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मरीज करते रह जाते हैं इंतजार और एक्सपायर हो जाता है ब्लड बैंक में रखा खून!

एक साल में करीब 7 लाख लीटर खून बर्बाद हुआ. इसमें ब्लड बैंकिंग सिस्टम की गंभीर खामिया उजागर हुई हैं. ब्लड बैंक और अस्पतालों के बीच सामंजस्य और समन्वय का इतना आभाव होता है की ब्लड होते हुए भी जरुरतमंदो तक नहीं पहुंच पाता.

मरीज करते रह जाते हैं इंतजार और एक्सपायर हो जाता है ब्लड बैंक में रखा खून!

कोटा/ हिमांशु मित्तल: देशभर में अक्सर ही ऐसा कई बार सामने आया है जब खून की व्यवस्था वक्त रहते न हो पाने के कारण लोगों को अपनी जान खोनी पड़ती हैं. हालांकि, देश के कई इलाकों में लगातार ब्लड डोनेशन कैंप भी लगते रहते हैं लेकिन इसके बाद भी लोगों को वक्त पर खून नहीं मिल पाता. इसी कड़ी में हाल ही मे एक आरटीआई में खुलासा हुआ है कि अस्पतालों और ब्लड बैंकों के बीच तालमेल न होने के कारण कई रक्तदाताओं का खून बरबाद हो जाता है.

एक साल में करीब 7 लाख लीटर खून बर्बाद हुआ. इसमें ब्लड बैंकिंग सिस्टम की गंभीर खामिया उजागर हुई हैं. ब्लड बैंक और अस्पतालों के बीच सामंजस्य और समन्वय का इतना आभाव होता है की ब्लड होते हुए भी जरुरतमंदो तक नहीं पहुंच पाता. जब तक अस्पताल में ब्लड की कमी होती है तो उसी समय दूसरे अस्पताल में ब्लड रहता है और वो जरुरतमंद तक नहीं पहुंच कर रखा रहता है और आखिर में एक्सपायर हो जाता है. 

ऐसा ही एक मामला महावीर का. इनके घर में बेटी का जन्म हुआ है. इनकी पत्नी को ब्लड की जरुरत थी. पत्नी कोटा के ही न्यू मेडिकल कॉलेज में भर्ती थी. सुबह 10 बजे डॉक्टर ने ब्लड के लिए लिखा और कहा जल्द से जल्द ले आओ महावीर अपने दोस्त और परिजनों के साथ ब्लड के इंतजाम की जुगत में लग गए और पहुंचे कोटा एमबीएस के सरकारी ब्लड बैंक. आने के बाद करीब 3 घंटे से तक इंतजार करते रहे लेकिन ब्लड नहीं मिला. 

महावीर तो एक उदहारण है लेकिन हर रोज महावीर जैसे सेंकड़ो-हजारों मरीज खून के लिए परेशान होते हैं. ब्लड मिलता है लेकिन कई घंटो के इन्तजार और बड़ी परेशानी के बाद जो कई बार मरीज के लिए जानलेवा बनता है. मरीज की जान चली जाती है और ब्लड समय रहते नहीं पहुंच पाता और ऐसा भी नहीं की ब्लड स्टॉक नहीं ब्लड होते हुए भी ये हालात होते हैं.