अजमेर के दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के पहाड़गंज स्थित पीपल के पेड़ पर पीले पैर वाला हरे रंग का कबूतर यानी हरियल पक्षी दिखाई दिए गए हैं. हरियाल पक्षी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. यह महाराष्ट्र का राज्य पक्षी है, लेकिन विभिन्न राज्यों के घने जंगलों में इसे देखा जा सकता है.
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Ajmer mae dekha hara pila Kabootar
राजस्थान के जंगलों में इसकी अच्छी खासी तादात है लेकिन जंगलों से बाहर हरियल पक्षी सिर्फ उस समय बाहर आते हैं, जब वह बढ़ और पीपल के पेड़ों में फ्रुटिंग होती है. लाल रंग का यह फ्रूट फिग फैमिली का है और हरियल का सबसे पसंदीदा फ्रूट है.
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बर्ड विशेषज्ञ डॉक्टर आबिद खान ने कहा कि हरियल के बड़ी संख्या में दिखाई देना पर्यावरण के शुभ संकेत है. डॉ. आबिद खान ने बताया कि हरियल प्रवासी पक्षी है. अधिकतर इनका सर्दियों में ही प्रवास होता है. नहीं तो इनकी संख्या काफी कम दिखाई देती है. यह महाराष्ट्र का राज्य पक्षी है. वहां पर इसकी संख्या कम होने से इसे संरक्षण दिया गया.
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खान ने बताया कि यह सामान्य कबूतर से काफी अलग है. यह झुंड में ही रहना पसंद करते हैं बाकी कबूतर दाना खाते हैं. यह पूरी तरीके से प्रकृति पर निर्भर है. यह सिर्फ बढ़ और पीपल के पेड़ों पर ही दिखाई देंगे. उन पेड़ों के फ्रूट को ही यह खाते दिखाई देते हैं. इन्हीं पर यह अपना आवास बनाते हैं. यह उन्हें पेड़ों की पत्तियां से अपने आप को छुपाते हैं, जिसे देखने भी मुश्किल होता है.
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इन पक्षियों को शांत जगह पसंद है. इन्हें ढूंढना काफी मुश्किल है. दक्षिण एशिया में यह पक्षी आराम से दिखाई देते हैं. हरियल का आसानी से शिकार हो सकता है. रेप्टर्स इन्हीं को अधिकतर शिकार बनाते हैं. यह काफी सीधा पक्षी है. चाल को भी समझ नहीं पाते हैं.
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खान ने बताया कि हरियल बहुत ज्यादा शांत और संवेदनशील पक्षी है. तेज आवाज से काफी डरते हैं. इन्हें काफी शांत जगह ही पसंद है. डॉ. आबिद खान ने बताया कि हरियल शुद्ध शाकाहारी पक्षी है. यह हमेशा समूह में उड़ान भरते हैं. सुबह के समय इन्हें पेड़ों की सबसे ऊंची शाखा पर बैठे देखा जा सकता है. दूसरे कबूतरों की तरह हरियल या हरा कबूतर भी अपनी गर्दन को फुला लेता है.
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हरियल अपनी मादा को रिझाने के लिए पेड़ पर ही डांस करता है. हरियल झुंड में यात्रा करते हैं और इसे बढ़ यह पीपल के पेड़ पर बैठते हैं, जहां बड़ी तादाद में फ्रुटिंग हुई हो. डॉ आबिद खान ने कहा कि हरियल पक्षी बसेरे के लिए ऐसा पेड़ और स्थान चुनते हैं, जहां लंबे समय का खाना पानी की व्यवस्था हो जाए. इन्हें सरोवर के पास वाले पीपल और बढ़ के पेड़ों पर अधिक संख्या में देखा जा सकता है या फिर ऐसे स्थान जहां लोगों द्वारा पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था की जाती है और आसपास घने वृक्ष होते हैं.