अब राशनकार्डों में ऐसी बड़ी धांधली कि आपको पता भी नहीं चलेगा, और होगा भारी नुकसान

राजस्थान में राशन का गेहूं डकारने का अब नया खेल शुरू हो गया है. उपभोक्ता को पता ही नहीं चलता और उसके राशनकार्ड में नए यूनिट (सदस्य) जुड जाते हैं.

अब राशनकार्डों में ऐसी बड़ी धांधली कि आपको पता भी नहीं चलेगा, और होगा भारी नुकसान
प्रतीकात्मक तस्वीर

जयपुर: राजस्थान में राशन का गेहूं डकारने का अब नया खेल शुरू हो गया है. उपभोक्ता को पता ही नहीं चलता और उसके राशनकार्ड में नए यूनिट (सदस्य) जुड जाते हैं. गेहूं तो उसको उतना ही मिलेगा, जितने नाम राशनकार्ड में अंकित है. राशन कार्ड के अलावा ऑनलाइन जुड़े अधिक यूनिट के गेहूं को खुर्द बुर्द करने का खेल चल रहा है. पिछले दिनों खाद्य विभाग के अधिकारियों को यह खेल पकड़ में आया तो वे भी चकित रह गए. अब विभाग ने चार लाख राशनकार्डों को अपने राडार पर ले लिया है. इन राशनकार्डों में ऑनलाइन तरीके से 3 से अधिक यूनिट जोड़ी गई है. अब विभाग इन सभी राशनकार्डों की जांच करेगा. जांच शुरू होते ही कई अधिकारियों की नींद उड़ गई है.

अब तक गेहूं के कालाबाजारी करने और उपभोक्ताओं का गेहूं डकारने की खबरे सुनी और देखी होगी. लेकिन आज हम आपको सरकार को उनके ही मातहतों द्वारा लगाई जा रही चपत लगाने की खबर दिखाने जा रहे है. खबर रोचक इसलिए है कि चपत लगाने का तरीका नया है. मामला ये है की NFSA (राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना) में शामिल राशनकार्ड धारकों को खुद पता ही नहीं उनके घर में कोई बच्चा पैदा हुआ है और उनके राशनकार्ड में ऑनलाइन 2 से 3 बच्चों का नाम फर्जी तरीके से जोड़ दिया गया. यहां तक तो ठीक है लेकिन इसके आगे की हकीकत को भी जानना बहुत जरूरी है कि आखिर ऐसा क्यों किया जा रहा है. 

दरअसल, मामला ऑनलाइन नाम जोड़कर राशन का अधिक गेहूं उठाने का खेल का है. जिन अफसरों को राशन कार्ड में नाम जोड़ने के लिए अधिकृत किया गया है. वही अफसर इस खेल में शामिल होकर सरकार को चपत लगाने में लगे हुए हैं. इसका फायदा सीधा उनकी जेब में जा रहा है. सवाल ये है कि बिना उपभोक्ता की जानकारी में लाये जो अतिरिक्त यूनिट राशनकार्डो में जोड़ रहे हैं उनका गेहूं आखिर जा कहा रहा है. अधिकृत अधिकारी कही राशन डीलर्स से मिलीभगत कर इस गेहूं से खुद का पेट तो नहीं भरने में लगे हुए हैं. हालांकि, जब इस तरह के मामले विभाग के सामने आए तो चार लाख राशनकार्डों को अपने राडार पर ले लिया है. इन राशनकार्डों में ऑनलाइन तरीके से 3 से अधिक यूनिट जोड़ी गई है. अब विभाग इन सभी राशनकार्डों की जांच करेगा. जांच शुरू होते ही कई अधिकारियों की नींद उड़ गई है.

इन जिलों में इतने राशनकार्ड रडार पर
अजमेर में 13561, अलवर में 27757, बांसवाड़ा में 6411, बारां में 6177, बाड़मेर में 18833, भरतपुर में 30471, भीलवाड़ा में 14486, बीकानेर में 7300, बूंदी में 4783, चित्तौड़गढ़ में 5782, चुरू में 17396, दौसा में 10790, धौलपुर में 17044, गंगानगर में 9674, डूंगरपुर में 7013, हनुमानगढ़ में 9837, जयपुर में 19026, जैसलमेर में 5232, जालौर में 11334, झालावाड़ में 12817, झुंझुनूं में 14902, जोधपुर में 14149, करौली में 12589, कोटा में 4051, नागौर में 21179, पाली में 16156, प्रतापगढ़ में 2937, राजसमंद में 10177, सवाईमाधोपुर में 5640, सीकर में 10578, सिरोही में 4745, टोंक में 6515 और उदयपुर में 8331 राशनकार्डों की जांच की जाएगी. राजस्थान में कुल 3,87,873 राशनकार्डों की जांच की जाएगी.  

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खाद्य विभाग ने डिजिटलाइज्ड राशनकार्डों में यूनिट (सदस्य) में संशोधन करने के लिए नगरपालिका क्षेत्र में समस्त अधिशाषी अधिकारियों, नगर निगम क्षेत्र में DSO और ग्रामीण क्षेत्र में BDO को उनके कार्यक्षेत्र के लिए अधिकृत किया हुआ है. पिछले दिनों झुंझुनूं में जिला रसद अधिकारी की जांच में सामने आया कि अधिशाषी अधिकारी पिलानी की आईडी से दो पोस मशीनों पर पंजीकृत राशनकार्डों की यूनिट को बढ़ा दिया गया. इसकी जांच में सामने आया कि उपभोक्ता को यूनिट बढ़ने का पता ही नहीं था. उसकी अनुमति के बिना ही फर्जी तरीके से यूनिट बढ़ा दी गई. विभाग ने इसको आईडी का दुरुपयोग माना. 

इसकी रिपोर्ट जब विभाग के आला अधिकारियों के पास पहुंची तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई. इसके बाद विभाग ने स्वायत्त शासन विभाग को अधिशाषी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के लिए पत्र लिख गिया. इसके साथ ही इस तरह फर्जीवाडे का नया खेल सामने आते ही विभाग भी सक्रिय हो गया और उसने प्रदेश में 3 लाख 87 हजार 873 राशनकार्डों को अपने राडार पर ले लिया. इन राशनकार्डों में ऑनलाइन तरीके से 3 से अधिक युनिट जोड़ी गई है. जयपुर में भी 19 हजार 26 राशनकार्ड जांच के दायरे में हैं.

बहरहाल गरीबों के हक का निवाला छीनने का खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग पर पहले ही "टैग" लगा हुआ है. जिन अफसरों को पात्र लोगों की मदद के लिए अधिकृत कर रखा है. वही मदद ना करके अपनी जेब भरने में लगे हुए हैं. लेकिन इस बार गरीबों के हक का निवाला डकारने और सरकार को चपत लगाने का तरीका नया है और इस तरीके को देखकर विभाग के आला अफसर भी दंग है.