झालावाड़: कोरोना का ग्रहण, माता अन्नपूर्णा के धाम में इस बार नहीं होगा अग्नि स्नान

प्रशासनिक पाबंदियों के कारण श्रद्धालु भी बहुत ही कम संख्या में पहुंच रहे हैं.

झालावाड़: कोरोना का ग्रहण, माता अन्नपूर्णा के धाम में इस बार नहीं होगा अग्नि स्नान
प्रतीकात्मक तस्वीर.

महेश परिहार, झालावाड़: जिले के मिश्रोली कस्बे में ऊंची पहाड़ी पर विराजमान मां अन्नपूर्णा की शक्तिपीठ भक्तों की आस्था का बढ़ा केंद्र है. नवरात्र में प्रतिवर्ष यहां मेला लगता है, जहां नवमी के दिन माता के साधक दहकते अंगारों से गुजरते हैं. 

आस्था और विश्वास के इस मंजर को देखने न केवल झालावाड़ जिले बल्कि सीमावर्ती मालवा मध्य प्रदेश से भी हजारों की तादाद में श्रद्धालु पहुंचते रहे हैं लेकिन कोविड-19 वायरस की आपदा के कारण इस बार श्रद्धालुओं और माता अन्नपूर्णा के बीच एक अनदिखी सी दीवार खड़ी हो गई है. प्रशासनिक पाबंदियों के कारण श्रद्धालु भी बहुत ही कम संख्या में पहुंच रहे. जिस कारण श्रद्धालुओं और मंदिर प्रशासन में भी निराशा देखी जा रही.

यह भी पढ़ें- मां भवानी की पूजा से आज के दिन शनि ग्रह को कर सकते हैं नियंत्रित, जानिए कैसे

झालावाड़ जिले से गुजर रहे डग सुकेत मेगा हाईवे पर स्थित मिश्रौली कस्बे की ऊंची पहाड़ी पर विराजमान हैं माता अन्नपूर्णा, जिनके दर्शनों के लिए श्रद्धालु जयकारों के साथ वर्ष भर ऊंची सीढ़ियां चढ़ते हुए माता के दर्शनों और एक झलक पाने के लिए पहुंचते हैं. नवरात्र के दौरान तो माता अन्नपूर्णा शक्ति पीठ पर विशाल मेला लगता आया है. पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा अनुसार नवरात्र की नवमी के दिन यहां माता के विशेष साधक नंगे पैर कस्बे में हाथों में खड़ग और खप्पर लिए भ्रमण करते हैं और पहुंचते हैं. माता अन्नपूर्णा के धाम, जहां ये साधक एक खाई में धधकते अंगारों से नंगे पैर गुजरते हैं और माता के जयकारों से वातावरण गुंजायमान होता है.

इस बार कोरोना संक्रमण ने इन धार्मिक परंपराओं पर भी ग्रहण सा लगा दिया है. प्रशासनिक पाबंदियों के चलते इस बार बड़े धार्मिक आयोजनों पर रोक लगा दी गई ऐसे में यहां प्रतिवर्ष लगने वाला नवरात्र मेला भी निरस्त कर दिया गया. साथ ही माता के साधकों द्वारा किया जाने वाला अग्नि स्नान भी इस वर्ष नहीं होगा. ऐसे में वर्षों से चली आ रही परंपरा इस बार खंडित होती नजर आ रही.

क्या बताते हैं यहां के पंडित
माता अन्नपूर्णा मंदिर के पुजारी किशोरीलाल माली ने बताया कि मिश्रोली में पहाड़ी पर अन्नपूर्णा और महिषासुर मर्दिनी का मंदिर करीब 900 साल पुराना है. किवदंतियों ओर पौराणिक कथाओं के अनुसार दोनों मां बेटी के रूप में पहाड़ी पर विराजमान है. किवदंती अनुसार, मां अन्नपूर्णा और महिषासुर मर्दिनी एक बार पहाड़ी पर चढ़ने की प्रतियोगिता कर रही थी. उस समय महिषासुर मर्दिनी पहाड़ी पूरी नहीं चढ़ सकी, लेकिन अन्नपूर्णा पहाड़ी के शिखर पर जाकर ही रुकी. इसके चलते करीब साढ़े तीन सौ फीट की ऊंचाई के फासले पर दोनों मंदिर स्थित है. नीचे की ओर महिसासुर मर्दिनी और शिखर पर माता अन्नपूर्णा का मंदिर स्थापित है.

पुजारी किशोरी लाल ने बताया कि पहाड़ी पर स्थित मां अन्नपूर्णा देवी की प्रतिमा रोजाना तीन स्वरूपों में दिखाई देती है. सुबह मां की प्रतिमा बाल्यावस्था में, दोपहर के समय यौवनावस्था ओर शाम के समय प्रौढ़ावस्था में दिखाई देती है. ये स्वरूप किसी श्रृंगार के बिना ही श्रद्धालुओं को बदलाव का आभास करा देते हैं. इस चमत्कार को देखने के लिए दूरदराज से हजारों श्रद्धालु यहां आते है.

इस बार कोरोना के कारण प्रशासन द्वारा धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन पर लगी पाबंदियों से श्रद्धालुओं की संख्या में कुछ कमी तो जरूर है, लेकिन  माता के प्रति आस्था और श्रद्धा उनके भक्तों को अभी भी नहीं डिगा पा रही और बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर पर मन्नत मांगने पहुंच रहे.