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राजस्थान: एसएमएस अस्पताल में इलाज से पहले बतानी होगी धर्म और जाति, यह है कारण

एसएमएस अस्पताल के अधीक्षक डॉ. डीएस मीणा ने बताया कि आमतौर पर मरीजों से उनके धर्म के बारे में पूछा जाता है. जो एक नियमित प्रक्रिया है. 

राजस्थान: एसएमएस अस्पताल में इलाज से पहले बतानी होगी धर्म और जाति, यह है कारण
इस मामले में मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि मरीजों का धर्म पूछने के पीछे मकसद जनसंख्या विशेष में बीमारियों के बारे में पता लगाकर उसका डेटाबेस तैयार करना है.

जयपुर: राजस्थान के सबसे बड़े अस्‍पताल की ओर से मरीजों का इलाज करने से पहले धर्म और उपनाम पूछने का मामला एक बार फिर से सुर्खियों में है. हालांकि, ये फैसला नया नहीं तकरीबन डेढ़ साल से अस्पताल में ऐसा किया जा रहा है. दरअसल,अस्‍पताल के ओपीडी में पंजीकरण कराने की जो व्यवस्था है, इसमें मरीज के नाम के साथ-साथ उनका धर्म और उपनाम भी अवश्य भरना निर्देशों में शामिल किया गया है. 

 

 

एसएमएस अस्पताल के अधीक्षक डॉ. डीएस मीणा ने बताया कि आमतौर पर मरीजों से उनके धर्म के बारे में पूछा जाता है. जो एक नियमित प्रक्रिया है. इस डेटा के आधार पर मरीजों के लिंग, जातीय स्थिति, धर्म और क्षेत्र के बारे में जानकारी हासिल करने से उनमें पाई जाने वाली आम बीमारियों पर शोध करने में मदद‍ मिलती है. ये व्यवस्था सिर्फ अकेले एसएमएस अस्पताल में नहीं बल्कि दुनियाभर के अस्पतालों में है. दरअसल, देश के स्वास्थ्य महकमे की कोशिश है कि इस डेटा के आधार किसी खास धर्म में किसी विशेष बीमारी के फैलने की स्थिति में त्‍वरित कदम उठाया जा सकता है.

इस मामले में मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि मरीजों का धर्म पूछने के पीछे मकसद जनसंख्या विशेष में बीमारियों के बारे में पता लगाकर उसका डेटाबेस तैयार करना है. आदेश में लिखा है, 'अस्पतालों में आने वाले रोगियों का पूरा विवरण पंजीकृत नहीं किया जा रहा है. एसएमएस अस्पताल ने अब प्री-ओपीडी फॉर्म भरने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, मरीजों को रजिस्ट्रेशन से पहले इस फॉर्म में सभी विवरणों को भरना जरूरी है.'