संगमरमर चमत्कार से बना आलिशान ताजमहल, अयोध्या राम मंदिर में भी हुआ इस्तेमाल, 2,000 साल पुरानी है मकराना की खदान...

Sangmarmar Makrana Mines: मकराना की 2,000 साल पुरानी खदानें अपने संगमरमर चमत्कार के लिए विश्वविख्यात हैं, जिसने आलिशान ताजमहल की नींव को सजाया और आज अयोध्या के राम मंदिर में भी इसका उपयोग हुआ. यह सफेद संगमरमर अपनी अनूठी चमक, मजबूती और महीन बनावट के लिए जाना जाता है.हाल ही में इस प्राचीन पत्थर ने राम मंदिर की भव्यता को नया आयाम दिया.

संगमरमर चमत्कार से बना आलिशान ताजमहल, अयोध्या राम मंदिर में भी हुआ इस्तेमाल, 2,000 साल पुरानी है मकराना की खदान...
Image Credit: Sangmarmar Makrana MinesSource: ज़ी न्यूज़ डेस्क

नागौर जिले का मकराना भारत का सबसे बड़ा संगमरमर खदान है, जहां से ताजमहल के लिए सफेद संगमरमर लाया गया. यह खदान 2,000 साल पुरानी है और आज भी सक्रिय है.

खदानों का एक चमत्कारी खजाना है मकराना कस्बा
राजस्थान के नागौर जिले में बसा मकराना कस्बा संगमरमर की खदानों का एक चमत्कारी खजाना है. यहाँ की चट्टानों से निकलने वाला शुद्ध सफेद संगमरमर न केवल भारत की सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है, बल्कि विश्व प्रसिद्ध ताजमहल की नींव भी. प्राचीन काल से चली आ रही यह परंपरा आज भी लाखों लोगों को रोजगार देती है.

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बेदाग सफेदी, महीन बनावट
मकराना संगमरमर, जिसे 'मकराना मार्बल' कहा जाता है, अपनी बेदाग सफेदी, महीन बनावट और पारदर्शिता के लिए जाना जाता है. यह संगमरमर इतना मजबूत है कि सदियों की मार झेलने के बाद भी अपनी चमक न खोए.

मुमताज महल की याद में ताजमहल
इतिहास गवाह है कि 17वीं शताब्दी में मुगल सम्राट शाहजहाँ ने अपनी पत्नी मुमताज महल की याद में ताजमहल बनवाया. आगरा में बने इस प्रेम के प्रतीक के लिए मकराना से ही हजारों टन संगमरमर मंगवाया गया. यह संगमरमर ताज की दीवारों, गुंबद और जटिल जड़ाऊ कला 'पिएत्रा दुरा' में इस्तेमाल हुआ, जो सेमी-प्रेसियस पत्थरों से सजा है.

Sangmarmar Makrana Mines
Sangmarmar Makrana Mines

मकराना की खदानों—जैसे डूंगरी, देवी, उलोदी और पहाड़ कुआ—से निकला यह पत्थर ताज को वह दिव्य आभा देता है, जो सूर्योदय-स्तुति में रंग बदलती है. विशेषज्ञों के अनुसार, इस संगमरमर की उच्च गुणवत्ता और टिकाऊपन ने इसे ताज के लिए आदर्श बनाया.

अरावली पहाड़ियों में फैली 900 से अधिक खदानें
मकराना संगमरमर का महत्व केवल ताज तक सीमित नहीं. यह विक्टोरिया मेमोरियल (कोलकाता), दिलवाड़ा जैन मंदिर (माउंट आबू), बिरला मंदिर (जयपुर) और हाल ही में अयोध्या के राम मंदिर में भी इस्तेमाल हुआ. यह संगमरमर मूर्तिकला, भवनों की सजावट और मंदिर निर्माण में अहम भूमिका निभाता है.

मकराना की अरावली पहाड़ियों में फैली 900 से अधिक खदानें सालाना 1.92 करोड़ टन संगमरमर उत्पादन करती हैं, जिससे 200 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व आता है. यहाँ 40,000 से ज्यादा मजदूर कार्यरत हैं, जो 136 गाँवों की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाते हैं. प्रति व्यक्ति आय 50,000 रुपये होने से मकराना राजस्थान का सबसे अमीर नगर पालिका है.

वैश्विक स्तर पर है संगमरमर की मांग
आज भी मकराना संगमरमर की मांग वैश्विक स्तर पर है. पर्यावरण विशेषज्ञ चेताते हैं कि अंधाधुंध खनन से जल स्तर गिर रहा है, लेकिन सरकारी प्रयासों से सतत विकास हो रहा. यह चमत्कार न केवल पत्थर का है, बल्कि कारीगरों की कुशलता और इतिहास की जीवंतता का भी. मकराना हमें सिखाता है कि धरती की गोद से निकला यह सफेद रत्न अमर प्रेम और कला का प्रतीक है.

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Ansh Raj

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अंश राज, Zee Rajasthan में सब-एडिटर के तौर पर कार्यरत है. राजस्थान की हर छोटी-बड़ी खबर पर पैनी नजर रखते हैं. क्राइम, पॉलिटिक्स और पावर कॉरिडोर की खबरों में खास दिलचस्पी. ऑपरेशन सिंदूर से लेकर विधानसभा चुनाव और प्रदेश के दिग्गज नेताओं के हर बयान पर नजर. हेडलाइन से खेलना, खबर की काट-छांट करने में मजा आता है. इसके अलावा कंटेंट को पैकेजिंग करके परोसना इनकी खासियत है. डिजिटल मीडिया में करीब 3 साल का अनुभव. इससे पहले Zee Uttar Pradesh/Uttarakhand और Zee Bharat के साथ काम कर चुके हैं. चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म में मास्टर्स किया है और वर्तमान में मेरठ कॉलेज से LLB की पढ़ाई कर रहे हैं. खबरों की गंध सूंघने और उसे सबसे पहले, सबसे तेज परोसने का जुनून. यही अंश राज हैं
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