Rajasthan के शराब दुकानदारों को बड़ा झटका, लॉटरी नहीं, अब ऐसे होगा दुकानों का आवंटन

ऑनलाइन नीलामी (Online Auction) से दुकानों का आवंटन होगा. ऐसे में आम आदमी अब इसमें भाग्य नहीं आजमा सकेगा.

Rajasthan के शराब दुकानदारों को बड़ा झटका, लॉटरी नहीं, अब ऐसे होगा दुकानों का आवंटन
प्रतीकात्मक तस्वीर.

Jaipur: मधुशाला से कमाई का मोह पाले बैठे लाखों लोगों के अरमानों पर नई आबकारी नीति (New excise policy) ने पानी फेर दिया है. मदिरा दुकान आवंटन (Wine shop allocation) अब नसीबों का खेल नहीं रह गया है. 

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इस बार ऑनलाइन नीलामी (Online Auction) से दुकानों का आवंटन होगा. ऐसे में आम आदमी अब इसमें भाग्य नहीं आजमा सकेगा. अब तक कुछ लोग कम पूंजी लगाकर लॉटरी के माध्यम से अधिक मुनाफा कमाने में कामयाब हो रहे थे, लेकिन नई नीति ने उनके सपनों पर वज्रपात कर दिया है.

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ऑनलाइन नीलामी प्रक्रिया हुई शुरू
प्रदेश में शराब की 7665 दुकानों की नीलामी के लिए ऑनलाइन प्रकिया शुरू हो गई हैं. इस बार 13 हजार करोड़ रुपये राजस्व का लक्ष्य है. ज़ी मीडिया ने रिजर्व प्राइस (हर ठेके की एक तय कीमत, जिससे आगे ही बोली लगेगी) को खंगाला तो, कई चौकाने वाली जानकारियां सामने आईं. गुजरात (Gujarat) में शराबबंदी से राजस्थान (Rajasthan) के आबकारी विभाग का खजाना ज्यादा छलकेगा. प्रदेश के 6 सबसे महंगे शराब ठेके उदयपुर संभाग में ही हैं. इनमें तीन डूंगरपुर, दो बांसवाड़ा और एक उदयपुर में हैं. हालांकि सबसे ज्यादा राजस्व दिलाने में जयपुर शहर के ठेके टॉप पर हैं, जबकि दूसरा नंबर उदयपुर का आता है. 

रिजर्व प्राइस के अनुसार कंपोजिट राशि तय की गई 
प्रदेश का सबसे महंगा ठेका डूंगरपुर के खजूरी का है. इसकी रिजर्व प्राइस 18.99 करोड़ हैं. उदयपुर में 394 दुकानों से 577 करोड़ 87 लाख 55 हजार 634 रुपये का राजस्व प्राप्ति का लक्ष्य रखा गया है. उदयपुर संभाग (Udaipur Division) में सबसे महंगे ठेके गुजरात में शराबबंदी के कारण हैं. वहां से आने वाले पर्यटकों की वजह से इन दुकानों पर शराब का ज्यादा उठाव होता हैं. इसी कारण इनकी रिजर्व प्राइस ज्यादा है. आबकारी विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिस दुकान की जितनी मिनिमम रिजर्व प्राइस है, उसी से नीलामी की बोली लगना शुरू होगी. प्रत्येक दुकान की रिजर्व प्राइस के अनुसार कंपोजिट राशि तय की गई है, जिसे दुकान मिलने के बाद विभाग को जमा करानी होगी. जितनी रिजर्व प्राइस विभाग से तय की गई है, दुकानदार को सालभर में उतनी राशि का उठाव करना ही होगा.

इन दुकानों की सबसे ज्यादा रिजर्व प्राइस
सबसे महंगी दुकान डूंगरपुर के खजूरी की 18.99 करोड़
10.15 करोड़ डूंगरपुर के बिच्छीवाडा ठेके की कीमत
उदयपुर की डैया, अंबासा और कवेल की दुकानों की 8.46 करोड़ प्राइस
11.85 करोड़ डूंगरपुर के पूनावाड़ा ठेके की प्राइस
12.60 करोड़ बांसवाड़ा जिले के कुशलगढ़ मोनाडूंगर की कीमत
11.14 करोड़ बांसवाड़ा के कुशलगढ़ के गांगरतलाई का ठेका
6.77 करोड़ खेरवाड़ा में पाटिया ठेके की रिजर्व प्राइस
6.63 करोड़ कोटडा के गांधी सारण ठेके की रिजर्व प्राइस
6.48 करोड़ जयपुर के मुहाना का ठेके की रिजर्व प्राइस

राजधानी में दुकानों की बेस प्राइस 926 करोड़
राजधानी जयपुर की बात करें तो यहां 404 देशी-अंग्रेजी शराब दुकानों की दुकानों की बेस प्राइस 926 करोड़ रुपये है. राजधानी का सबसे महंगा ठेका मुहाना का है, इस बार देशी अंग्रेजी दुकान को मर्ज करने के बाद इस शराब की ठेके की न्यूनतम बोली यानि रिजर्व प्राइस 6.48 करोड़ से शुरू होगी. मुहाना के अलावा शहर में पांच दुकानें ऐसी हैं, जिनकी रिजर्व प्राइस 4.55 से 5.78 करोड़ रुपये तक है. जिला आबकारी अधिकारी सुनील भाटी (Sunil Bhati) ने बताया कि शराब दुकानों की नीलामी में भाग लेने के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू हो गई है. 22 फरवरी तक रजिस्ट्रेशन होगा और 23 से 27 फरवरी तक रोजाना सुबह 11 से 4 बजे तक नीलामी होगी. दुकानों की न्यूनतम रिजर्व प्राइस से ही बोली शुरू होगी और बोलीदाता कम से कम 5 हजार रुपये बढ़ाकर बोली लगानी होगी.

बहरहाल एक अनुमान के मुताबिक, राज्य सरकार को राजस्व के रूप में सबसे ज्यादा कमाई आबकारी विभाग से होती है. अब तक लोग लॉटरी के माध्यम से भाग्य आजमाकर इस कारोबार से धन कमाने की चाह में फॉर्म भरते थे. लॉटरी उनके नसीब खोलने वाली होती थी. वजह जिस व्यक्ति के नाम लॉटरी निकलती थी, वह यदि दुकान चलाने में खुद सक्षम और माहिर नहीं हो तो वह अन्य किसी व्यक्ति को अपने अनुज्ञा पत्र पर दुकान चलाने को दे देता था. इससे उसे मोटी कमाई होती थी, लेकिन अब नसीबों के इस खेल पर नई नीति ने ताला लगा दिया है.

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