जयपुर: बंजर जमीन से होगी किसानों की कमाई, सूरज करेगा मदद

प्रदेश के ऊर्जा मंत्री डॉ. बीडी कल्ला का कहना है कि ग्रीन बिजली विकल्पों के उपयोग पर सरकार फोकस है. इसके लिए औद्योगिक इकाईयों और आवासों के साथ किसानों पर भी फोकस किया जा रहा है. 

जयपुर: बंजर जमीन से होगी किसानों की कमाई, सूरज करेगा मदद
केंद्र और राज्य सरकार की इस पहल का लाभ किसानों को मिलना तय है

जयपुर: किसानों (Farmers) की बंजर जमीन से कमाई के दरवाजे खुल गए हैं. राजस्थान रिन्यूएबल एनर्जी कॉरपोरेशन लिमिटेड (Rajasthan Renewable Energy Corporation Limited) ने अभिरूचि की अभिव्यक्ति के ऑर्डर जारी किए हैं. अब जयपुर, जोधपुर और अजमेर डिस्कॉम के कार्यालयों में आवेदन किए जा सकेंगे.

विभागीय आदेशों के अनुसार, 31 दिसंबर तक किसान सौर ऊर्जा संयत्र लगाने के लिए सहायक अभियंता कार्यालय में आवेदन कर सकेंगे. किसानों की आय में इजाफे के लिए प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा आरैर उत्थान महाअभियान के तहत विभिन्न चरणों के किसानों को लाभ दिया जाएगा.

प्रदेश के किसान अपनी बंजर जमीन से सौर ऊर्जा की खेती कर सकेंगे. कुसुम योजना के जरिए इस जमीन से भी किसानों की आय बढ़ाने के प्रयास होंगे. विद्युत सब स्टेशन से पांच किलोमीटर के दायरे के किसान इस योजना से अपनी आय बढ़ा सकेंगे. 

ट्यूबवेल का संचालन सौर ऊर्जा से कर सकेंगे
प्रदेश के ऊर्जा मंत्री डॉ. बीडी कल्ला का कहना है कि ग्रीन बिजली विकल्पों के उपयोग पर सरकार फोकस है. इसके लिए औद्योगिक इकाईयों और आवासों के साथ किसानों पर भी फोकस किया जा रहा है. किसान अब खेत के कुओं और ट्यूबवेल का संचालन सौर ऊर्जा से कर सकेंगे, बिजली कनेक्शन की जगह 60 फीसदी सब्सिडी पर सोलर सिस्टम को मंजूरी मिली है. इस बिजली को जयपुर, अजमेर और जोधपुर डिस्कॉम सहित अन्य विद्युत कंपनियां खरीद भी सकेंगी.

सरकार ने किसानों से नेट मीटरिंग के जरिए बिजली खरीदने के लिए 3.44 रुपए प्रति यूनिट की रेट तय की है. केंद्र सरकार की कुसुम योजना में पहले चरण में 37 हजार किसानों को योजना का पात्र माना गया हैँ. इसमें 25 हजार नए और साढ़े 12 हजार पुराने कनेक्शनों पर सोलर सिस्टम की सब्सिडी देने का लक्ष्य तय किया है. इसमें 30 फीसदी केंद्र और 30 फीसदी राज्य सरकार अनुदान देगी, इसमें से 30 प्रतिशत राशि नाबॉर्ड की ओर से लोन में प्रदान की जाएगी. दस प्रतिशत राशि किसान को देनी होगी.

ऊर्जा विभाग की ओर से जारी आदेशों के अनुसार, एक मेगावाट क्षमता के लिए साढ़े तीन करोड़ रुपए से चार करोड़ रुपये का खर्च संभावित हैं. इससे एक वर्ष में 17 लाख यूनिट विद्युत उत्पाद होगा. इससे सालाना 48 लाख रुपए की आय किसान को होसकेंगी. 25 वर्ष की तय अवधि में यह आय 12 करोड़ रुपए के करीब हैं. वहीं ट्यूबवेल पर 15 एचपी का सोलर सिस्टम लगाने पर करीब चार लाख रुपए खर्च होंगे. नए ट्यूबवेल व कुओं पर सोलर सिस्टम लगाने का काम हॉर्टिकल्चर विभाग करेगा. वहीं पुराने बिजली कनेक्शनों पर सोलर सिस्टम लगाने का काम डिस्कॉम को दिया है. ट्यूबवेल के पंप से दुगनी क्षमता का सिस्टम लगाया जाएगा, ताकि ज्यादा बिजली डिस्कॉम को मिल सके. इससे प्रसारण सिस्टम पर होने वाला खर्च बचेगा और किसानों को आय भी होगी.

केंद्र और राज्य सरकार की इस पहल का लाभ किसानों को मिलना तय हैं, इसका लाभ राज्य सरकार पर कृषि कनेक्शन पर दी जा रही सब्सिडी में कमी के रुप में भी देखने को मिलेगा. जिसका भविष्य में असर डिस्कॉम्स की आर्थिक मजबूती के रुप में भी देखा जा सकता है.