45 दिनों से अंधेरे में रहने को मजबूर एक तरफ के लोग, बदले के लिए दूसरों का रास्ता रोका

विवाद के कारण दो ढाणियों के करीब 18 परिवार डेढ़ महीने से बिना पानी, बिजली और रास्ते के जीने को मजबूर हैं.

45 दिनों से अंधेरे में रहने को मजबूर एक तरफ के लोग, बदले के लिए दूसरों का रास्ता रोका
विराटनगर तहसील की कालरा की ढाणी के बच्चे दिसंबर महीने से ही मोमबत्ती की रोशनी में पढ़ने को मजबूर हैं.

अमित यादव, विराटनगर/जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर के विराटनगर विधानसभा क्षेत्र के आंतेला गांव के पास दो ढाणियों के बीच एक विवाद गहरा हुआ है. इस विवाद के कारण दोनों ढाणियों के करीब 18 परिवार डेढ़ महीने से बिना पानी, बिजली और रास्ते के जीने को मजबूर हैं. एक ढाणी वालों ने दूसरे की बिजली काट दी तो दूसरी ढाणी वालों का आरोप है कि उनका रास्ता ही बंद कर दिया गया है. इस सारे घटनाक्रम की जानकारी प्रसाशन पुलिस और जनप्रतिनधियों को है, लेकिन बावजूद इसके इन परिवारों को इंसाफ नहीं मिला है. 

विराटनगर तहसील की कालरा की ढाणी के बच्चे दिसंबर महीने से ही मोमबत्ती की रोशनी में पढ़ने को मजबूर हैं. बोर्ड परिक्षाएं सिर पर हैं, लेकिन बच्चें पढ़ें तो पढ़ें कैसे. क्योंकि बिजली तो है ही नहीं. यहां की महिलाएं रोजाना डेढ़-दो किलोमीटर दूर से पानी लाने को मजबूर हैं. 

दरअसल यहां आगे पीछे दो ढाणियां हैं. सड़क किनारे कालरा की ढाणी है, लेकिन इनके यहां बिजली पीछे वाली भोगल की ढाणी की तरफ से आ रही है. अगर कालरा वालों की मानें तो भोगल वालों ने जबरन उनकी बिजली सप्लाई काट दी है. जबकि भोगल वालों का कहना है कि कालरा वालों से उनका रास्ता देने का समझौता था, लेकिन अब वे रास्ता देने से इनकार कर रहे हैं. 

भोगल वालों के लिए घर तक पहुंचने का कोई और जरिया नहीं है इसलिए उन्होंने मजबूर होकर कालरा वालों की बिजली काट दी. इनका कहना है कि कालरा की ढाणी वाले रास्ते से ही उनके यहां पानी के टैंकर आ सकते हैं. अब रास्ता बंद कर देने की वजह से वे पीने के पानी से भी महरूम हैं.

पानी, बिजली और रास्ते का हक नागरिकों के मूल अधिकारों में शामिल हैं. किसी की जबरन बिजली काट देना या जबरन रास्ता रोक देना, दोनों ही कानूनी रूप से गलत हैं, लेकिन हैरानी की बात ये है कि डेढ़ महीने से नागरिकों को मूलाधिकारों से वंचित किया जा रहा है, शिकायतें दी जा रही हैं. इसके बावजूद प्रशासन उसी दिन पहुंच पाता है जब इस खबर को कवर करने मीडिया पहुंचा तो प्रसाशन के अधिकारियों को पहले भनक लग गई और पहले से ही वहां तसिलदार व पटवारी मौके पर मौजूद मिले.

कालरा की ढाणी वालों ने शिकायतों के बावजूद बिजली न जोड़े जाने की वजह अधिकारियों पर राजनीतिक दबाव का आरोप लगाया है. प्रशासनिक अनदेखी पर लोगों ने जयपुर जाकर कलेक्टर को भी ज्ञापन दिया है.