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Nagaur News: नागौर जिले के रियाबड़ी (रियांबड़ी) में अवैध बजरी खनन के खिलाफ चल रही किसान स्वाभिमान रैली और अनिश्चितकालीन धरने में आज एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया. राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के सुप्रीमो एवं नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल के नेतृत्व में सैकड़ों किसानों ने प्रशासन के साथ कई घंटों तक चली गहन वार्ता की. यह वार्ता किसानों की वर्षों पुरानी समस्याओं को लेकर एक निर्णायक पड़ाव साबित हुई.
मुख्य मांगें और किसानों का अडिग रुख
-अवैध बजरी खनन पर तत्काल पूर्ण रोक लगाई जाए
-बजरी माफियाओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए
-रेलवे लाइन निर्माण से प्रभावित किसानों को उचित और समयबद्ध मुआवजा दिया जाए
-क्षेत्र में पर्यावरण क्षति की भरपाई और प्रभावित खेती-बाड़ी को बहाल करने के उपाय किए जाएं
किसानों ने स्पष्ट संदेश दिया कि वे किसी भी सूरत में बिना ठोस लिखित आश्वासन या वास्तविक कार्रवाई के धरना स्थल नहीं छोड़ेंगे. हनुमान बेनीवाल ने कहा, "हमारी लड़ाई सिर्फ कागजी आश्वासनों के लिए नहीं है, बल्कि वास्तविक न्याय और राहत के लिए है."
प्रशासन द्वारा दो दिन का समय मांगा
प्रशासन के उच्चाधिकारियों ने किसानों की सभी मांगों पर गंभीरता से विचार करने और आवश्यक कदम उठाने के लिए दो दिन यानी मंगलवार तक का समय मांगा. प्रशासन का कहना था कि इतने कम समय में सभी मांगों पर लिखित आश्वासन या प्रारंभिक कार्रवाई संभव हो सकेगी.
हनुमान बेनीवाल की सहमति और किसानों का फैसला
हनुमान बेनीवाल ने किसानों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया. सभी किसान प्रतिनिधियों की सहमति के बाद उन्होंने प्रशासन के प्रस्ताव को अस्थायी रूप से स्वीकार कर लिया. इसके साथ ही धरना स्थगित कर दिया गया, लेकिन आंदोलन को पूरी तरह समाप्त नहीं किया गया. बेनीवाल ने चेतावनी देते हुए कहा, "मंगलवार तक अगर ठोस कार्रवाई या लिखित आश्वासन नहीं मिला, तो हमारा आंदोलन और भी तेज होगा. हम किसानों से अपील करते हैं कि वे एकजुट रहें और इस न्याय की लड़ाई को अंत तक जारी रखें."
किसान नेताओं की प्रतिक्रिया और भविष्य की योजना
किसान नेताओं ने इस वार्ता को एक सकारात्मक कदम माना, लेकिन साथ ही सावधानी भी बरतने की बात कही. उनका कहना है कि पिछले कई वर्षों से रियाबड़ी क्षेत्र में बजरी माफियाओं के कारण किसानों की जमीनें कट रही हैं, फसलें बर्बाद हो रही हैं और पर्यावरण को गहरा नुकसान पहुंच रहा है. कई किसानों को धमकियां भी मिल चुकी हैं. वे मानते हैं कि असली सफलता तब होगी, जब मांगें सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर पूरी होंगी.
अब सभी की नजरें मंगलवार पर
अब पूरी नजरें मंगलवार पर टिकी हुई हैं. अगर प्रशासन ने वादे के मुताबिक कदम नहीं उठाए, तो किसान आंदोलन को नए सिरे से और अधिक तीव्रता के साथ शुरू करने की तैयारी में हैं. यह घटनाक्रम राजस्थान में अवैध खनन के मुद्दे को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला रहा है.
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