अजमेर: सिस्टम की लापरवाही खा गई स्टूडेंट्स का ट्रांसपोर्ट वाउचर, 5 लाख से ज्यादा बच्चे वंचित

गरीब बच्चे भी इस वाउचर के माध्यम से मिलने वाली राशि से अपने गांव से उस स्कूल का सफर तय करते थे, जो उनके गांव से बहुत ज्यादा दूर थे.

अजमेर: सिस्टम की लापरवाही खा गई स्टूडेंट्स का ट्रांसपोर्ट वाउचर, 5 लाख से ज्यादा बच्चे वंचित
प्रदेश के करीब पांच लाख से अधिक बच्चों को सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ मिलने लगा था.

मनवीर सिंह, अजमेर: प्रदेश में सरकार क्या बदली, बच्चों के हितों पर सिस्टम की लापरवाही ने डाका डाल दिया. यहां बात उस ट्रांसपोर्ट वाउचर की हो रही है, जिसे पिछली बीजेपी सरकार ने दूर-दराज से आने वाले गरीब बच्चों के परिवहन के लिए लागू किया था.

प्रदेश के करीब पांच लाख से अधिक बच्चों को सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ मिलने लगा था. गरीब बच्चे भी इस वाउचर के माध्यम से मिलने वाली राशि से अपने गांव से उस स्कूल का सफर तय करते थे, जो उनके गांव से बहुत ज्यादा दूर थे. अब जब शिक्षा सत्र समाप्त होने को है, तब कहीं जाकर शिक्षा विभाग को इस योजना की सुध आई है.

पिछले एक साल से इन गरीब बच्चों के हकों पर शिक्षा विभाग की लापरवाही दंश बन कर कहर ढहाने लगी है. शिक्षा विभाग द्वारा न जाने क्यों ट्रांसपोर्ट वाउचर की इस योजना को बिसरा दिया गया. न तो शिक्षा मंत्री का ध्यान और न ही जिला स्तर पर जिला शिक्षा अधिकार द्वारा ही ट्रांसपोर्ट वाउचर्स को लेकर कोई सक्रियता दिखाई गई. 

यदि केवल अजमेर जिले की कि जाए तो वर्ष 2019-20 के सत्र में जिले की 1847 स्कूलों में से मात्र 127 स्कूलों ने ही ट्रांसपोर्ट वाउचर के लिए शाला दर्पण पोर्टल पर आवेदन किया है लेकिन सिस्टम की मार कुछ ऐसी है कि इन 127 स्कूलों के बच्चो को भी ट्रांसपोर्ट वाउचर की राशि का भुगतान तब तक नहीं किया जा सकता है, जब तक कि जिले की सभी स्कूलों के आवेदन प्राप्त होने के बाद सरकार द्वारा इस राशि का भुगतान संबंधित जिले को नहीं कर दिया जाता. कुछ इसी तरह के हालात पूरे प्रदेश के हैं.

कई इलाकों में ड्राप आउट विद्यार्थियों की बढ़ रही संख्या
शिक्षा विभाग की इस लापरवाही का सबसे बड़ा खामियाजा उन छात्र-छात्राओं को भुगतना पड़ रहा है, जो पहले तो अपने गांव की स्कूल से दूरी और दूसरी गरीबी की मार से परेशान है. ट्रांसपोर्ट वाउचर की कमी का नतीजा कई इलाकों में ड्राप आउट विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या के रूप में सामने आ रहा है. पूर्व शिक्षा राज्य मंत्री और अजमेर उत्तर से बीजेपी विधायक वासुदेव देवनानी इस मुद्दे पर प्रदेश की कांग्रेस सरकार को घेर रहे हैं. देवनानी का आरोप है कि प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनने के बाद शिक्षा पूरी तरफ से पटरी से उतर चुकी है.

बच्चों को नहीं मिल पाया इस योजना का लाभ
बात यदि पूरे प्रदेश की कि जाए तो तस्वीर कुछ इस तरह नजर आती है. पूरे प्रदेश में वर्ष 2018-19 के सत्र में कक्षा पहली से आठवीं तक के 5,17,506 बच्चों को इस योजना का लाभ मिल रहा था. साथ ही कक्षा 9 से 12 तक की 14,525 छात्राओं को भी सरकार के खाते ट्रांसपोर्ट वाउचर की राशि प्राप्त हो रही थी. यदि इस राशि की गणना की जाए तो यह राशि सालाना एक अरब रूपये से अधिक पहुच जाती है. वहीं, यदि बात केवल अजमेर जिले की कि जाए तो इस सत्र में कक्षा पहली से पांचवी तक के 2586 और कक्षा 6 से 8 तक 3218 तथा 9 से 12 तक 221 विद्यार्थियों को इस राशि का भुगतान प्राप्त होता था लेकिन इस शिक्षा सत्र में इन तमाम बच्चों को सरकार की इस योजना का कोई लाभ नहीं मिल पाया है.

शिक्षा सत्र की समाप्ति को नजदीक देख जागा विभाग
इसमें कोई दो राय नहीं कि शिक्षा सत्र की समाप्ति को नजदीक देख कर शिक्षा विभाग की नींद टूटी है लेकिन यह भी एक कड़वा सत्य है कि अभी तक भी बच्चों को इस योजना का लाभ उनके खातो में नहीं मिल पाया है. वहीं, शिक्षा विभाग का दावा है कि फरवरी माह में अधिकांश स्कूलों में यह राशि पहुंचाने का प्रयास शुरू कर दिया गया है.