जयपुर: लाईब्रेरीमैन के नाम से मशहूर IAS का मनाया गया बर्थडे, गिफ्ट में दी गई पुस्तकें

आईएएस अधिकारी पीसी किशन, जो अभी नरेगा में आयुक्त हैं. 2013 से 2016 तक वो हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर में कलेक्टर रहे थे.

जयपुर: लाईब्रेरीमैन के नाम से मशहूर IAS का मनाया गया बर्थडे, गिफ्ट में दी गई पुस्तकें

भरत राज/जयपुर: किसी राजनेता, सांसद, विधायक, मंत्री का जन्मदिन हो तो कार्यकर्ताओं की ओर से अनेक आयोजन किए जाते हैं. पोस्टर लगाए जाते हैं. फल वितरित, ब्लड डोनेशन किया जाता है. वहीं, अधिकारी के जन्मदिन को लोग मनाएं तो यह समझा जाना जाहिए कि, उन्होंने क्षेत्र में रहकर जनमानस की भावना के अनुरूप काम किया है. हाल ही में आईएएस अधिकारी पीसी किशन का जन्मदिन था. जिसको हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर में स्थानीय लोगों ने मनाया.

IAS ने गांव में खुलवाई थी लाईब्रेरियां
वैसे तो कहावत है कि, अधिकारी आते और जाते रहते हैं, लेकिन पोस्टिंग के दौरान अधिकारियों की ओर से किए जाने वाले काम के कारण बाद में भी लोग उन्हें याद रखते हैं. ऐसे ही अधिकारी पीसी किशन, जो अभी नरेगा में आयुक्त हैं. 2013 से 2016 तक वो हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर में कलेक्टर रहे थे.

इस दौरान उन्होंने स्थानीय बच्चों को पढ़ने के लिए मोटिवेट किया. स्थानीय लोगों को शिक्षा की महत्वता के बारे में बताकर, उन्हें मोटिवेट करके पुस्तकालय भवन गांव में खोलने का आग्रह किया. धीरे-धीरे उनके समझाने से यह अभियान चल पड़ा और हनुमानगढ़ में 39 और श्रीगंगानगर में उस दौरान 20 लाइब्रेरी खुलवाई. जिसमें पुस्तकें रखवाई गई.

उन्हें बाद में वहां लाईब्रेरीमैन के नाम से जाना जाने लगा. हाल ही, में श्रीगंगानगर की कालियां लाइब्रेरी में बच्चों और गांव वालों ने पीसी किशन का जन्मदिन मनाया. उनके जन्मदिन पर भामाशाहों ने लाइब्रेरी में पुस्तकें भेंट की.

5 तरह की रखी जाती थीं पुस्तकें
गांव में खुलने वाली लाईब्रेरी में 5 तरह की पुस्तकें होती थी. जिसमें बच्चों के लिए कहानियां, बुजुर्गों के लिए धार्मिक पुस्तकें रखी जाती थीं. प्रतियोगियों के लिए प्रतियोगिता से जुड़ी पुस्तकें और इसके साथ ही गृहणियों के लिए पुस्तकें रखी जाती है. इससे गांव में पढ़ाई का महत्व समझ में आने लगा. जहां जहां भी पुस्तकालय खोले गए उन गांवों में शिक्षा के स्तर में सुधार हुआ.

वहीं, पुस्तकालय का नाम भी महापुरुषों और वैज्ञानिकों के नाम पर रखा जाता है. आईएएस पीसी किशन कहते हैं कि, जन्मदिन मनाना बड़ा ईश्यू नहीं है. लोगों के लिए सार्थक पहल की है. जनमानस इससे जुड़ा और उन्होंने शिक्षा का महत्व समझा यह बड़ी और अच्छी बात है. अन्य गांवों में भी लोगों को इसके लिए आगे आना चाहिए.