चिकित्सा क्षेत्र में गहलोत सरकार की बड़ी क्रांति, राजस्थान में अब नहीं रहेगी डॉक्टर्स की कमी

इस उपलब्धि के बाद अब 30 जिले ऐसे हो गए हैं, जहां सरकारी मेडिकल कॉलेज (Medical College) होंगे. शेष बचे तीन जिलों के लिए भी सरकारी स्तर पर जोर-शोर से प्रयास जारी हैं. स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने अपने महकमे के साथ मिलकर इस सोंच को साकार कर दिया है.

चिकित्सा क्षेत्र में गहलोत सरकार की बड़ी क्रांति, राजस्थान में अब नहीं रहेगी डॉक्टर्स की कमी
जालोर, प्रतापगढ़, राजसमंद में मेडिकल कॉलेज शेष बचे हैं.

जयपुर: सूबे के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) की हर जिले में मेडिकल कॉलेज (Medical College) खोलने की घोषणा कांग्रेस के एक साल के कार्यकाल में ही पूरी होती दिखाई दे रही है. सरकार के 11 माह के कार्यकाल में 15 नए मेडिकल कॉलेज को केंद्र सरकार ने स्वीकृति दे दी है. 

इस उपलब्धि के बाद अब 30 जिले ऐसे हो गए हैं, जहां सरकारी मेडिकल कॉलेज (Medical College) होंगे. शेष बचे तीन जिलों के लिए भी सरकारी स्तर पर जोर-शोर से प्रयास जारी हैं. स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने अपने महकमे के साथ मिलकर इस सोंच को साकार कर दिया है.

राजस्थान समेत देशभर में चिकित्सकों की कमी किसी से छिपी नहीं है. इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण था सीमित मेडिकल कॉलेज (Medical College). हालात ये थे कि आजादी के बाद से 50 सालों तक महज छह मेडिकल कॉलेज राजस्थान में विकसित हो पाए लेकिन सूबे के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने अपने हर कार्यकाल की तरह इस बार भी मेडिकल क्षेत्र पर विशेष फोकस रखा है. चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा के निर्देश में टीम मेडिकल एजूकेशन ने सेंट्रल स्पॉन्सर्ड स्कीम का पुरजोर फायदा उठाया और 11 माह के अल्प कार्यकाल में ही 15 मेडिकल कॉलेज (Medical College) को केंद्र से हरी झंडी दिलवाई. चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा इसे चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि मानते हैं. उनका दावा है कि शेष जिलों को भी जल्द ही मेडिकल कॉलेज (Medical College) की सौगात मिलेगी.

प्रदेश में हनुमानगढ़, दौसा, टोंक, सवाई माधोपुर तथा झुंझुनूं जिले में कुल 5 नये मेडिकल कॉलेजों (Medical College) के निर्माण के लिए केंद्र सरकार से सेंट्रल स्पॉन्सर्ड स्कीम के तहत स्वीकृति प्राप्त हो गई है. प्रत्येक मेडिकल कॉलेज के लिए कुल 325 करोड रुपए की राशि स्वीकृत की गई है. चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने बताया कि इन 5 मेडिकल कॉलेज की स्वीकृति के बाद प्रदेश में राजकीय क्षेत्र में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 31 हो जाएगी. प्रदेश में आजादी के समय मात्र एक मेडिकल कॉलेज (Medical College) जयपुर में था. उन्होंने बताया कि वर्तमान सरकार के मात्र 11 माह के कार्यकाल में 15 नए मेडिकल कॉलेज (Medical College) खोलने की स्वीकृति बड़ी उपलब्धि है. डॉ. शर्मा ने बताया कि अब प्रदेश के 33 जिलों में से 30 जिलों में राजकीय क्षेत्र के मेडिकल कॉलेज स्वीकृत हो चुके हैं. जालोर जिले में मेडिकल कॉलेज स्वीकृति प्रक्रियाधीन है. राजसमंद में निजी क्षेत्र में मेडिकल कॉलेज हैं. प्रतापगढ़ तथा राजसमंद में राजकीय क्षेत्र में भी मेडिकल कॉलेज (Medical College) खोलने हेतु प्रस्ताव भिजवाए गए हैं. इन मेडिकल कॉलेजों के खुलने से प्रदेश में चिकित्सकों की कमी पूरी होने के साथ ही दूर-दराज के क्षेत्रों तक सामान्य चिकित्सा सुविधाओं के साथ ही विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं भी सुलभ होंगी. 

चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा की मानें तो जालोर, प्रतापगढ़, राजसमंद में मेडिकल कॉलेज (Medical College) शेष बचे हैं, जिसके प्रस्ताव भी केंद्र को भेजे गए हैं. ऐसे में उम्मीद ये है राजस्थान में जिस गति से नए मेडिकल कॉलेज खोलने की दिशा में काम हो रहा है, उससे लगता है कि तीनों जिलों के प्रस्तावों को भी जल्द मंजूरी मिलेगी. ऐसा हुआ तो देशभर में राजस्थान के खाते में ये उपलब्धि भी दर्ज होगी कि यहां प्रत्येक जिले में सरकारी मेडिकल कॉलेज (Medical College) हैं.

प्रदेश के 7 मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की 350 अतिरिक्त सीटें स्वीकृत
प्रदेश की 7 मेडिकल कॉलेज (Medical College) पाली, डूंगरपुर, भरतपुर, चूरू, झालावाड़, भीलवाड़ा एवं आरयूएचएस जयपुर में एमबीबीएस की 50-50 अतिरिक्त सीटें स्वीकृत की गई हैं. इन कुल 350 सीटों की वृद्धि के लिए कुल 420 करोड़ रुपये की राशि व्यय होगी. चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने बताया कि वर्तमान राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा के आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि 11 माह के कार्यकाल में 15 नए मेडिकल कॉलेज (Medical College) स्वीकृत होने के साथ ही पीजी की 960 सीटों की वृद्धि की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है. डॉ. शर्मा ने बताया कि उक्त 7 मेडिकल कॉलेज (Medical College) में एमबीबीएस की प्रत्येक सीट के लिए 1 करोड़ 20 लाख रूपये की दर से कुल 420 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृति प्राप्त हुई है. उन्होंने बताया कि नए बनने वाले प्रत्येक मेडिकल कॉलेज (Medical College) की स्थापना पर 325 करोड़ रुपये की राशि व्यय की जाएगी.