किसान स्वाभिमान रैली में हनुमान बेनीवाल और प्रशासन के बीच सफल वार्ता, मंगलवार तक मिला समय

Hanuman Beniwal: हनुमान बेनीवाल पूरी रात कड़ाके की ठंड में धरने पर डटे रहे. उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और कहा कि बजरी माफियाओं को संरक्षण मिल रहा है, जिससे किसानों की जमीनें बर्बाद हो रही हैं, पर्यावरण नष्ट हो रहा है और सरकारी राजस्व की भारी हानि हो रही है.

किसान स्वाभिमान रैली में हनुमान बेनीवाल और प्रशासन के बीच सफल वार्ता, मंगलवार तक मिला समय
Image Credit: Nagaur NewsSource: ज़ी न्यूज़ डेस्क

Nagaur News: नागौर जिले के रियाबड़ी (रियांबड़ी) में अवैध बजरी खनन के खिलाफ चल रही किसान स्वाभिमान रैली और अनिश्चितकालीन धरने में आज एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया. राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के सुप्रीमो एवं नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल के नेतृत्व में सैकड़ों किसानों ने प्रशासन के साथ कई घंटों तक चली गहन वार्ता की. यह वार्ता किसानों की वर्षों पुरानी समस्याओं को लेकर एक निर्णायक पड़ाव साबित हुई.

मुख्य मांगें और किसानों का अडिग रुख

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-अवैध बजरी खनन पर तत्काल पूर्ण रोक लगाई जाए

-बजरी माफियाओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए

-रेलवे लाइन निर्माण से प्रभावित किसानों को उचित और समयबद्ध मुआवजा दिया जाए

-क्षेत्र में पर्यावरण क्षति की भरपाई और प्रभावित खेती-बाड़ी को बहाल करने के उपाय किए जाएं

किसानों ने स्पष्ट संदेश दिया कि वे किसी भी सूरत में बिना ठोस लिखित आश्वासन या वास्तविक कार्रवाई के धरना स्थल नहीं छोड़ेंगे. हनुमान बेनीवाल ने कहा, "हमारी लड़ाई सिर्फ कागजी आश्वासनों के लिए नहीं है, बल्कि वास्तविक न्याय और राहत के लिए है."

प्रशासन द्वारा दो दिन का समय मांगा

प्रशासन के उच्चाधिकारियों ने किसानों की सभी मांगों पर गंभीरता से विचार करने और आवश्यक कदम उठाने के लिए दो दिन यानी मंगलवार तक का समय मांगा. प्रशासन का कहना था कि इतने कम समय में सभी मांगों पर लिखित आश्वासन या प्रारंभिक कार्रवाई संभव हो सकेगी.

हनुमान बेनीवाल की सहमति और किसानों का फैसला

हनुमान बेनीवाल ने किसानों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया. सभी किसान प्रतिनिधियों की सहमति के बाद उन्होंने प्रशासन के प्रस्ताव को अस्थायी रूप से स्वीकार कर लिया. इसके साथ ही धरना स्थगित कर दिया गया, लेकिन आंदोलन को पूरी तरह समाप्त नहीं किया गया. बेनीवाल ने चेतावनी देते हुए कहा, "मंगलवार तक अगर ठोस कार्रवाई या लिखित आश्वासन नहीं मिला, तो हमारा आंदोलन और भी तेज होगा. हम किसानों से अपील करते हैं कि वे एकजुट रहें और इस न्याय की लड़ाई को अंत तक जारी रखें."

किसान नेताओं की प्रतिक्रिया और भविष्य की योजना

किसान नेताओं ने इस वार्ता को एक सकारात्मक कदम माना, लेकिन साथ ही सावधानी भी बरतने की बात कही. उनका कहना है कि पिछले कई वर्षों से रियाबड़ी क्षेत्र में बजरी माफियाओं के कारण किसानों की जमीनें कट रही हैं, फसलें बर्बाद हो रही हैं और पर्यावरण को गहरा नुकसान पहुंच रहा है. कई किसानों को धमकियां भी मिल चुकी हैं. वे मानते हैं कि असली सफलता तब होगी, जब मांगें सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर पूरी होंगी.

अब सभी की नजरें मंगलवार पर

अब पूरी नजरें मंगलवार पर टिकी हुई हैं. अगर प्रशासन ने वादे के मुताबिक कदम नहीं उठाए, तो किसान आंदोलन को नए सिरे से और अधिक तीव्रता के साथ शुरू करने की तैयारी में हैं. यह घटनाक्रम राजस्थान में अवैध खनन के मुद्दे को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला रहा है.

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Ansh Raj

Ansh Raj

अंश राज, Zee Rajasthan में सब-एडिटर के तौर पर कार्यरत है. राजस्थान की हर छोटी-बड़ी खबर पर पैनी नजर रखते हैं. क्राइम, पॉलिटिक्स और पावर कॉरिडोर की खबरों में खास दिलचस्पी. ऑपरेशन सिंदूर से लेकर विधानसभा चुनाव और प्रदेश के दिग्गज नेताओं के हर बयान पर नजर. हेडलाइन से खेलना, खबर की काट-छांट करने में मजा आता है. इसके अलावा कंटेंट को पैकेजिंग करके परोसना इनकी खासियत है. डिजिटल मीडिया में करीब 3 साल का अनुभव. इससे पहले Zee Uttar Pradesh/Uttarakhand और Zee Bharat के साथ काम कर चुके हैं. चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म में मास्टर्स किया है और वर्तमान में मेरठ कॉलेज से LLB की पढ़ाई कर रहे हैं. खबरों की गंध सूंघने और उसे सबसे पहले, सबसे तेज परोसने का जुनून. यही अंश राज हैं
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