राजस्थान: प्रदेश के सबसे बड़े SMS अस्पताल में अंगदान की मुहिम ठंडे बस्ते में!

अंगदान-महादान लोगों को नई जिंदगी देने वाली ये सोच जागरूकता के चलते भले ही घर-घर तक पहुंच रही हो लेकिन सरकारी तंत्र इस पवित्र काम में भी कछुआ चाल चल रहा है. 

राजस्थान: प्रदेश के सबसे बड़े SMS अस्पताल में अंगदान की मुहिम ठंडे बस्ते में!
राजस्थान समेत पूरे देशभर में अंगदान दिवस मनाया जा रहा है.

जयपुर: प्रदेश के सबसे बड़े एसएमएस अस्पताल (SMS Hospital) में अंगदान की मुहिम ठंडे बस्ते में नजर आ रही है. जरूरतमंदों को नई जिंदगी देने की इस पहल में सरकार जहां करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर सरकारी तंत्र की सुस्त कार्यप्रणाली और चिकित्सकों की आपसी खींचतान के चलते पिछले एक साल में एक भी कैडेबर ट्रांसप्लांट नहीं हो पाया है. जिंदगी बचाने की मुहिम कागजों तक ही सिमट कर रह गई है.

अंगदान-महादान लोगों को नई जिंदगी देने वाली ये सोच जागरूकता के चलते भले ही घर-घर तक पहुंच रही हो लेकिन सरकारी तंत्र इस पवित्र काम में भी कछुआ चाल चल रहा है. 

बात एसएमएस अस्पताल की करें, तो सरकार की मंशा के अनुरूप परिणाम नहीं आ रहे हैं. दरअसल, सरकार ने ब्रेनडेड पेंशेट के परिजनों को जागरूक करने के साथ ही अंगदान को बढ़ावा देने के लिए हाल ही में केंद्रीय एजेंसी 'नोटो' की तर्ज पर 'सोटो' का गठन किया. इसमें आधा दर्जन चिकित्सकों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई.

यदि परिणाम की बात करें तो पिछले एक साल में सरकारी क्षेत्र में नतीजा शून्य है हालांकि, इस नाकामी को लेकर कोई भी खुलकर बात करने को तैयार नहीं है लेकिन अंदरखाने ये बात जगजाहिर है कि ऑर्गन ट्रांसप्लांट से सीधे जुड़े चिकित्सकों के बजाय दूसरे चिकित्सकों को सोटो में जिम्मेदारी दी गई है. ऐसे में चिकित्सकों की आपसी खींचतान के चलते ब्रेनडेड पेंशेट के परिजनों की काउंसलिंग में सफलता नहीं मिल रही है. इसी खिंचतान का परिणाम है कि एक गेस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट तो नौकरी तक छोड़ चुके हैं.

अंगदान की मुहिम का राजस्थान स्थिति
- 32 ब्रेनडेड पेंशेट का हो चुका कैडेबर ट्रांसप्लांट
- 104 लोगों की सॉलिड ऑर्गन देकर बचाई गई जान  
- 57 मरीजों को किडनी, 29 मरीजों को मिला लीवर
- 16 दिल धड़क रहे जरूरतमंद मरीजों को
- 1 फेफड़े, 1 अग्नाशय का भी प्रत्यारोपण
- अंगदान से कुल 118 लोगों को मिला नया जीवनदान

फैकल्टी मेंबर्स को जागरूकता मूवी दिखाई गई
राजस्थान समेत पूरे देशभर में अंगदान दिवस मनाया जा रहा है. जयपुर में भी पिछले दो दिनों में कई कार्यक्रम आयोजित किए गए. एसएमएस मेडिकल कॉलेज में आज बच्चों और फैकल्टी मेंबर्स को जागरूकता मूवी दिखाई गई लेकिन इस दौरान जब जिम्मेदारों से इस बारे में सवाल किए गए कि सरकारी क्षेत्र में पिछले एक साल में ऐसा क्या हो गया है, जिसके चलते कैडेबर ट्रांसप्लांट नहीं हो रहे हैं तो किसी के पास भी इसका जवाब नहीं मिला. 

गदान की मुहिम पर एकाएक लगा ब्रेक पूरे सरकारी तंत्र की कार्यशैली पर सवाल उठा रहा है. उम्मीद है कि इस रिपोर्ट के बाद जिम्मेदार जगेंगे क्योंकि ये मुहिम कई परिवारों को नई जिन्दगी देने से जुड़ी है. यदि टीम एसएमएस एकजुट होकर काम करेगी तो निश्चित तौर पर इसके सफल परिणाम आएंगे.