राजस्थान: स्कूलों में फीस को लेकर HC के आदेश पर अभिभावकों ने ली राहत की सांस, कहा...

अभिभावकों को राहत देते हुए सरकार ने इस संबंध में दो आदेश भी जारी किए थे. जिसके बाद निजी स्कूलों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.

राजस्थान: स्कूलों में फीस को लेकर HC के आदेश पर अभिभावकों ने ली राहत की सांस, कहा...
एकलपीठ के आदेश पर रोक लगाने के बाद प्रदेश के अभिभावकों ने राहत की सांस ली है.

ललित कुमार/जयपुर: निजी स्कूलों और अभिभावकों के बीच फीस को लेकर चल रहे घमासान के बीच हाईकोर्ट (High Court) की खंडपीठ से अभिभावकों को बड़ी राहत मिली है. हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 7 सितंबर को एकलपीठ द्वारा दिए गए आदेश पर 9 अक्टूबर तक रोक लगा दी है. साथ ही मुख्य न्यायाधीश की खण्डपीठ इस मामले पर 5 अक्टूबर को अगली सुनवाई करेगा.

दरअसल, कोरोना (Corona) के चलते सरकार ने निजी स्कूलों की फीस वसूली पर रोक लगाई थी. अभिभावकों को राहत देते हुए सरकार ने इस संबंध में दो आदेश भी जारी किए थे. जिसके बाद निजी स्कूलों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.

हाईकोर्ट की एकलपीठ ने 7 सितंबर को निजी स्कूलों के पक्ष में फैसला देते हुए ट्यूशन फीस का 70 फीसदी हिस्सा तीन किश्तों में 31 जनवरी तक वसूलने के आदेश दिए. जिसके बाद अभिभावकों की ओर से खंडपीठ में इसकी चुनौती दी. खंडपीठ ने गुरुवार को सुनवाई करते हुए एकलपीठ के आदेश पर 9 अक्टूबर तक रोक लगाने के आदेश दिए हैं.

ऑल राजस्थान पेरेंट्स फोरम की ओर से हाईकोर्ट में पैरवी कर रहे अधिवक्ता ऋषिकेष महर्षि का ने बताया की 'मुख्य न्यायाधीश की खण्डपीठ ने एकलपीठ के आदेश पर 9 अक्टूबर तक रोक लगाई है. साथ ही 5 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में अभिभावकों की ओर से पक्ष रखा जाएगा. साथ ही हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों को 9 अक्टूबर तक यथावत ऑनलाइन क्लास चलाने के भी आदेश दिए हैं.'

वहीं, एकलपीठ के आदेश पर रोक लगाने के बाद प्रदेश के अभिभावकों ने राहत की सांस ली है. अभिभावकों का कहना है कि '7 सितम्बर को एकलपीठ के आदेश के बाद निजी स्कूल फीस को लेकर लगातार दबाव बना रहे थे. साथ ही एकलपीठ ने जो 70 फीसदी हिस्सा भुगतान के आदेश दिए उसकी भी अवहेलना कर रहे थे. ऐसे में खण्डपीठ ने अभिभावकों की पीड़ा को ध्यान में रखते हुए एकलपीठ के आदेश पर रोक लगाई है. एकलपीठ में हुई सुनवाई में अभिभावकों का पक्ष नहीं सुना गया था जिसके चलते निजी स्कूलों के पक्ष में फैसला आया था.'

इधर, निजी स्कूलों में हाईकोर्ट की खण्डपीठ के आदेश से निराशा है. स्कूल शिक्षा परिवार प्रदेशाध्यक्ष अनिल शर्मा का कहना है कि 'हाईकोर्ट का आदेश निराशाजनक है. पिछले 6 महीनों से फीस का भुगतान नहीं होने से कर्मचारियों और शिक्षकों को वेतन भुगतान करने में काफी समस्या हो रही है. वेतन नहीं मिलने और नौकरी चले जाने के कारण प्रदेश में 11 निजी स्कूलों के शिक्षकों ने आत्महत्या कर ली है. ऐसे में कोर्ट को चाहिए की वो सभी के हितों को ध्यान में रखते हुए फैसला करे.'