राजस्थान: 3 करोड़ से ज्यादा आबादी को नहीं मिल रहा रोजना पानी, बूंद-बूंद को तरस रहे लोग

मरूधरा की धरती पर पानी की प्यास लगातार बढ़ती जा रही है. बूंद-बूंद के लिए ना केवल गांव के लिए लोग, बल्कि शहर के लोग भी तरस रहे है. 

राजस्थान: 3 करोड़ से ज्यादा आबादी को नहीं मिल रहा रोजना पानी, बूंद-बूंद को तरस रहे लोग
गांव की 57 करोड़ 68 लाख आबादी तक ही पानी पहुंच पा रहा है.

जयपुर: राजस्थान में गांव से लेकर शहरों तक पानी के लिए जनता लाईनों में लगी है. एक तरफ आसमान ने आग ने जला दिया है, वहीं दूसरी और पानी की एक एक बूंद को लेकर करोड़ो लोग तरस रहे है. हैरान करने वाली बात ये है कि राजस्थान में 3 करोड से ज्यादा लोग रोजाना अपनी प्यास नहीं बुझा पा रहे है. 

मरूधरा की धरती पर पानी की प्यास लगातार बढ़ती जा रही है. बूंद-बूंद के लिए ना केवल गांव के लिए लोग, बल्कि शहर के लोग भी तरस रहे है. पीएचईडी की रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान के तीन करोड़ लोग आज भी रोजना प्यासे रह जाते है. इस प्यास को बुझाने के लिए पीएचईडी चाहकर भी कुछ नहीं कर सकता, क्योंकि कहीं धरती खुद प्यासी है तो कहीं पानी का नामो निशान ही नहीं. ऐसे में पीएचईडी गांव और शहर की प्यास बुझाने के लिए अब लाचार बना हुआ है.

2011 की जनसंख्या के मुताबिक राजस्थान में गांव की आबादी करीब 5 करोड़ 15 लाख थी. बीते 8 सालों में अनुमानित 16 फीसदी गांव की आबादी में इजाफा हुआ है. इस हिसाब से राजस्थान में करीब 8 करोड़ 24 लाख आबादी निवास करती है, लेकिन इसमें से 2 करोड 47 लाख 20 हजार लोग रोजाना प्यासे ही रह जाते है. गांव की 57 करोड़ 68 लाख आबादी तक ही पानी पहुंच पा रहा है. 

ऐसे में गांव में रहने वाले 30 फीसदी आबादी आज भी अपनी प्यास नहीं बुझा पा रही है. पीएचईडी के मुताबिक राजस्थान में गांव की आबादी को 3 अरब 29 करोड़ 60 लाख लीटर पानी रोजाना मिलना चाहिए. यानि 3296 मिलियन पानी की सप्लाई जरूरत के हिसाब से मिलना चाहिए. लेकिन हैरानी बात ये है कि सिर्फ 2307.2 मिलियन ही पानी गांव की आबादी तक पहुच पाता है.

अब गांव से निकलकर शहरों की बात करे तो वहां भी कुछ ऐसे ही कोरे वादे दिखाई देते है. 2011 की जनगणना के मुताबिक राजस्थान की शहर की आबादी 1 करोड़ 17 लाख थी. अनुमान के मुताबिक इन 8 सालों में करीब 18 फीसदी शहर की आबादी में इजाफा हुआ है. इस हिसाब से राजस्थान में आज करीब 2 करोड़ 10 लाख 60 हजार शहर की आबादी है. मरूधरा के शहरों को इस हिसाब से 2 अरब 84 करोड़ 31 लाख लीटर यानि 2843 मिलियन पानी रोजाना मिलना चाहिए. लेकिन यहां भी हैरानी की बात ये है कि शहर में भी रोजाना 63 लाख 18 हजार लोग रोजाना प्यारे रह जाते है. पीएचईडी शहर में करीब 1990.17 मिलियन ही पानी की सप्लाई कर पाता है.

कुल मिलाकर राजस्थान के गांव और शहर की करीब 3 करोड 10 लाख 38 हजार लोग रोजाना अपनी प्यास ही नहीं बुझा पाते है. पीचएचईडी रोजाना 4297.37 मिलियन ही पानी दे पाता है, जबकि राजस्थान को रोजाना 6139.1 मिलियन ही पानी मिलना चाहिए.