झुंझुनूं में हैं पांच लाख से भी ज्यादा किसान, महज 35 को मिला तारबंदी के लिए अनुदान

कृषि अधिकारियों की मानें तो वर्तमान में तारबंदी का फायदा लेने के लिए एक ग्रुप में तीन किसानों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा.

झुंझुनूं में हैं पांच लाख से भी ज्यादा किसान, महज 35 को मिला तारबंदी के लिए अनुदान
जिले में आवारा पशुओं का इतना जमावड़ा है कि खेतों के अलावा शहर की सड़कों पर बेखौफ विचरण करते हैं.

संदीप केडिया, झुंझुनूं: वीर प्रसूताओं और किसानों की धरा के नाम से देशभर में चर्चित झुंझुनूं (Jhunjhunu) अंचल के किसानों के साथ छलावे की बात सामने आ रही है. पांच लाख से भी ज्यादा किसानों के जिले में किसी स्कीम में अगर 35 किसानों को फायदा पहुंचाने की बात होगी तो हर कोई इसे छलावा ही कहेगा.

दरअसल, कृषि विभाग की ओर से कई सालों से चल रही तारबंदी स्कीम (Fencing Scheme) का अब तक किसानों को फायदा नहीं मिल रहा है और वे दफ्तरों के चक्कर लगाकर थक चुके हैं. कई सालों से झुंझुनूं के लाखों किसान आवारा पशुओं की समस्या के चलते रात-दिन मेहनत और रखवाली करने के बावजूद फसलों को बर्बाद होते देखते आ रहे हैं जबकि सरकार ने किसानों को अपने खेतों में तारबंदी करने पर अनुदान देने की उम्मीद तो जगा दी, परंतु उन्हें फायदा अब तक ऊंट के मुंह में जीरा वाली कहावत जितना ही पहुंचाया है.

तारबंदी स्कीम में 2019-20 में तो महज 35 किसानों को फायदा पहुंचाया गया है. जब से यह स्कीम शुरू हुई है, तब से इसके किसानों को फायदा मिलने की बात की जाए तो यह आंकड़ा सौ तक भी नहीं पहुंचा है. अब तक इसमें महज 85 किसानों को तारबंदी के नाम पर अनुदान मुहैया कराया गया है. कृषि विभाग के माध्यम से यह स्कीम 2017-18 से व्यक्तिगत तौर पर किसानों को सब्सिडी देने से शुरू हुई थी और इसे 2018-19 में इसे ग्रुप आधारित कर दिया गया.

तीन किसानों का ग्रुप और 50 बीघा जमीन जरूरी
कृषि अधिकारियों की मानें तो वर्तमान में तारबंदी का फायदा लेने के लिए एक ग्रुप में तीन किसानों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा. इन तीनों किसानों के 50 बीघा जमीन होना जरूरी है. एक किसान को प्रति मीटर तार पर पर सौ रुपये या फिर लागत की 50 फीसदी सब्सिडी दी जाएगी. एक किसान को अधिकतम चार सौ मीटर पर चालीस हजार रुपये की सब्सिडी दी जा रही है.

50 हजार मीटर की डिमांग कर रखी है
वर्तमान में कृषि विभाग के पास 25 से अधिक ग्रुप आवेदन फाइलें लंबित हैं. इसके तहत अधिकारियों ने उच्चाधिकारियों को 50 हजार मीटर तार पर सब्सिडी देने की डिमांड भेज रखी है जबकि जिले को लक्ष्य महज सात हजार मीटर के दिए गए, जो दस किसानों के हिस्से में ही पूरे हो गए. इसमें किसानों का सलेक्शन भी वरियता के आधार पर किया जाता है.

फसल हो रही बर्बाद
जिले में आवारा पशुओं का इतना जमावड़ा है कि खेतों के अलावा शहर की सड़कों पर बेखौफ विचरण करते हैं. आवारा पशुओं से फसलों को बचाने के लिए जिले के किसान रातभर जागकर पहरेदारी करते हैं, बावजूद इसके थके-हारे अगर नींद की एक झपकी भी लग गई तो पशु खेतों में घुसकर फसल को बर्बाद कर देते हैं.