बाड़मेर: पाकिस्तान से आई महिलाएं नहीं लड़ पाएंगी राजस्थान में पंचायत चुनाव

लोकतंत्र के साथ-साथ इस हिस्सेदारी का लाभ आम नागरिक को भी मिल सके, इसलिए यहां निवास करने वाली महिला उम्मीदवारों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है. 

बाड़मेर: पाकिस्तान से आई महिलाएं नहीं लड़ पाएंगी राजस्थान में पंचायत चुनाव
सरपंच का चुनाव लड़ने के लिए कई महिलाओं के सामने अब पाकिस्तान जाने की नौबत आ गई है.

भूपेश आचार्य, बाड़मेर: पाकिस्तान से प्रताड़ित होकर भारत आए विस्थापितों को लंबे समय के बाद भारतीय नागरिकता मिली. उसके बाद से लगातार अपने मताधिकार का प्रयोग कर भारतीय लोकतंत्र में अपनी हिस्सेदारी निभा रहे हैं. 

लोकतंत्र के साथ-साथ इस हिस्सेदारी का लाभ आम नागरिक को भी मिल सके, इसलिए यहां निवास करने वाली महिला उम्मीदवारों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है. ये वो चुनौती थी, जिसको पूरा नहीं किया जा सकता था. लिहाजा उनके चुनाव लड़ने की हसरत मन में ही रह जाएगी. 

राज्य निर्वाचन आयोग ने इस बार आरक्षित सीटों पर पिता के नाम का जाति प्रमाण पत्र संलग्न करना अनिवार्य कर दिया है. लिहाजा पाक विस्थापित महिलाओं को भारतीय नागरिकता मिलने के बाद पाकिस्तान जाकर जाति प्रमाणपत्र बनवाना पड़ेगा.

सरपंच का चुनाव लड़ने के लिए कई महिलाओं के सामने अब पाकिस्तान जाने की नौंबत आ गयी है. ये बॉर्डर इलाको की वे महिलाएं हैं, जिनका पीहर पक्ष पाकिस्तान में है. नियमानुसार जाति प्रमाण पत्र पितृत्व के आधार पर बनता है, जो मायके के गांव से जारी होता है. ऐसे में अब ये महिलाएं मन मसोस कर बैठी हैं कि न तो इतने कम समय में पाकिस्तान जा पाएंगी और न ही चुनाव लड़ सकेगी.

सीमावर्ती बाड़मेर-जैसलमेर जिले में करीब एक लाख पाक विस्थापित परिवार है. जिलेभर के सौ से अधिक गांवो में ये परिवार चौहटन, सेड़वा, रामसर, गडरारोड़, शिव और अन्य क्षेत्र में आकर बस गए. इन परिवारों को भारतीय नागरिकता तो मिल गई है. अब सरपंच के चुनावों में जहां-जहां आरक्षित सीट आई हैं, वहां इन परिवारों की महिलाएं भी दावेदार हैं, लेकिन जाति प्रमाण पत्र के नियम ने इनको निराश कर दिया है. 

पाक विस्थापित संघ के जिलाध्यक्ष नरपतसिंह धारा बताते हैं कि इतने कम समय में पाकिस्तान जाकर जाति प्रमाण पत्र कैसे बनाया जा सकता है.?भारतीय नागरिकता मिलने के बाद सरकार हमारा जाति प्रमाण भी यही का बनाकर दे ताकि पंचायतीराज चुनावों में अपनी भागीदारी निभा सकें.

आरक्षित सीट पर चुनाव लड़ने के लिए जाति प्रमाण पत्र होना आवश्यक है. अतिरिक्त निर्वाचन अधिकारी राकेश कुमार शर्मा ने बताया कि जाति प्रमाण पत्र का आधार पितृत्व है, इसी के आधार पर आरक्षण तय होता है. महिलाओं को अपने मायके से यह प्रमाण पत्र लाना आवश्यक है.

बहरहाल, जिनका पीहर पक्ष पाकिस्तान में है, वे न तो इतने कम समय में पाकिस्तान जा सकती हैं और न ही वहां से अब यह प्रमाण पत्र जारी होना है. लिहाजा अब उनके चुनाव लड़ने की हसरत मन में ही रह जाएगी.