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राजस्थान के बीसलपुर बांध में बचा केवल 22 फीसदी पानी, हो सकता है जल संकट

बीसलपुर बांध में 22.50 फीसदी से भी कम पानी बचा है. जल स्तर में रोजाना एक सेमी की गिरावट हो रही है

राजस्थान के बीसलपुर बांध में बचा केवल 22 फीसदी पानी, हो सकता है जल संकट
ट्यूबवेल खोदने के बाद शहर में पेयजल सप्लाई में सुधार होने की संभावना जताई जा रही है

आशीष चौहान/जयपुर: जयपुर जलसंकट से जूझ रहा है लेकिन इसके बावजूद भी अधिक जलदाय विभागी की लापरवाही खत्म होने का नाम नहीं ले रही है. शहर में 34 करोड़ की लागत से खुदने वाले 279 ट्यूबवेल की करीब एक महीने पहले मंजूरी मिल गई लेकिन इसके बावजूद भी अब तक जलदाय विभाग ने काम शुरू नहीं किया. एक तरफ बीसलपुर बांध लगातार प्यासा होता जा रहा है वहीं दूसरी ओर ट्यूबवेल नहीं खुदने से पानी का संकट लगातार गहराता जा रहा है. ऐसे में यदि सही वक्त पर जयपुर में ट्यूबवेल नहीं खुदे तो पानी के लिए हाहाकार मच जाएगा. अब तक नए ट्यूबवेल के वर्क आर्डर जारी नहीं हुए है. फाइलें अब तक सचिवालय में घूम रही है. 

बीसलपुर बांध में 22.50 फीसदी से भी कम पानी बचा है. जल स्तर में रोजाना एक सेमी की गिरावट हो रही है. इसके बावजूद जलदाय विभाग के इंजीनियर नए ट्यूबवेल खोदने और पुराने ट्यूबवेल को सही करने में लापरवाही बरत रहे हैं. शहर में 34.92 करोड़ रुपए खर्च कर 279 ट्यूबवेल खोदने के रेट कॉन्ट्रेक्ट के टेंडर को प्रमुख सचिव संदीप वर्मा की फाइनेंस कमेटी ने पहले ही ऑनफाइल फाइनेंशियल और प्रशासनिक मंजूरी दे दी थी. नए ट्यूबवेल के वर्क ऑर्डर नहीं दिए हैं. इनमें से ज्यादातर ट्यूबवेल द्रव्यवती रिवर फ्रंट के किनारे खोदे जाएंगे. ट्यूबवेल खोदने के बाद शहर में पेयजल सप्लाई में सुधार होने की संभावना जताई जा रही है. 

ज्यादातर नए ट्यूबवेल दक्षिण सर्किल में द्रव्यवती रिवर फ्रंट के किनारे खोदे जाएंगे. बीसलपुर बांध में मानसून के दौरान पानी कम आया. वहीं जलदाय विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही ट्यूबवेल खोदने का काम किया जाएगा. इन ट्यूबवेल से रोजाना 4 करोड़ लीटर पानी अतिरिक्त मिलेगा. पानी के संकट को खत्म करने के लिए जलदाय विभाग ने ट्यूबवेल के जरिए पानी उपलब्ध करवाएगा. आने वाले दिनों में जयपुर को 4 एमएलडी पानी ज्यादा मिलेगा. शहर में अभी 420 एमएलडी (42 करोड़ लीटर) पेयजल सप्लाई किया जा रहा है. इसमें 320 एमएलडी पानी बीसलपुर बांध से और 100 एमएलडी पेयजल ट्यूबवैल से लिया जा रहा है. 

नई सरकार बनने के बाद नए प्रमुख सचिव संदीप वर्मा ने फाइल पर मंजूरी दे दी, लेकिन अभी तक फाइल सचिवालय व जल भवन के दफ्तरों में ही चक्कर लगा रही है. मार्च तक ट्यूबवेल नहीं खोदे गए तो पेयजल संकट बढ़ने की आशंका है. यदि जलदाय विभाग की ऐसी ही लापरवाही देखी गई तो जयपुर में जलसंकट शुरू हो जाएगा.