राजस्थान के किसान करेंगे बिजली की खेती, प्रति यूनिट मिलेंगे 3.44 रुपये

सोलर सिस्टम से बनने वाली बिजली (Electricity) जयपुर, अजमेर और जोधपुर डिस्कॉम सहित अन्य विद्युत कंपनियां खरीद भी सकेंगी.

राजस्थान के किसान करेंगे बिजली की खेती, प्रति यूनिट मिलेंगे 3.44 रुपये
किसान अब खेत के कुओं और ट्यूबवेल का संचालन सौर ऊर्जा से कर सकेंगे.

अंकित तिवाड़ी, जयपुर: कड़ी मेहनत से बंजर जमीन में फसल उगाने वाले किसान अब बिजली (Electricity) की खेती भी कर सकेंगे. प्रदेश में नए प्रावधानों से किसानों की कमाई अब बिजली (Electricity) बनाने से भी होगी. सरकार ने किसानों से नेट मीटरिंग के जरिए बिजली (Electricity) खरीदने के लिए 3.44 रुपये प्रति यूनिट की रेट तय की है. राशि सीधे किसानों के खाते में जाएगी. 

पर्यावरण हितैषी उपबंधों में ग्रीन बिजली (Electricity) विकल्पों के उपयोग पर केंद्र और राज्य सरकारों का फोकस हैं. इसके लिए औद्योगिक इकाइयों और आवासों के साथ किसानों पर भी फोकस किया जा रहा है. किसान अब खेत के कुओं और ट्यूबवेल का संचालन सौर ऊर्जा से कर सकेंगे, बिजली (Electricity) कनेक्शन की जगह 60 फीसदी सब्सिडी पर सोलर सिस्टम को मंजूरी मिलेगी. 

सोलर सिस्टम से बनने वाली बिजली (Electricity) जयपुर, अजमेर और जोधपुर डिस्कॉम सहित अन्य विद्युत कंपनियां खरीद भी सकेंगी. सरकार ने किसानों से नेट मीटरिंग के जरिये बिजली (Electricity) खरीदने के लिए 3.44 रुपये प्रति यूनिट की रेट तय की है.

37 हजार किसानों को लाभ
केंद्र सरकार की कुसुम योजना में पहले चरण में 37 हजार किसानों को योजना का पात्र माना गया है. इसमें 25 हजार नए और साढ़े 12 हजार पुराने कनेक्शनों पर सोलर सिस्टम की सब्सिडी देने का लक्ष्य तय किया है. इसमें 30 फीसदी केंद्र और 30 फीसदी राज्य सरकार अनुदान देगी, इसमें से 30 प्रतिशत राशि नाबॉर्ड की ओर से लोन में प्रदान की जाएगी. दस प्रतिशत राशि किसान को देनी होगी. 

चार से पांच लाख रुपये का खर्चा
ट्यूबवेल पर 15 एचपी का सोलर सिस्टम लगाने पर करीब चार लाख रुपये खर्च होंगे. नए ट्यूबवेल व कुओं पर सोलर सिस्टम लगाने का काम हॉर्टिकल्चर विभाग करेगा. वहीं पुराने बिजली (Electricity) कनेक्शनों पर सोलर सिस्टम लगाने का काम डिस्कॉम को दिया है. ट्यूबवेल के पंप से दुगनी क्षमता का सिस्टम लगाया जाएगा, ताकि ज्यादा बिजली (Electricity) डिस्कॉम को मिल सके. इससे प्रसारण सिस्टम पर होने वाला खर्च बचेगा और किसानों को आय भी होगी.