Kota Samachar: फिर से खुशहाल होगा किसान, तकनीक से बदलेगी तकदीर !

प्रदेश में धनिया उत्पादन (Coriander Production) के सबसे बड़े हब हाड़ौती में एक्सपोर्टर्स के जुटने के साथ ही अब कोटा के रामगंजमंडी और आसपास के इलाकों में धनिया प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करने की तैयारी है और धनिया के बीज से लेकर खाद तक में वैज्ञानिक खेती और तकनीकी उन्नयन को शामिल करने का प्लान बन रहा है. 

Kota Samachar: फिर से खुशहाल होगा किसान, तकनीक से बदलेगी तकदीर !
हाड़ौती में धनिये का रकबा सिमटकर 50-55 हजार हेक्टेयर तक रह गया है.

Kota: प्रदेश में धनिया उत्पादन (Coriander Production) के सबसे बड़े हब हाड़ौती में एक्सपोर्टर्स के जुटने के साथ ही अब कोटा के रामगंजमंडी और आसपास के इलाकों में धनिया प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करने की तैयारी है और धनिया के बीज से लेकर खाद तक में वैज्ञानिक खेती और तकनीकी उन्नयन को शामिल करने का प्लान बन रहा है. इन नवाचारों का ऐलान लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने अपने संसदीय क्षेत्र कोटा में हुई चौथी राष्ट्रीय धनिया सेमिनार (Fourth National Coriander Seminar) में किया. धनिया उत्पादन में देश में दूसरे पायदान पर कायम राजस्थान में सबसे ज्यादा धनिया हाड़ौती में होता है, लेकिन बीते कुछ समय से कई प्राकृतिक और वाणिज्यिक कारणों से यहां साल दर साल धनिये का रकबा सिमटता जा रहा है, लेकिन अब कोटा से धनिया उत्पादन में ऐसे नवाचारों की कवायद की जा रही हैं जो देश में ही नहीं दुनिया में धनिया उत्पादन और एक्सपोर्ट तक के आंकड़े बदलकर रख देंगे.

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धनिया सेमिनार में बिरला ने क्या कहा ?
ओम बिरला (Om Birla) ने कोटा जिले में धनिया के घटते रकबे पर चिंता जाहिर की
हाड़ौती में धनिये का रकबा सिमटकर 50-55 हजार हेक्टेयर तक रह गया है
कुछ साल पहले तक धनिये के लिए 2 लाख हेक्टेयर से ज्यादा का रकबा था
धनिये की खेती को बढ़ाने के लिए कई कदम उठाने की तैयारियां हैं
कोटा के रामगंजमंडी में मसाला पार्क बनाया जाएगा
रामगंज के आस पास धनिया प्रोसेसिंग प्लांट्स स्थापित करने की तैयारी

भारत में धनिया उत्पादन में दूसरे पायदान पर काबिज राजस्थान का करीब 80-85 फीसदी धनिया सिर्फ हाड़ौती अंचल में पैदा होता है..लेकिन बीते कुछ साल में धनिया की पैदावार में कमी आई है. दूसरा फैक्टर ये है कि प्रति बीघा सिर्फ 12 से 13 क्विंटल धनिया पैदावार के मुकाबले 50 से 55 रुपये किलो तक बिकने वाले वाले चना और सरसों प्रति बीघा 22 और 26 क्विंटल तक पैदा होते हैं. ऐसे में अब यहां के किसानों के लिए धनिया अब धन बरसाने वाला फसल रहा नहीं. रही सही कसर तकनीकी नवाचारों की कमी. एक ढर्रे वाली पारंपरिक खेती और स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग प्लांट्स के अभाव की वजह से धनिए की खेती में किसानों की दिलचस्पी कम हुई है.

जलवायु की अनुकूलता और प्रचुर पानी की उपलब्धता के चलते हाड़ौती में उत्पादित धनिया ना सिर्फ दक्षिण भारतीय राज्यों बल्कि यूरोप से लेकर गल्फ देशों तक में बाजार बना चुका है, लेकिन खुशबू और स्वाद के मामलों में मसालों के राजा धनिये की महक बरकरार रखने के लिये कोटा संभाग में धनिये के घटते रकबे को बढ़ाने की चुनौती से पार पाना ही होगा. साथ ही धनिया किसान तक उसकी उपज का वाजिब दाम पहुंचाना और स्थानीय प्रोसेसिंग प्लांट्स (Local processing plants) को स्थापित करना प्राथमिकता है. अगर ऐसा हुआ तो एक बार फिर से धनिये की खुशबू देश और दुनिया में अपना मुकाम स्थापित करेगी.

REPORTER- हिमांशु मित्तल
WRITTEN BY..अवनीश मिश्रा

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