जयपुर: 3 अरब की ड्रिलिंग मशीनों से मुंह मोड़ रहा PHED! 1 साल से चल रहा खेल

हैंडपंप और ट्यूबवेल खोदने वाली ड्रिलिंग मशीनों पर दाग लगते जा रहे हैं. एक साल से ना ही सरकारी मशीनों का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है.

जयपुर: 3 अरब की ड्रिलिंग मशीनों से मुंह मोड़ रहा PHED! 1 साल से चल रहा खेल
3 अरब की ड्रिलिंग मशीनों से मुंह मोड़ रहा PHED!. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

आशीष चौहान/जयपुर: राजस्थान में पीएचईडी विभाग सरकारी संसाधनों की जमकर बर्बादी कर रहा है. करोडों की ड्रिलिंग मशीनों से मुंह मोड़कर पीएचईडी ठेकेदारों को जमकर मुनाफा पहुंचा रहा है. जलदाय विभाग में ड्रिलिंग के नाम पर ये खेल पिछले एक साल से चल रहा है.

हैंडपंप और ट्यूबवेल खोदने वाली ड्रिलिंग मशीनों पर दाग लगते जा रहे हैं. एक साल से ना ही सरकारी मशीनों का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है. जिस कारण करोड़ों की मशीने जंग फाक रही है. लेकिन इन मशीनों पर जंग जगने से जलदाय विभाग के इंजीनियर्स के राज जरूर खुल रहे हैं. निजी ठेकेदारों को मुनाफा पहुंचाने के लिए पीएचईडी ने सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल करना ही बंद कर दिया. जिस कारण ये सरकारी खजाना कबाड़ बन चुका है.

राजस्थान में पीएचईडी विभाग के पास 37 बोरिंग और हैडपंप की मशीने हैं. इसके अलावा भूजल विभाग के अधीन 25 मशीनें जंग फाक रही है. एक महीने की लागत कम से कम 5 करोड़ रुपए है. इस हिसाब से 62 मशीनों की कीमत करीब 3 अरब 10 करोड़ रुपए होती है. यानि अरबों रुपए की सरकारी संपत्ति होने के बावजूद भी वहीं काम पीएचईडी विभाग निजी ठेकेदारों से करवा रहा है, जो काम सरकारी कर्मचारी कर सकते है.

सरकारी कर्मचारी काम ना होने से परेशान हैं. इसलिए खुद पीएचईडी मंत्री बीडी कल्ला, प्रमुख सचिव को कई बार पत्र लिखकर डिलिंग मशीने शुरू करने की डिमांड कर चुके हैं. ड्रिलिंग शाखा में कर्मचारियों के पास काम नहीं होने पर उनकी ड्यूटी या तो चुनावों में लगा दी जाती है या फिर ड्रिलिंग मशीनों की देखरेख में.