राजस्थान निकाय चुनाव 2019: जय-वीरू की तरह हो गए हैं विपक्षी नेता, खेल रहे अदला-बदली का दांव

तोड़फोड़ की यह जंग बड़े नेताओं को भी रास आई. दल बदलने में बड़े नेता की भी शय रही. पूर्व और वर्तमान विधायक की देखरेख में यह सब काम हुआ. 

राजस्थान निकाय चुनाव 2019: जय-वीरू की तरह हो गए हैं विपक्षी नेता, खेल रहे अदला-बदली का दांव
दर्जनों नेता इन दिनों नीमकाथाना में दल-बदलू हो गए हैं.

अशोक शेखावत, सीकर: नीमकाथाना में तोड़फोड़ अभियान जारी पहले बीजेपी (BJP) ने कांग्रेस के नेता को बीजेपी (BJP) में शामिल किया तो कांग्रेस ने भी करारा जवाब दिया. बीजेपी (BJP) के एक वरिष्ठ नेता को कांग्रेस में शामिल कराया.

गले में बीजेपी (BJP) के कमल के निशान का दुपटटा डाले ये नेता कुछ दिन पहले कांग्रेस का निशान लगा दुपटटा पहने नजर आते थे तो यही माजरा दूसरी ओर भी है. कांग्रेस के नेताओं के साथ माला पहन रहे नेता कभी बीजेपी (BJP) के जयकारे लगाते नजर आते थे लेकिन भाई चुनाव आए तो चेहरा भी सामने आया और नीयत भी. ये नजारा है नीमकाथाना में निकाय चुनाव में. कांग्रेस के दिग्‍गज नेता दौलत बीजेपी (BJP) का कमल लगा दुपटटा ओढ़ लिया है तो बीजेपी (BJP) के दिग्‍गज नेता अशोक अग्रवाल अब हाथ के साथ हो लिए हैं. ऐसे दर्जनों नेता इन दिनों नीमकाथाना में दल बदलू हो गए हैं. 

बड़े नेता भी हैं शामिल
तोड़फोड़ की यह जंग बड़े नेताओं को भी रास आई. दल बदलने में बड़े नेता की भी शय रही. पूर्व और वर्तमान विधायक की देखरेख में यह सब काम हुआ. बीजेपी (BJP) छोड़ने वालों को पूर्व मंत्री और खेतड़ी से कांग्रेस विधायक जितेन्‍द्र सिंह और नीम का थाना से कांग्रेस के विधायक सुरेश मोदी ने कांग्रेस की रीति नीतियों पर चलने का पाठ पढ़ाया और उन्‍हें कांग्रेस से जुड़ने पर स्‍वागत किया तो कांग्रेस के हाथ को छोड़ बीजेपी (BJP) का कमल खिलाने के लिए ज्‍वाइन करने वालों का पूर्व विधायक प्रेम सिंह बाजौर ने आर्शीवाद दिया और स्‍वागत किया. सभी नेताओं का सपना तो बस एक है. 

एक हो गए हैं एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्‍यारोप लगाने वाले नेता
सबसे मजेदार बात तो यह है कि आमने सामने चुनाव में एक-दूसरे को पटखनी देने के लिए आतुर रहने वाले एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्‍यारोप करने वाले बड़े दिग्‍गज नेता भी एक मंच पर नजर आए. जहां विधानसभा चुनावों में 2008 में प्रेम सिंह बाजौर को पटखनी दे चुके कांग्रेस से पूर्व विधायक रहे रमेश खंडेलवाल विकास मंच के बैनर के साथ बाजौर के साथ हो लिए हैं. उनकी अपनी मजबूरी है और मजबूरी यह कि 2018 में रमेश खंडेलवाल का टिकट काटकर कांग्रेस ने सुरेश मोदी को थमा दिया. तभी से रमेश खंडेलवाल ने पार्टी के खिलाफ बागी तेवर अपनाया और विधानसभा चुनाव में तोल ठोक दी. रमेश खंडेलवाल विधानसभा चुनाव में बाजौर और मोदी दोनों पर जमकर प्रहार करते थे. अब वे बाजौर के सुर में सुर मिला रहे है. खंडेलवाल ने नगर पालिका बोर्ड पर कब्‍जा जमाने के लिए बीजेपी (BJP) और बाजौर से हाथ मिला लिया और वे दोनों संयुक्‍त रूप से समझौते से चुनाव लड़ रहे हैे तो कांग्रेस अपने बूते पर मैदान में हैं.