राजस्थान: अपराधियों की खैर नहीं, जेलों में जंग खाए हथियारों की जगह लेंगे नए हथियार

जेल महानिदेशालय ने पिछले साल इन कंडम हथियारों के बदले आधुनिक और आटोमैटिक हथियार मांग की थी.

राजस्थान: अपराधियों की खैर नहीं, जेलों में जंग खाए हथियारों की जगह लेंगे नए हथियार
प्रतीकात्मक तस्वीर.

विष्णु शर्मा, जयपुर: राज्य की जेलों में जंग खाए हथियारों की जगह अब नए हथियार लेंगे. राज्य की जेलों में अभी सुरक्षा के लिए मस्कट 410'' बोर शस्त्र के साथ ही 455'' और 38'' की पिस्टल रिवाल्वर हैं, जो प्रचलन से बाहर हो चुके हैं. 

अब इनकी जगह एसएलआर और 9 एमएम पिस्टल खरीदे जा रहे हैं. राज्य के वित्त विभाग ने जेलों में नए हथियार खरीदने की मंजूरी के साथ ही बजट भी स्वीकृत कर दिया है. 

यह भी पढ़ें- राजस्थान पुलिस के 6 अधिकारियों को गृहमंत्री पदक, बेहतर काम के लिए मिलेगा यह सम्मान

राजस्थान में वर्तमान में 14 सेंट्रल जेल, 24 जिला जेल, 60 सब जेल तथा 29 खुली जेल हैं. इन जेलों में 20 हजार से ज्यादा कैदी बंद हैं. जेलों में प्रहरियों के पास मस्कट 410'' बोर शस्त्र के साथ ही 455'' और 38'' की पिस्टल रिवाल्वर मौजूद हैं. इनमें मस्कट 410'' बोर से एक बार में केवल एक गोली चलती है. हर बार बोल्ट के सहारे नया कारतूस डालना पड़ता है. ऐसे में एक गोली चलने के बाद दूसरी गोली चलाने में काफी समय लग जाता है. इसके अलावा हालत यह है कि इनके पार्ट्स व कारतूस भी नहीं मिल पाते हैं. ऐसे में जेलों में पड़े हथियार एक तरह से बेकार हैं. 

खास बिंदु 
- जेल महानिदेशालय ने पिछले साल इन कंडम हथियारों के बदले आधुनिक और आटोमैटिक हथियार मांग की थी.
- जेल महकमे ने 3 जनवरी 2020 को एसीएस गृह को प्रस्ताव देकर  हथियारों के लिए गृहमंत्रालय से 1.62 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान कराने की मांग की.  
- 2020-21 की बीएफसी में 1.62 करोड़ रुपये की सहमति भी हो गई.
-वित्त विभाग ने 12 जून को उपलब्ध प्रावधान से हथियार खरीदने की स्वीकृति दी.

- वित्त विभाग ने 20 लाख 82 हजार रुपये आधुनिक हथियारों पर खर्च करने का परामर्श दिया.
- जेल विभाग ने 1100 नग एसएलआर ओल्ड 7.62 एमएम तथा 150 नग 9 एमएम पिस्टल मांगी.
- हालांकि स्वीकृत बजट से एसएलआर ओल्ड 7.62 के 550 नग तथा 9 एमएम पिस्टल के 43 नग ही आ सकेंगे.
- सेंट्रल जेलों की बाहरी सुरक्षा आरएसी के जिम्मे हैं, लेकिन जिला और सब जेलों की सुरक्षा में एसएलआर और पिस्टल से राहत मिलेगी.