तेजी से बढ़ते मोटापे की समस्या के समाधान की दिशा में एक अहम पहल करते हुए राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर ने 10वें आयुर्वेद दिवस के उपलक्ष्य में 'पंचकर्म लेखन बस्ती शिविर' की शुरुआत की है. मोटापे से जूझ रहे व्यक्तियों का आयुर्वेदिक पंचकर्म पद्धति के माध्यम से इलाज किया जाएगा.
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आधुनिक जीवनशैली, असंतुलित खानपान और शारीरिक सक्रियता की कमी के चलते भारत में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है. एक हालिया सर्वे के अनुसार, लगभग 10% महिलाएं और 5.4% पुरुष मोटापे से ग्रसित हैं.
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मोटापा केवल एक सौंदर्य संबंधित समस्या नहीं, बल्कि यह उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हृदय रोग, महिलाओं में पीसीओडी, हाइपरथायरॉयडिज्म, गठिया और बांझपन जैसी बीमारियों की जड़ बन चुका है.
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शिविर का उद्घाटन करते हुए राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के कुलपति प्रो. संजीव शर्मा ने बताया कि 'लेखन बस्ती' पंचकर्म चिकित्सा की एक विशेष विधि है, जो शरीर में जमे हुए विकारों को बाहर निकालती है, पाचन शक्ति को बढ़ाती है और शरीर को संतुलित व हल्का बनाती है. इसे खास तौर पर वात विकारों एवं स्थौल्य (मोटापे) के लिए अत्यंत प्रभावी माना जाता है.
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पंचकर्म विभागाध्यक्ष डॉ. गोपेश मंगल ने जानकारी दी कि लेखन बस्ती द्वारा वजन में कमी, पाचन व चयापचय में सुधार, कोलेस्ट्रॉल व ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में सकारात्मक परिणाम मिलते हैं. उन्होंने शिविर की जानकारी देते हुए बताया कि जयपुर के जोरावर सिंह गेट स्थित राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के पंचकर्म विभाग में लगाए गए इस विशेष शिविर में 500 लोगों का नि:शुल्क इलाज होगा.
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शिविर में व्यक्ति को प्रतिदिन 16 दिनों तक बस्ती चिकित्सा के लिए आना होगा, इसमें प्रत्येक प्रतिभागी का BMI (बॉडी मास इंडेक्स) के आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा और चिकित्सकों के मार्गदर्शन में चिकित्सा दी जाएगी. चिकित्सा प्रक्रिया में स्थानीय अभ्यंग यानी और स्वेदन के बाद 16 दिनों की बस्ती प्रक्रिया शामिल है. शिविर के दौरान, प्रतिभागियों की निरंतर निगरानी की जाएगी और आवश्यकतानुसार जांच भी की जाएगी.
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राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान ने लोगों से अपील की है कि वे इस नि:शुल्क शिविर का लाभ उठाएं और मोटापे जैसी जटिल समस्या के समाधान के लिए आयुर्वेद को अपनाएं. यह शिविर न केवल आयुर्वेद चिकित्सा का माध्यम है, बल्कि 'स्थौल्य मुक्त भारत' की दिशा में एक सशक्त कदम भी है.