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जयपुर: क्रिसमस को लगी ग्लोबल मंदी की नजर, निर्यातकों को नहीं हंसा पाया कारोबार का सांता

महंगे और प्रीमियम कैटेगरी के उत्पादों की मांग में भारी गिरावट देखी गई है.  

जयपुर: क्रिसमस को लगी ग्लोबल मंदी की नजर, निर्यातकों को नहीं हंसा पाया कारोबार का सांता
प्रतीकात्मक फोटो.

जयपुर: राजस्थान के निर्यातक कारोबारियों के लिए यह क्रिसमस (Christmas) अधिक मुनाफे वाला नहीं है. यहां से करीब 75 देशों में क्रिसमस (Christmas) गिफ्ट के तौर पर हैंडीक्राप्ट, ज्वैलरी और गारमेंट (Garment) उत्पादों का निर्यात होता है. इस बार निर्यातक कारोबारियों को ग्लोबल मंदी की चपेट लगी है. महंगे और प्रीमियम कैटेगरी के उत्पादों की मांग में भारी गिरावट देखी गई है.

सेंटा क्लॉज प्रदेश के निर्यातकों की झोली में कारोबार नहीं डाल पाया. प्रदेश के कारोबारियों के अनुसार, जयपुर, जोधपुर, भीलवाड़ा सहित प्रदेश के विभिन्न औद्योगिक जिलों से क्रिसमस गिफ्ट के तौर पर हैंडीक्राप्ट, ज्वैलरी और गारमेंट उत्पादों का निर्यात प्रमुखता से होता है. 

अप्रैल से ही मिलने लगते हैं ऑर्डर
कारोबारियों को अप्रैल माह से ही निर्माण ऑर्डर मिलने शुरू हो जाते हैं. अक्टूबर और नवंबर तक इन ऑर्डर्स की आपूर्ति कर दी जाती है. क्रिसमस (Christmas) पर विदेशी बाजार से मांग इतनी होती है कि फैक्ट्रियों को दूसरी शिफ्ट में काम करना पड़ता है. कर्मचारियों का ओवरटाइम तो आम बात है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हैं. 

ग्लोबल मंदी (Global recession) का सामना प्रदेश के निर्यातक भी कर रहे हैं. निर्यातक ज्वैलर राजीव जैन का कहना है कि इस बार वैश्विक मंदी का असर बाजार पर है. मांग घटी है, लेकिन बाजार में काम है.

सीमित है इस बार मुनाफा
निर्यात बाजार में क्रिसमस सीजन की भागीदारी 35 फीसदी के करीब है. निर्यातकों को तीनों प्रमुख सेक्टर में अभी तक 4500 करोड़ रुपये के ही ऑर्डर मिले हैं. ज्वैलरी सेक्टर में भी हैवी ज्वैलरी की बजाय लाइटवेट ज्वैलरी की डिमांड है. इसके अलावा इस बार ऑर्टिफिशियल, स्टोन ज्वैलरी के ऑर्डर अधिक मिले हैं. इनकी कीमत बेहद कम है. ऐसे में मुनाफा भी सीमित है.

यही हाल हैंडीक्राप्ट और फर्नीचर सेगमेंट पर है. गारमेंट क्षेत्र पर भी कम बिक्री होने का असर देखा जा रहा है हालांकि निर्यातक यह भी कहते हैं कि चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में ऑर्डर की स्पीड बढ़ी है.