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डूंगरपुर: मानव तस्करी से बचाए गए बच्चों ने खोली शिक्षा के दावों की पोल, रो-रोकर बताई कहानी

चाइल्ड लाइन और मानव तस्करी निरोधक सेल द्वारा हाल ही में मुक्त करवाए गए बाल श्रमिकों ने जिले में बालश्रम उन्मूलन और बच्चों को शिक्षा से जोड़ने वाले सभी अभियानों की पोल खोलकर रख दी है. 

डूंगरपुर: मानव तस्करी से बचाए गए बच्चों ने खोली शिक्षा के दावों की पोल, रो-रोकर बताई कहानी
जिले में कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां बच्चे कभी भी स्कूल से नहीं जुड़े हैं.

अखिलेश शर्माडूंगरपुर: प्रदेश के आदिवासी बहुल डूंगरपुर जिले से बालश्रम (Child Labour) को रोकने और ऐसे बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के प्रयास केवल कागजों में ही नजर आते हैं. धरातल की बात करें तो आज भी जिले में कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां बच्चे कभी भी स्कूल से नहीं जुड़े हैं. 

जो कभी जुड़े हुए थे, वे आज बालश्रम (Child Labour) में अपना बचपन खो रहे हैं. बताते हैं डूंगरपुर से आई एक ऐसी ही रिपोर्ट, जो बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के दावों की पोल खोल रही है.

डूंगरपुर में शिक्षा विभाग नामांकन अभियान और नया अभियान के माध्यम से ड्रॉप आउट बच्चों को स्कूल से जोड़ने के दावे करता हो लेकिन चाइल्ड लाइन और मानव तस्करी (Human Trafficking) निरोधक सेल द्वारा हाल ही में मुक्त करवाए गए बाल श्रमिकों ने जिले में बालश्रम उन्मूलन और बच्चों को शिक्षा से जोड़ने वाले सभी अभियानों की पोल खोलकर रख दी है. 

बच्चों को छोड़नी पड़ी पढ़ाई
मुक्त करवाए गए 8 बाल श्रमिकों में से 4 ऐसे बाल श्रमिक हैं, जिन्होंने एक से दो माह पहले ही स्कूल से नाता तोड़कर मज़बूरी में बालश्रम का रास्ता अपनाया है. वहीं शेष चार बाल श्रमिक पिछले 2 से 3 साल पहले ही स्कूल छोड़ चुके हैं. यह खुलासा इन्हीं बाल श्रमिकों ने चाइल्ड लाइन सदस्यों को पूछताछ में किया.

की गई बच्चों की काउंसलिंग 
चाइल्ड लाइन और मानव तस्करी  (Human Trafficking) निरोधक सेल द्वारा बाल श्रमिकों को जिला बाल कल्याण समिति के समक्ष जब पेश किया गया तो समिति ने बच्चों की काउंसलिंग की. इसमें इन बाल श्रमिकों ने चौंकाने वाली बात कही कि परिवार की अलग-अलग परिस्थितियों के चलते इनका स्कूल छूट गया है. 

हैरानी की बात यह है कि नामांकन अभियान की सफलता का गुणगान कर रहे शिक्षा विभाग का एक भी नुमाइंदा इन्हें स्कूल से जोड़ने के लिए कभी नहीं आया. वहीं जिन बच्चों का स्कूल में नामांकन है लेकिन लंबे समय से आ नहीं रहे हैं. उनका कारण जानने भी विभाग ने कोई जहमत नहीं उठाई. इधर जिला बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष ने अब इन बाल श्रमिकों के परिजनों से काउंसलिंग कर इन्हें पुनः शिक्षा से जोड़ने की बात कही है.

शिक्षा विभाग नहीं दे रहा ध्यान
अब आप समझ ही गए होंगे कि जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग (Education Department) द्वारा बाल श्रम उन्मूलन और ड्रॉप आउट बच्चों को स्कूल से जोड़ने के लिए किए जा रहे प्रयास कितने सार्थक हैं? फिलहाल आवश्यकता है कि सरकार की मंशानुरूप जिला का प्रशासनिक महकमा इस पूरे मामले को गंभीरता से ले ताकि देश का भविष्य कहे जाने वाले ये बच्चे मजदूरी में अपना  बचपन न खोकर विद्या के मंदिरों में शिक्षा अर्जित कर सकें.