर बंदर पकड़ने का जिम्मा, उसका अनुभव प्रमाण पत्र ही निकला फर्जी
प्रतीकात्मक तस्वीर.

देवेंद्र सिंह, भरतपुर: शहर नगर निगम ने 20 लाख रुपये की लागत से जिस ठेकेदार को बंदर पकड़ने का जिम्मा सौंपा था, उसका अनुभव पत्र प्रमाण पत्र ही प्रारंभिक जांच में फर्जी निकला है. 

हकीकत यह है कि नगर निगम ने टेंडर की प्रमुख शर्त में दो साल के कार्य अनुभव को शामिल किया था. अब मेयर ने इस प्रकरण को लेकर जांच के लिए आयुक्त को लिखा है. खुद मेयर के स्तर पर हुई प्रारंभिक जांच में यह मामला सामने आया है. 

मेयर अभिजीत कुमार जाटव का कहना है कि उन्होंने स्वयं के स्तर पर जांच कराई थी. एनएस फर्म का कम्प्यूटर वाले प्रकरण में लिखित में शिकायत आई थी. उसकी मैंने फाइल मंगाई. एनएस सर्विस को कई काम दिए गए थे. बंदर पकड़ने वाली फाइल भी मेरे पास आ गई. प्रथम दृष्टया ठेके में शर्तों का उल्लंघन किया गया है. आयुक्त को जांच के लिए लिखा गया है.

क्या है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार, बंदर पकड़ने का कार्य कराने के लिए नौ जनवरी 2020 को निविदा जारी की गई. इसमें 20 लाख रुपये की लागत से शहर के अंदर बंदरों को पकड़ने का कार्य कराना तय किया गया था. इस टेंडर की प्रमुख शर्त में बंदर पकड़ने का दो वर्ष अनुभव अनिवार्य था. ऑनलाइन आमंत्रित निविदा में फर्म एनएस सर्विस की ओर से अपनी बोली प्रेषित की गई. इसके साथ एक वर्ष का अनुभव हिमांशु चौधरी के नाम से मेरठ नगर निगम का बताया गया. जो कि मेरठ नगर निगम के नाम से जारी अनुभव प्रमाण पत्र में 2016-17 में कार्य करना बताया गया. यह प्रमाण पत्र 12 जनवरी 2018 को जारी करना बताया गया. इसके साथ कार्य आदेश संलग्न नहीं था.

क्या है नियम
नियम यह है कि अनुभव प्रमाण पत्र के साथ ही कार्य आदेश संलग्न करना होता है. उक्त कार्य की निविदा 24 जनवरी 2020 को खोली गई. निविदा खोलने के समय तकनीकी और वित्तीय बिड न खोलते हुए सीधे टेंडर ही खोला गया. टेंडर खोलते समय उक्त दस्तावेज नगर निगम को प्राप्त हुआ. उस समय इन दस्तावेजों का सत्यापन भी नहीं किया गया. 

प्रभारी अधिकारी नगर निगम की ओर से संवेदक की प्राप्त दर 798 रुपये मिलने पर नेगोशिएशन पत्र तीन फरवरी 2020 को संवेदक को दिया गया. इसमें दर अधिक होना बताया गया. इस पर एनएस सर्विस की ओर से 48 रुपए की दर कम करते हुए 750 रुपए दर पर सहमति व्यक्त की गई. इस पर नगर निगम के सचिव की ओर से दो मार्च 2020 को 750 रुपये प्रति बंदर की दर से कार्य आदेश 20 लाख रुपये का जारी किया गया.

ऐसे हुआ खुलासा
नगर निगम में एक ठेके के साथ अन्य ठेकों में कथित गड़बड़ी की शिकायत और जांच की मांग पिछले दिनों भी की गई थी. ऐसे प्रकरणों की जांच की मांग के साथ ही नगर निगम के अधिकारियों में भी हड़कंप मच गया था. अब ताजा मामला यह था कि एक ठेके के प्रकरण में जांच की मांग का मामला सामने आने के बाद मेयर ने कुछ फाइलों को मंगाया. 

उन्हीं फाइलों में बंदर पकड़ने के ठेका की फाइल भी शामिल थी. इसकी प्रारंभिक जांच में यह खुलासा हुआ. अब अगर इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई गई तो खुलासा हो सका है. चूंकि नगर निगम में पिछले कुछ सालों के अंदर हुए प्रकरणों पर नजर डालें तो रसूख के दबाव में जांच का जिम्मा भी खामियां करने वालों को ही सौंप दिया जाता है. इससे हकीकत कभी निकल कर सामने नहीं आती है.

ठेके की प्रक्रिया पर खड़े हुए ये सवाल
1. नगर निगम में ठेका प्रक्रिया में पारदर्शिता का दावा किया जाता है तो दस्तावेजों का सत्यापन किसने किया ?
2. अनुभव प्रमाण पत्र के साथ उसका कार्य आदेश किस अधिकारी या कर्मचारी ने जांच किया ?
3. टेंडर कमेटी में शामिल किस अधिकारी ने शर्तों का उल्लंघन होने पर भी कार्य आदेश जारी किया?
4. मेरठ नगर निगम ने जब लिखकर दे दिया है तो अब जांच किस बात की?
5. अगर शर्तों का उल्लंघन किया है तो किसके कहने पर किया गया और नहीं है तो मेरठ नगर निगम ने पत्र में अनुभव प्रमाण पत्र जारी करना स्वीकार क्यों नहीं किया.