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माउंट आबू: अपने ही अधिकारियों के खिलाफ विरोध कर रहे पालिकाध्यक्ष ने खत्म किया धरना

माउंट आबू नगर पालिका में वर्तमान में कुल बीस पार्षद हैं, जिनमे बुधवार को पालिकाध्यक्ष के साथ केवल तीन ही इस धरना स्थल पर नजर आए थे.

माउंट आबू: अपने ही अधिकारियों के खिलाफ विरोध कर रहे पालिकाध्यक्ष ने खत्म किया धरना
धरने पर बैठे अध्यक्ष का कहना था कि आम जनता के काम नहीं हो पा रहे हैं.

माउंट आबू: नगर पालिका माउंट आबू में आम लोगों के कार्य नहीं हो पाने और उन्हें राहत नहीं मिल पाने की दलील को लेकर धरने पर बैठे माउंट आबू के पालिकाध्यक्ष का धरना नाटकीयता भरे अंदाज में गुरुवार देर शाम को खत्म हो गया. उल्लेखनीय है कि, पालिका के विरुद्ध पालिकाध्यक्ष ही बुधवार को अपने गिनती के कुछ समर्थकों के साथ धरने पर बैठे थे.

बुधवार को जब पालिकाध्यक्ष धरना देने, धरना स्थल उपखंड अधिकारी कार्यालय के बाहर आए उनके साथ कुछ लोग ही साथ थे. मीडिया के समक्ष दिए गए बयान में उन्होंने अपने साथ शहर की समस्त जनता व पार्षदों का सहयोग समर्थन होने की बात कही थी. लेकिन धटनास्थल पर ऐसा कहीं दिखना तो दूर महसूस तक भी नहीं हो पाया. क्योंकि की पचास कदमों की दूरी पर ही भाजपा व कांग्रेस के पार्षद खड़े थे, लेकिन मात्र चार-पांच पार्षदों को छोड़ कर के कोई भी पालिका पार्षद उनके साथ नहीं दिखाई दिया.

वहीं, जब विपक्ष यानी कि कांग्रेस के पार्षदों से बात की गई तो उनका कहना था कि आज सारे कार्य माउंट आबू में हो रहे हैं. उपखंड अधिकारी जब से माउंट आबू के आयुक्त के चार्ज लेकर के कार्य को कर रहे हैं. माउंट आबू के विकास कार्यों में काफी कुछ बदलाव देखने को मिल रहा है और यहां पर भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा है. भाजपा के अपने लोगों के गलत कार्य नहीं होने के वजह से यह लोग हाल ही में आई कांग्रेस सरकार बदनाम करने के लिए इस तरह के स्टंट कर रहे हैं. जिसके पीछे ना तो कोई जनाधार है और ना ही कोई समर्थन.

अपनी किरकिरी कराकर के, आम जनता के मध्य हास्य के पात्र बन रहे पालिकाध्यक्ष के इस कार्य को आख़िरकार किसी न किसी औपचारिक बुलावे का ही इंतजार था. क्योंकि उन्हें अपने इस धरने में कोई भारी जन समर्थन प्राप्त नहीं था. ऐसे में निर्माण समिति के अध्यक्ष सुनील आचार्य की मध्यस्थता मात्र से ही धरना उपखण्ड अधिकारी से हुई वार्ता के बाद खत्म हो गया और इस नाटकीयता पर पूर्ण विराम लग गया.