लिंग जांच में सहायक आंखों की इस मशीन का भी अब अस्पतालों में होगा रजिस्ट्रेशन

बी-स्कैन मशीन को एक्ट के दायरे में लेने से पहले पीसीपीएनडीटी सैल ने जिलों में टीम भेजकर 65 आई सेंटरों पर जांच करवाई. जांच में इस मशीन से भ्रूण लिंग जांच करने की संभावनाओं को सही पाया गया. 

लिंग जांच में सहायक आंखों की इस मशीन का भी अब अस्पतालों में होगा रजिस्ट्रेशन

कोटा/ हिमांशु मित्तल: भ्रूण लिंग जांच में सोनोग्राफी मशीनों के बाद अब चिकित्सा विभाग की नजरें सरकारी और निजी चिकित्सालयों की ऑफ्थेमॉलोजी विभाग में लगी आंखों की जांच करने वाली बी-स्कैन मशीन पर है. प्रदेश के बीकानेर और महाराष्ट्र के पूणे में ऐसे मामले पकड़े जाने के बाद विभाग ने विशेषज्ञों से इसकी जांच पड़ताल करवाई तो यह बात साफ हो गई कि आंखों की जांच में काम आने वाली इस मशीन का भ्रूण लिंग जांच मे गलत इस्तेमाल हो रहा था. इसी रिपोर्ट के आधार पर अब सरकार ने स्टेट पीसीपीएनडीटी सैल में सभी सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में इस्तेमाल की जाने वाली बी-स्कैन मशीन को पीसीपीएनडीटी एक्ट के दायरे में लेते हुए सोनाग्राफी मशीनों की तरह इस मशीन का पंजीकरण भी अनिवार्य कर दिया है.

बी-स्कैन मशीन को एक्ट के दायरे में लेने से पहले पीसीपीएनडीटी सैल ने जिलों में टीम भेजकर 65 आई सेंटरों पर जांच करवाई. जांच में इस मशीन से भ्रूण लिंग जांच करने की संभावनाओं को सही पाया गया. रिपोर्ट के बाद सरकार ने बीकानेर के एसपी मेडिकल कॉलेज में रेडियोलॉजी विभागध्यक्ष और स्पेशलिस्ट चिकित्सकों से भी राय जानी तो यह बात साफ हो गई कि इस मशीन से भी भ्रूण का लिंग परिक्षण किया जाना संभव है. इसके बाद केंद्र सरकार ने पीसीपीएनडीटी एक्ट के दायरे में लेने की अनुमति दे दी. नए नियमों के तहत आई हॉस्पिटल संचालकों को सोनोग्राफी मशीन की तर्ज पर बी-स्कैन के लिए लाइसेंस लेना पड़ेगा साथ ही मरीजों का नाम, पता, मोबाइल नम्बर और बीमारी का रिकॉर्ड रखना होगा.

पीसीपीएनडीटी के नई दिल्ली स्थित सेन्ट्रल सुपरवाइजरी बोर्ड की सिफारिश पर केंद्र सरकार ने राजस्थान समेत देश के सभी राज्यों को मशीन का रजिस्ट्रेशन करवाने और एक्टिव ट्रेकर लगाने के निर्देश जारी किए हैं. जिससे भ्रूण लिंग जांच एवं कन्या भ्रूण हत्या रोकने में लगाम लगाई जा सके. सीएमएचओ डॉ आरके लवानिया ने बताया कि जिले के सभी सरकारी और प्राइवेट चिकित्सा सस्थानों को इस आशय से अवगत कराते हुए 7 दिवस में कार्यालय आकर पंजिकरण करवाने के निर्देश जारी किए हैं. पंजीकरण नहीं करवाने वाले संस्थानों पर निरीक्षण के दौरान नियमानुसार कार्यवाही होगी. इसके अलावा इकोकार्डियोलोजी और यूरोलोजी विभाग की मशीने, एमआरआई, समेत अन्य भ्रूण जांच कर सकने वाली मशीनों को भी पंजिकृत किया जाएगा.

क्या है बी-स्कैन मशीन
बी स्केन मशीन आंखों की जांच में काम मे आती है. मशीन में लगे प्रोब के सहारे मोतिया बाँध पकना या आंखों का पर्दा देखने मे इसका उपयोग किया जाता है. इसकी 3 लाख से 15 लाख की कीमत की होती है. बाजार में चाइनीज बी-स्कैन मशीन सस्ती दर में मिल जाती हैं. बी स्केन मशीन पोर्टेबल साइज की होती हैं जिसे आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है.

कैसे काम करती है यह मशीन 
सबसे पहले मरीज की बन्द आंखों पर जेल (लिक्विड) लगाया जाता है, क्योंकि जेल (लिक्विड) एयर गेप को खत्म कर देता है. इसके बाद प्रोब की सहायता से आंखों की जांच की जाती है. यानी आंखों की सोनोग्राफी. इसकी जांच में मरीज की आंख का लेयर उखड़ना या मोतियाबिंद के पकने का पता चलता है.
 
कैसे होता है मशीन का गलत इस्तेमाल 
डॉक्टरों के मुताबिक आंखे जांचने की बी-स्कैन मशीन का एक प्रोब बदलने से भ्रूण लिंग परिक्षण जैसे गलत काम में इस्तेमाल किया जा सकता है. मशीन के स्लॉट में प्रोब को बदलना पड़ता है. प्रोब बदलने के बाद ये मशीन पोर्टेबल सोनोग्राफी मशीन की तरह काम करती है. गर्भवती महिला के पेट पर जेल (लिक्विड) लगाने के बाद प्रोब को गर्भवती महिला के पेट पर घुमाया जाता है. इसके बाद मशीन की स्क्रीन पर सारी डिटेल आ जाती है. मशीन से अटैच लेपटॉप या कम्प्यूटर से प्रोब को जोड़ने पर भी भ्रूण की जांच सम्भव है. प्रोब से अल्ट्रा साउंड किरणे निकलती हैं. मशीन में महंगे प्रोब को जोड़ने से इन्टरनल सोनोग्राफी भी की जा सकती है.

जानकारी के मुताबिक प्रदेश में करीब 300 मशीने संचालित हैं. सबसे ज्यादा जयपुर, सीकर, जोधपुर, उदयपुर, बीकानेर, अजमेर, कोटा में हैं. 
पीसीपीएनडीटी एक्ट के उल्लंघन पर 3 से 5 साल तक की सजा और 10 से 50 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान है. वहीं लिंग परीक्षण करते हुए रंगे हाथो पकड़े जाने पर पीसीपीएनडीटी एक्ट के साथ साथ भारतीय दंड सहिंता की धाराएं भी जोड़ी जाती हैं. मशीनों को जब्त करने की भी व्यवस्था है. अब दूसरी मशीनों को भी इसके दायरे में लेने से न सिर्फ मशीनों का बल्कि डॉक्टरों का भी रजिस्ट्रेशन कराना होगा.