अब Jaipur Nagar Nigam Greater शोभा नहीं बढ़ाएंगे गुलदस्ते, छिनेंगी सरकारी गाड़ियां!

नगर निगम की माली हालत खराब होने के चलते फूल-मालाओं, गुलदस्ते सहित नाश्ते, पानी की बोतलों पर खर्च होने वाला पैसा अब शहर के विकास कार्यों पर खर्च होगा.

अब Jaipur Nagar Nigam Greater शोभा नहीं बढ़ाएंगे गुलदस्ते, छिनेंगी सरकारी गाड़ियां!
मेयर डॉ. सौम्या गुर्जर ने गुलाब आने पर पाबंदी लगा दी है.

Jaipur: नगर निगम ग्रेटर (Municipal Corporation Greater) में सेहत, सुगंध और अफसरों के चैंबर की शोभा पर अंकुश लगा दिया है. मेयर, उपमहापौर, सहित अफसरों के कमरों में न तो फूल, गुलदस्ते अफसरों की कमरे की शोभा बढ़ाएंगे, न ही बोतल में पीने को पानी मिलेगा. 

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नगर निगम की माली हालत खराब होने के चलते फूल-मालाओं, गुलदस्ते सहित नाश्ते, पानी की बोतलों पर खर्च होने वाला पैसा अब शहर के विकास कार्यों पर खर्च होगा.

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नगर निगम ग्रेटर में न फूलों की सुगंध आएगी और न ही वीआईपी नाश्ते का स्वाद, दो साल से नगर निगम ग्रेटर में खालीपन है. शहर में सफाई से लेकर सीवरेज और सड़कों से लेकर लाइटों के काम अधूरे पड़े हैं. ठेकेदार हड़ताल पर हैं. शिकायतों पर टका सा जवाब- निगम में बजट नहीं है. इससे इतर अधिकारियों की सेहत, सुगंध और नजारों पर कोई असर नहीं. सामने आया कि ग्रेटर निगम में करीब 25-30 चैंबर में रोजान गुलदस्ते लगते हैं. इसका प्रतिदिन खर्च ही करीब 1897 हजार रुपये आ रहा हैं यानि की महीने का 56 हजार 910 और सालान 6 लाख 82 हजार 920 रुपये. 

इसी तरह मेयर, अफसरों के कमरे में आने वाली पानी की बोतल और नाश्ते पर भी पूरी तरह से रोक लगा दी है. इसकी शुरूआत मेयर डॉ. सौम्या गुर्जर (Somya Gurjar) ने अपने चैंबर से की है. मेयर डॉक्टर सौम्या गुर्जर ने बताया कि खर्च में कटौती की शुरुआत मैने खुद के चैंबर से की है. इसके लिए उन्होंने मेयर के चैंबर में लगे रहने वाले नाश्ते के दौर पर पूरी पाबंदी लगाई है, जो कि हर रुटीन मीटिंग और गाहे-बगाहे चलते हैं. इसके साथ ही पानी की बोतल की जगह कैंपर रखने के आदेश हैं. इसके पीछे एक तो प्लास्टिक बोतल पर पाबंदी लगेगी, वहीं बोतलों से होने वाले खर्च पर भी अंकुश लगा दिया हैं.

केवल मंदिर में पूजा के लिए माला आएगी
नगर निगम ग्रेटर में काम करो या नहीं, ऑफिस आओ या नहीं. यह खर्च तय है. इस पर एक्शन लेते हुए मेयर डॉ. सौम्या गुर्जर ने गुलाब आने पर पाबंदी लगा दी है. पहले खुद के चैंबर से वो जार हटवा दिया, जिसमें ये गुलदस्ते लगते हैं. इसके बाद अब सभी चैंबर से भी इसे हटाने को आदेश कर दिए हैं. साथ ही संबंधित उद्यान शाखा के अफसरों को भी साफ कर दिया है कि इस विपरीत हालात में हो रहे इस अनवश्यक खर्च को बंद किया जाए. केवल और केवल मंदिर में पूजा के लिए माला आएगी. इसका खर्च 100 रुपये के भीतर रहेगा. उधर जिन शाखाओं में जिन अधिकारियों को गाड़ी की जरूरत नहीं है, उनकी गाडियां भी छीनने की तैयारी शुरू कर दी हैं. करीब 25 से ज्यादा गाडियों हटाकर महीने का 6 लाख रुपये बचाया जाएगा.

डॉक्टर सौम्या ने कहा कि वित्तीय हालत खराब रहे तो उस हिसाब से रहना चाहिए. लोगों के काम के लिए हमारे पास पैसा नहीं है, जबकि चैंबरों में खुशबू पूरी और तो और, एक अफसर के तो छुट्टी पर रहने के बावजूद गुलदस्ता आ रहा है. बिल देखे तो प्रतिदिन का 2 हजार के आसपास है. इसमें कई लाइटें ठीक हो सकती हैं. ठेकेदारों का करीब 350 करोड रुपये बकाया चल रहा है. पैसा नहीं होने के चलते सभी टेंडर निरस्त कर दिए हैं.

बहरहाल, हाल ही में कार्यालयों से बाहर मौज करने वाले अफसर-कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की गई थी. भरी दुपहरी बगैर किसी कारण ऑफिस नहीं पहुंचने वाले 38 कार्मिकों को नोटिस जारी किए गए. इसके साथ ही अब सभी कमरों में 32 रजिस्टर रखवाए हैं, जिसमें टाइमिंग दर्ज करने के आदेश हैं ताकि दूर-दराज से आने वालों की सुनवाई हो सके.