‘नरेगा’ में अफसर हो गए फेल, 30वें पायदान पर पहुंचा जयपुर

महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत पात्र परिवारों को हर साल 100 दिन का रोजगार दिए जाए का प्रावधान है लेकिन योजना की प्रभावी मॉनिटरिंग के अभाव में ग्रामीणों को पूरा रोजगार नहीं मिल पा रहा है.

‘नरेगा’ में अफसर हो गए फेल, 30वें पायदान पर पहुंचा जयपुर
विभिन्न स्तरों पर मॉनिटरिंग का अभाव इसकी प्रमुख वजह है.

जयपुर: प्रदेश में महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना (Mahatma Gandhi National Rural Employment Gurantee Act) में लंबित कार्य पूर्ण करने, रोजगार बढ़ने (मानव श्रम दिवस) और समय पर भुगतान को लेकर जयपुर जिला 30वें पायदान पर आ गया है जबकि पहले पायदान पर भीलवाड़ा जिला है. वहीं इसके लिए अलग-अलग तर्क विभाग के अधिकारी गिना रहे हैं.

प्रदेश में अधिकारियों की लापरवाही ग्रामीणों पर भारी पड़ रही है. महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत पात्र परिवारों को हर साल 100 दिन का रोजगार दिए जाए का प्रावधान है लेकिन योजना की प्रभावी मॉनिटरिंग के अभाव में ग्रामीणों को पूरा रोजगार नहीं मिल पा रहा है. इतना ही नहीं, साल दर साल पात्र परिवारों को 100 दिन रोजगार मिलने का आंकड़ा लगातार गिरता जा रहा है. साथ ही योजना के तहत लंबित कार्य पूर्ण करने, रोजगार बढ़ने (मानव श्रम दिवस) और समय पर भुगतान को लेकर भी जयपुर जिले की स्थिति अन्य जिलों से बेहद खराब है, जहां हजारों काम अटकने के साथ लोगों को रोजगार भी नहीं मिल पा रहा है.

कलेक्टर नहीं कर रहे मॉनिटरिंग 
हाल ही में नरेगा की रैंकिंग सूची में जयपुर जिले की स्थिति बेहद खराब सामने आई है. दरअसल यदि अफसर अपने कार्यालयों से बाहर निकलकर फील्ड में जाते तो शायद ये स्थिति नहीं आती. अधिकारियों और कर्मचारियों के टीम भावना से काम करते हुए अधिक से अधिक गरीब तबके को योजनाओं में राहत पहुंचाती, जो जयपुर जिला प्रदेश में टॉप-10 में आ सकता था. उल्लेखनीय है कि समस्त सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में जिला कलेक्टर की परफॉर्मेंस का पैमाना भी माना जाता है. कलेक्टर ही इन सब सरकारी योजनाओं की मॉनिटरिंग सीधे तौर पर करते हैं.

30वें स्थान पर आ गया है जयपुर, ये चिंताजनक है
कलेक्टर जगरूप सिंह यादव ने बताया कि नरेगा के कुल कार्यों की एवज में खर्च राशि, 100 दिन पूरे कर चुके श्रमिक संख्या, प्रतिदिन श्रमिकों को रोजगार, प्रतिदिन और मासिक मजदूरी दर, लंबित कार्य पूरे करने, अन्स्किल्ड श्रमिक, श्रमिकों के आधा की सीडिंग, गत वित्तीय वर्ष के मुकाबले इस साल स्वीकृत, प्रगतिरत और पूर्ण कार्यों की स्थिति आदि के आधार पर मूल्यांकन किया गया है. इन्हीं बिंदुओं के आधार पर प्रत्येक जिले की रैंक जारी की गई है. यादव ने बताया कि वन विभाग और खान विभाग को जो काम सौंपे गए थे, उनका संचालन ठीक ढंग से नहीं हो पाया. चिंताजनक बात है कि जयपुर जिला 30वें स्थान पर आ गया है.

सचिन पायलट ने दिए हालात ठीक करने के निर्देश
श्रमिक को 90 दिन कार्य पूर्ण करने पर श्रम विभाग की योजनाओं का भी लाभ मिलता है, जिससे वो वंचित हो रहे हैं. विभिन्न स्तरों पर मॉनिटरिंग का अभाव इसकी प्रमुख वजह है. ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग का प्रभार देख रहे उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट हालात को सुधारने के सख्त निर्देश दिए हैं.