All India Kinnar Mahasammelan: नागौर जिला मुख्यालय पर इन दिनों किन्नर समाज का रंग और रौनक देखने लायक है. शहर में चल रहे अखिल भारतीय किन्नर महासम्मेलन में देशभर से आए किन्नर समाज के गद्दीपति और सदस्य एक साथ जुटे हैं. सम्मेलन के तहत शुक्रवार देर रात आयोजित हुए सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने पूरे शहर का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. राजस्थान की परंपरागत वेशभूषा में सजे किन्नर कलाकारों ने मंच पर शानदार प्रस्तुतियां दीं.
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dance of Kinnars in Nagaur
All India Kinnar Mahasammelan: अखिल भारतीय किन्नर महासम्मेलन में राजस्थानी लोक संगीत, लोकनृत्य और फिल्मी गीतों पर हुए डांस कार्यक्रमों में किन्नरों ने अपनी अदाओं और ताल पर ऐसा रंग जमाया कि देर रात तक माहौल तालियों की गूंज से भर गया. नागौर के विभिन्न इलाकों से बड़ी संख्या में लोग इस कार्यक्रम को देखने पहुंचे.
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कार्यक्रम स्थल पर शहरवासियों का भारी हुजूम उमड़ पड़ा और सभी ने उत्साह के साथ किन्नर समाज की कला और संस्कृति का आनंद लिया. कार्यक्रम के आयोजनकर्ता किन्नर समाज नागौर की गद्दीपति रागिनी बाई और सलोनी बाई (अजमेर) ने बताया कि यह महासम्मेलन पूरे भारत से आए किन्नर समाज के गद्दीपतियों और प्रमुख प्रतिनिधियों की उपस्थिति में आयोजित किया जा रहा है. रागिनी बाई ने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज में किन्नर समुदाय के अधिकारों और सम्मान को लेकर चर्चा करना भी है.
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महासम्मेलन के दौरान आयोजित बैठकों में किन्नर समाज के प्रतिनिधियों ने अपने सामाजिक अधिकारों, सरकारी योजनाओं में भागीदारी और समाज में “एक समान सम्मान और जाजम पर बैठने” के मुद्दे पर गंभीर चर्चा की. उनका कहना था कि समाज में आज भी कई स्तरों पर भेदभाव मौजूद है, जिसे समाप्त करने के लिए इस तरह के आयोजनों के माध्यम से एकता और जागरूकता फैलाना आवश्यक है.
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आयोजकों ने बताया कि सम्मेलन के दूसरे दिन, यानी शनिवार को एक भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी. यह शोभायात्रा नागौर शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरेगी, जिसमें देशभर से आए किन्नर गद्दीपति पारंपरिक परिधानों में शामिल होंगे. शोभायात्रा के दौरान ढोल-नगाड़ों, बैंड-बाजों और नाच-गानों के साथ माहौल पूरी तरह उत्सवमय रहेगा.
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कार्यक्रम का विशेष आकर्षण होगा नगर सेठ बंशीवाले मंदिर में 16 तोले सोने का छत्र चढ़ाने की परंपरा. आयोजन समिति के अनुसार, यह छत्र भगवान को अर्पित किया जाएगा जो किन्नर समाज की आस्था और एकता का प्रतीक है. रागिनी बाई ने बताया कि नागौर में पहली बार इस पैमाने पर अखिल भारतीय स्तर का सम्मेलन हो रहा है, जिसमें दिल्ली, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, गुजरात, हरियाणा और दक्षिण भारत के राज्यों से किन्नर गद्दीपति शामिल हुए हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में सकारात्मक संदेश जाता है कि किन्नर समुदाय भी देश की संस्कृति, कला और अध्यात्म से गहराई से जुड़ा है.
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कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. नगर परिषद और पुलिस प्रशासन की ओर से शोभायात्रा के रूट पर विशेष निगरानी रखी जाएगी. नागौर में जारी यह महासम्मेलन सिर्फ एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि यह एक ऐसा मंच बन गया है जहाँ किन्नर समाज अपनी पहचान, सम्मान और समानता के अधिकार की बात पूरे आत्मविश्वास से कर रहा है. लोगों का कहना है कि यह आयोजन न केवल समाज की सोच में बदलाव लाएगा, बल्कि नागौर को किन्नर समाज की एकता और परंपरा का प्रतीक बनाने में भी अहम भूमिका निभाएगा.