नकवी ने अजमेर शरीफ में पढ़ा यह शेर, चढ़ाई PM मोदी द्वारा भेंट की गई चादर

विश्व प्रसिद्ध ख्वाजा गरीब नवाज की बारगाह में 808वें सालाना उर्स के मौके पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से मखमली चादर और अकीदत के फूल पेश किए गए.

नकवी ने अजमेर शरीफ में पढ़ा यह शेर, चढ़ाई PM मोदी द्वारा भेंट की गई चादर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चादर लेकर केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी अजमेर पहुंचे.

अजमेर: विश्व प्रसिद्ध ख्वाजा गरीब नवाज की बारगाह में 808वें सालाना उर्स के मौके पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से मखमली चादर और अकीदत के फूल पेश किए गए. देश में शांति वह अमन चैन की दुआ मांगी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चादर लेकर केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी अजमेर पहुंचे. इस दौरान उनके साथ अजमेर सांसद भागीरथ चौधरी, दरगाह कमेटी सदर अमीन पठान के साथ कई पदाधिकारी मौजूद रहे. मंत्री अब्बास नकवी ने पीएम की पीले रंग की खूबसूरत चादर मजार ए शरीफ पर पेश की और देश में अमन चैन समृद्धि और शांति की दुआ मांगी. 

इस मौके पर उन्होंने देश के नाम पैगाम भेजा, जिसमें कहा गया कि भारत समृद्ध आध्यात्मिक परंपराओं का देश है और हमारे देश के सूफी संतों ने अपने आदर्शों और विचारों के माध्यम से राष्ट्र के सांस्कृतिक ताने-बाने को सदैव मजबूत करने का प्रयास किया है. शांति और एकता का उनका पैगाम हमें जीवन में अनुशासित शालीन और संयमित रखने की सीख देता है. सद्भाव और सुहाग के आदर्श प्रतीक के रूप में ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह दुनिया भर में विविध आस्थाओं और मान्यताओं के लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है. अनेकता में एकता हमारे देश की खूबसूरती है और इस सालाना उर्स इसी भावना को संजोने सहेजने और महफूज रखने का अवसर है. उन्होंने ख्वाजा गरीब नवाज के 808 में उस पर दरगाह शरीफ से देश की समृद्धि की कामना की और अमन-चैन के लिए दुआ की.

इस मौके पर मुख्तार अब्बास नकवी ने शेर पढ़ते हुए कहा कि देश में जो नफरत की दीवार खड़ी हो रही है उसे प्यार से मिटाने की जरूरत है और जो पेड़ देश में सुख हैं उन्हें फलदार करने की आवश्यकता है. इसी मकसद के साथ देश की सरकार काम कर रही है और आम लोगों से अपील है कि वह शांति बनाए रखें और नफरत की दीवार बड़ी न होने दें, जिससे कि किसी को नुकसान हो. इसके लिए सभी को एक दूसरे के प्रति सौहार्द और मोहब्बत का भाव रखना होगा. यही देश की सांस्कृतिक परंपरा रही है.