बिजली लाइन में फंसने से तड़पता रहा राष्ट्रीय पक्षी मोर, विभाग की लापरवाही से हुई मौत

प्रदेश की बिजली कंपनियों का शिकायत तंत्र बेहद लचर है. पॉवर कट की शिकायतों पर समय पर नहीं चेतने वाला विभाग अब हादसों को लेकर भी गंभीर नहीं है.

बिजली लाइन में फंसने से तड़पता रहा राष्ट्रीय पक्षी मोर, विभाग की लापरवाही से हुई मौत
जानवरों की मौतों का आंकड़ा सालाना आंकड़ा पांच हजार के पार पहुंच गया है.

जयपुर: डिस्कॉम (DISCOM) का शिकायत तंत्र आंकड़ों में प्रभावी हैं लेकिन जमीनी स्तर पर वाकया अलग है. हादसे होते हैं लेकिन न तो फीडर इंचार्ज और न ही बिजली के शीर्ष तंत्र सक्रिय होता है. भरतपुर जिले के कुम्हेर में धनवाड़ा गांव में राष्ट्रीय पक्षी मोर के बिजली लाइन के चिपकने की सूचना देने के बावजूद घंटों तक कोई भी कार्मिक मौके पर नहीं पहुंचा.

कई शिकायतों के बाद भी लाइन में पॉवर कट नहीं होने पर राष्ट्रीय पक्षी की मौत हो गई. घटना के बाद ग्रामीणों में आक्रोश हैं और विभाग के अधिकारी खामोश हैं.

जानवरों की सुरक्षा को लेकर नहीं हैं गंभीर
प्रदेश की बिजली कंपनियों का शिकायत तंत्र बेहद लचर है. पॉवर कट की शिकायतों पर समय पर नहीं चेतने वाला विभाग अब हादसों को लेकर भी गंभीर नहीं है. बात इंसान की जान की हो या जानवरों के चपेट में आने की हादसों का ग्राफ निरंतर बढ़ता जा रहा है. हादसों में कमी लाने की विद्युत विनियामक आयोग की पहल दम तोड़ रही है. 

ऐसा ही एक हादसा भरतपुर में हुआ. गांव धनवाड़ा में राष्ट्रीय पक्षी मोर के ट्रांसफॉर्मर के ऊपर खुले तारों की चपेट में आने की सूचना ग्रामीणों ने बिजली विभाग के स्थानीय अधिकारियों से लेकर जयपुर में बैठे ऑफिसर्स को दी, लेकिन सिवाय आश्वासन के कुछ भी नहीं मिला. शिकायतकर्ता ग्रामीण नितिन ने डिस्कॉम के सभी माध्यमों पर शिकायत की लेकिन हादसे के चार घंटे तक कार्मिक वहां हीं पहुंचे. जी मीडिया के संज्ञान लेने के बाद अधिकारियों का दस्ता वहां पहुंचा.

बढ़ रहे हैं हादसे
प्रदेश की बिजली कंपनियों से हुए जानवरों के हादसों की बात करें तो मरने वाले जानवरों में बंदर, मोर, कबूतर, भैंस, गाय, कुत्तें सबसे अधिक हैं. जानवरों की मौतों का आंकड़ा सालाना आंकड़ा पांच हजार के पार पहुंच गया है. करीब सात हजार जानवर बिजली जनित हादसों से घायल होते हैं. अधिकतर शिकायतें सरकारी आंकड़ों में भी दर्ज नहीं होतीं. वहीं हादसों से बिजली कर्मी और आम नागरिकों की मौत और घायलों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है.

बस सुनवाई का दावा 
विभाग के अधिकारियों का ऐसा सुस्त रवैया कीमती जिंदगी पर भारी पड़ रहा है. प्रत्येक शिकायत पर प्रभावी सुनवाई का दावा विद्युत विभाग के अधिकारी करते हैं, लेकिन इस घटना ने उनके सभी दावों की पोल खोलकर रख दी.