राजस्थान: तहसीलदारों ने बढ़ाई किसानों की मुश्किलें, अब तक जारी नहीं किए रहनमुक्त प्रमाण

रजिस्ट्रार नीरज के पवन ने आदेश दिए हैं कि किसानों के रहन मुक्ति प्रमाण पत्र तहसील स्तर पर लंबित हैं. उन्हें शीघ्र जारी करवा कर रहन मुक्ति का प्रमाण पत्र पात्र किसान को दिया जाए. 

राजस्थान: तहसीलदारों ने बढ़ाई किसानों की मुश्किलें, अब तक जारी नहीं किए रहनमुक्त प्रमाण
जिन किसानों का आधार प्रमाणन हो गया है, उन्हें ऋण माफी प्रमाण पत्र वितरित करे.

जयपुर: एक तरफ राज्य सरकार किसानों की दिशा और दिशा बदलने के लिए कोशिशों में जुटी हुई है लेकिन दूसरी और सरकार और सहकारिता रजिस्ट्रार की मेहनत पर तहसीलदार पानी फेर रहे. 

तहसीलदारों ने किसानों के मत्यु प्रमाण पत्र, रहन मुक्ति प्रमाण पत्र और ऋणमाफी प्रमाण पत्र अब तक जारी ही नहीं किए जबकि सरकार ने महीनों पहले ही किसानों की जमीनों को रहनमुक्त कर दिया. इसके अलावा ऋणमाफी प्रमाण पत्र अपलोड करने के आदेशों को भी महीने बीत गए लेकिन तहसीलदारों द्वारा प्रमाण पत्र अपलोड नहीं करना बडी चूक मानी जा रही है. इसके बाद रजिस्ट्रार नीरज के पवन ने कडे आदेश जारी किए हैं. रजिस्ट्रार ने 10 फरवरी तक किसानों को लंबित प्रमाण देने के निर्देश दिए हैं.

संबंधित अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी
रजिस्ट्रार नीरज के पवन ने आदेश दिए हैं कि किसानों के रहन मुक्ति प्रमाण पत्र तहसील स्तर पर लंबित हैं. उन्हें शीघ्र जारी करवा कर रहन मुक्ति का प्रमाण पत्र पात्र किसान को दिया जाए. जिन किसानों की मृत्यु हो चुकी है, ऐसे किसानों का मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त कर पोर्टल पर डेटा अपलोड कर मृत किसान के वारिस को भूमि रहन मुक्ति का प्रमाण पत्र प्रदान करे. ऋण माफी के पात्र किसानों से संबंधित डेटा को 10 फरवरी तक अपलोड करे अन्यथा संबंधित अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

इसके अलावा जिन किसानों का आधार प्रमाणन हो गया है, उन्हें ऋण माफी प्रमाण पत्र वितरित करे. दूरदराज के किसानों के घर पर जाकर आधार प्रमाणन की प्रक्रिया की जाए. यह कार्य एक सप्ताह में पूरा करने के निर्देश दिए हैं. प्रदेश में 222 करोड़ रुपये का ऋण माफ कर पात्र किसानों की 1.21 लाख बीघा भूमि रहन मुक्त की जा चुकी है. पात्र किसानों को समय पर लाभ मिलना चाहिए.

ऐसे में अब किसानों की मुश्किलें बढ़ाने वाले तहसीलदार अब खुद मुश्किल में पड जाएंगे. यदि तय समय पर ऋणमाफी और रहनमुक्त प्रमाण पत्र जारी नहीं किया तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी. इसलिए तहसील स्तर के अधिकारी अब अपनी कमर कस लें.