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Didwana News: डीडवाना-कुचामन जिले के नावा में, आस्था और भक्ति का एक अद्भुत नजारा देखने को मिला. परिवर्तिनी एकादशी के पावन अवसर पर यहां स्थित प्राचीन श्री स्टेशन नाड़ा बालाजी मंदिर में 858वें वार्षिक मेले का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालु उमड़ पड़े.
पालकी में विराजित ठाकुर जी की रेवाड़ियां
मेले की शुरुआत सुबह धार्मिक अनुष्ठानों के साथ हुई. पंडित कुलदीप मिश्रा ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ मुख्य यजमान महेश यादव और सीताराम जांगिड़ से हवन करवाया. इस दौरान शहर और देश-प्रदेश में अमन-शांति की कामना की गई. हवन के बाद महाआरती हुई और प्रसाद वितरण किया गया.इस मेले का एक खास आकर्षण शहर के पांच प्रमुख ठाकुर जी मंदिरों से आने वाली 'रेवाड़ियां' रहीं. बैंड-बाजे के साथ पालकी में विराजित होकर ठाकुर जी की ये रेवाड़ियां शहर के मुख्य मार्गों से गुजरती हुई मंदिर परिसर पहुंचीं.
बालाजी मंदिर
स्टेशन नाड़ा बालाजी मंदिर का इतिहास बेहद पुराना है. इसका निर्माण विक्रम संवत 1223 (ईस्वी 1166) में गोकुल सिंह बंजारा नामक व्यक्ति ने करवाया था. यही वजह है कि आज भी बंजारा समाज के लोग इस वार्षिक मेले में विशेष रूप से दूर-दराज से दर्शन के लिए आते हैं. सुबह से ही मंदिर में दर्शनार्थियों का तांता लगा रहा. हर कोई बालाजी महाराज के दर्शन कर अपने जीवन में सुख-समृद्धि और परिवार के मंगल की कामना कर रहा था. मेले में झूले, खिलौने और दुकानों पर बच्चों व महिलाओं की भारी भीड़ देखी गई.
भजन-कीर्तन
यह माना जाता है कि परिवर्तिनी एकादशी के दिन बालाजी के दर्शन मात्र से ही सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं. दिन भर चले पूजा-पाठ और दर्शनों के बाद शाम को भजन-कीर्तन का दौर शुरू हुआ, जहां स्थानीय और बाहरी भजन कलाकारों ने अपनी मधुर प्रस्तुतियां देकर भक्तों को भक्ति रस में डुबो दिया.
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