राजपूत करणी सेना की मांग, 'पद्मावती' पर बैन के लिए पीएम नरेंद्र मोदी दें दखल

राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और गुजरात की भाजपा सरकार ने अपने राज्यों में फिल्म पर प्रतिबंध लगाए जाने अथवा फिल्म से "आपत्तिजनक सामग्री" हटाए जाने को कहा है.

राजपूत करणी सेना की मांग, 'पद्मावती' पर बैन के लिए पीएम नरेंद्र मोदी दें दखल
फिल्म पद्मावती का पोस्टर.

जयपुर: श्री राजपूत करणी सेना के संस्थापक लोकेन्द्र सिंह कालवी ने फिल्म पद्मावती पर देश में प्रतिबंध लगाने के लिये प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप करने की मांग की है. कालवी ने कहा कि सिनेमाटोग्राफी एक्ट के तहत केन्द्र सरकार को फिल्म को परदे से उतरने पर रोक लगाने का अधिकार है. कालवी ने संवाददाताओं से कहा कि प्रधानमंत्री को इस मामले में हस्तक्षेप कर देश भर में फिल्म को परदे पर उतरने से रोकना चाहिए, यह केन्द्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में है. उन्होंने कहा कि कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने अपने अपने राज्यों में फिल्म को रिलिज नहीं करने के लिये आगे आये हैं और उन्हें उम्मीद है कि अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री भी इसी तरह के कदम उठायेंगे. कालवी ने कहा कि उनका संगठन यदि जरूरत पड़ी तो फिल्म पर देशभर में प्रतिबंध लगाने के लिये उच्चतम न्यायालय जायेगा.

वहीं दूसरी ओर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार (28 नवंबर) को कहा कि "पद्मावती" फिल्म को रिलीज किए जाने से पूर्व फिल्म के निर्माता को उससे जुड़े विवाद को समाप्त करना चाहिए. बिहार विधानसभा स्थित अपने कक्ष में पत्रकारों से बातचीत के दौरान नीतीश ने कहा कि "पद्मावती" फिल्म को रिलीज किए जाने से पूर्व फिल्म के निर्माता को उससे जुडे़ विवाद को समाप्त करने के लिए स्पष्टीकरण देना चाहिए.

गौरतलब है कि राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और गुजरात की भाजपा सरकार ने अपने राज्यों में फिल्म पर प्रतिबंध लगाए जाने अथवा फिल्म से "आपत्तिजनक सामग्री" हटाए जाने को कहा है. विभिन्न राजपूत समूह और राज नेताओं ने इस फिल्म के निर्माता संजय लीला भंसाली पर इतिहास को तोड़मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगाया है और इसके मुख्य किरदारों दीपिका पादुकोण, रणवीर सिंह और शाहिद कपूर को उनके क्रोध का सामना करना पड़ रहा है.

बिहार के कला संस्कृति मंत्री कृष्ण कुमार ऋषि से यह पूछे जाने कि पद्मावती फिल्म के प्रदर्शन को लेकर सरकार किस निर्णय पर पहुंची है, उन्होंने कहा कि किसी की संस्कृति और सभ्यता को ठेस पहुंचना अच्छी बात नहीं है, इसलिए वह चाहते हैं कि जो आपत्तियां जतायी गयी हैं जब तक उसमें सुधार नहीं किया जाता है और विवादित दृश्य को हटाया नहीं जाता तब तक उसपर बिहार में रोक रहे.