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दिल्ली-जयपुर हाईवे पर बस स्टैंड नदारद, यात्री हो रहे दुर्घटना का शिकार

यह देश का सबसे व्यस्तम हाइवे है. हाइवे नम्बर 8 जो दिल्ली से शुरू होकर मुंबई तक पहुंचता है. इस हाइवे पर बहुत से बड़े शहर व कस्बे आते है. जिससे रोजना हजारों छोटे बड़े वाहन व यात्री गुजरते है

दिल्ली-जयपुर हाईवे पर बस स्टैंड नदारद, यात्री हो रहे दुर्घटना का शिकार
इस हाईवे पर एक भी जगह बस स्टैंड की व्यस्था नहीं है.

अमित यादव/कोटपूतली: दो राजधानियों को जोड़ने वाला हाइवे नम्बर आठ अपने आप में एक अलग पहचान रखता है, क्योंकि यही वह हाइवे है जो दो राजधानियों को जोड़ता है. एक देश की राजधानी व एक प्रदेश की राजधानी को जोड़ता है. देश व प्रदेश की सियासी बिसात इन दोनों राजधानियों से शुरू होती है. अगर बात करे रेल मार्ग की तो रेल मार्ग से कोई भी यात्री यात्रा करता है तो यात्री को हर जगह रेलवे स्टेशन व रेलवे जंक्शन मिल जाते है. यहां पर यात्रियों के लिये तमाम तरह की सुविधा भी उपलब्ध होती है. जैसे छाया, टॉयलेट, खाने पीने बैठने तक कि सम्पूर्ण व्यवस्था होती है. यहां तक कि महिलाओं व सीनियर सिटीजन के लिये अलग से टिकट लेने की व्यस्था होती है. लेकिन बात करें दिल्ली से जयपुर हाइवे पर बस यात्रियों की उनके साथ रोजना किसी न किसी तरह की घटनाएं व समस्या होती रहती है जिससे रोजाना यात्रियों को दो दो हाथ होना पड़ता है.

बता दें कि यह देश का सबसे व्यस्तम हाइवे है. हाइवे नम्बर 8 जो दिल्ली से शुरू होकर मुंबई तक पहुंचता है. इस हाइवे पर बहुत से बड़े शहर व कस्बे आते है. जिससे रोजना हजारों छोटे बड़े वाहन व यात्री गुजरते है और अपनी यात्रा पूरी करते है, लेकिन अभी बात करे दिल्ली से जयपुर हाइवे की इस हाइवे पर दिल्ली से सट्टे गुडगांवा से और जयपुर के बीच एक भी बस स्टैंड नहीं है. जिससे बसे अपने गणतव्य समय से बस स्टैंड पर पहुच कर यात्रियों को बैठा कर उनके यथा स्थान पहुंच सके. 

इस हाइवे से रोजना हजारों यात्री यात्रा करते है. जो इसी हाइवे पर घण्टो खड़े होकर बसों का इंतजार करते है जिनके लिए किसी भी प्रकार की सुगम व्यवस्था नहीं है. किसी भी यात्री के लिये भीषण गर्मी में छाया, पानी, बैठने, व टॉयलेट तक कि कोई व्यस्था नहीं है. खास कर महिला, बुजर्ग व छोटे बच्चो के लिये किसी भी प्रकार की सुविधा नहीं है. सभी को रोजना भारी समस्या का सामना करना पड़ता है. इस मार्ग पर गुड़गांवा के बाद मानेसर, धारूहेड़ा, शांहजापुर, नीमराना, बहरोड, कोटपूतली, पावटा, शाहपुरा, मनोहरपुर और आखिर में जयपुर के पास चंदवाजी है. इस हाइवे पर ये बड़े शहर व कस्बे पड़ते है, लेकिन एक भी जगह बस स्टैंड की व्यस्था नहीं है. 

जी मीडिया ने जब यात्रियों से जाना रोजाना का हाल तो यात्रियों ने अपना दर्द बताया इस हाइवे पर किस प्रकार यात्रा करते है. सभी ने आप बीती बताई और कहा हमेशा इस हाइवे पर दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है साथ मे घण्टो बसों का इंतजार करते है. महिलाओं को असुरक्षा महसूस होती है. हाइवे पर खड़े यात्रियों के विज्वल हमने कैमरे में कैद किये तो सामने आया भीषण गर्मी महिला बच्चे यात्री अपने आप को हाइवे पर लगी धड़ियो व टपरकी के नीचे जाकर धूप से बचते नजर आए. जबकि एक बुजर्ग दम्पति बस में चढ़ने को लेकर हतास दिखे.

वहीं जब हमने राजस्थान व हरियाणा रोडवेज के चालक व परिचालक से जाना बस स्टेण्डों के बारे में तो चालक ने साफ तौर से कहा इस हाइवे पर किसी भी प्रकार का कोई भी बस स्टैंड नहीं है. यात्रियों के साथ साथ हमे भी बहुत बड़ी समस्या रहती है. आए दिन दुर्घटना होती है और हमेशा सम्भवना भी बनी रहती है क्योंकि बस को हमेशा हाइवे के किनारे ही खड़ा करना पड़ता है और इस हाइवे पर भारी ट्रैफिक चलता है. साथ मे परिचालको ने भी कहा अगर इस हाइवे पर बस स्टेंड होतो बहुत सी समस्या से निजात मिल सकती है. दिल्ली जयपुर हाइवे पर राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, जम्मू कश्मीर, उत्तर प्रदेश व गुजरात इत्यादि रोडवेज बसो का रोजना संचालन होता है, लेकिन बिना बस स्टैंड के एक भी बस अपने गणतव्य स्थान पर नहीं रुक पाती है, खास कर रात्रि के समय तो यात्रियों को और भी समस्या का सामान करना पड़ता है, अधिकतर बसे शहरों के बीच हाइवे पर बने पुलों से आगे गुजर जाती है और यात्रियों को सही स्टैंड व स्थान पर नहीं उतार पाती. 

हालांकि कोटपूतली में करीब 50 सालों से बस स्टैंड था और अभी भी राजस्थान रोडवेज का वर्कशॉप डिपो है. जिससे रोजना करीब 110 बसों का संचालन होता है, लेकिन यात्री बस स्टैंड को पिछले 5 से 6 सालो से बंद कर दिया गया है. जिससे यहां बसे रुकना बन्द हो गई है. इसकी जानकारी राजस्थान रोडवेज के प्रबंधक से ली गई तो प्रबंधक पवन सैनी ने बताया बिल्कुल यह समस्या बहुत बड़ी है. इसके लिए हमारे स्थर पर कई बार ऊपर विभाग को अवगत करवा दिया गया है और साथ मे यहां के जनप्रतिनिधियों व प्रसाशन को भी कहा गया लेकिन किसी का भी सहयोग नही मिल पा रहा है. पुराने बस स्टैंड को दुबारा निर्माण करके तैयार करने की बात की गई थी जो तैयार तो कर लिया गया है लेकिन अभी पूर्ण सुविधा नहीं हो पाई. अभी बस स्टैंड को नगरपालिका के अंडर में दिया हुआ है. जिसके बारे में अभी तक कोई भी आदेश जारी नहीं हुए है और अभी स्पष्ठ भी यह नहीं हुआ है बस स्टैंड कब चालू किया जायेगा.

कोटपूतली मुख्य प्रबन्धक पवन सैनी ने ये भी बताया इस हाइवे पर बस स्टैंड नही होने पर यात्रियों को समस्या का सामना नहीं करना पड़ रहा बल्कि यात्री रोजना ठगी का शिकार भी हो रही है. साथ में राजस्थान रोडवेज को राजस्व का घाटा भी हो रहा है. अगर इस हाइवे पर बस स्टेण्डों की सुविधा पूर्ण हो तो किसी भी प्रकार की फर्जी बसों से यात्रा करने से भी यात्री बच सकते है. जिनके साथ आये दिन हो रही धोखाधड़ी से भी बचाया जा सकता है. वही बस स्टैंड हो तो यात्री रोडवेज की टिकट विंडो से लेकर सुनिश्ति स्टैंड से यात्रा आसानी से कर सकते है.