Mehandipur Balaji Temple: आज, 10 जून 2025 को ज्येष्ठ मास का अंतिम बड़ा मंगलवार (Bada Mangal) है. ऐसे में यदि आप मेहंदीपुर बालाजी के दर्शन करने जा रहे हैं तो ये प्रसाद जरूर ले जाएं.
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रहस्यमय मेहंदीपुर बालाजी मंदिर का महत्व
राजस्थान के दौसा में स्थित मेहंदीपुर बालाजी मंदिर को रहस्यमयी शक्तियों और चमत्कारिक घटनाओं के लिए जाना जाता है. यहां हनुमान जी को बालाजी, प्रेतराज सरकार और भैरों बाबा के साथ पूजा जाता है.
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ज्येष्ठ मास का अंतिम बड़ा मंगल
10 जून को ज्येष्ठ मास का अंतिम बड़ा मंगलवार है. इस दिन भक्त हनुमान चालीसा, बजरंग बाण और सुंदरकांड का पाठ करते हैं, ताकि बजरंगबली का आशीर्वाद प्राप्त हो और जीवन से सभी बाधाएं दूर हों.
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अलग-अलग देवताओं को चढ़ता है अलग भोग
मेहंदीपुर बालाजी मंदिर की पूजा-पद्धति सामान्य मंदिरों से भिन्न है. यहां बालाजी को लड्डू, प्रेतराज को चावल और भैरों बाबा को उड़द का भोग चढ़ाया जाता है.
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दो तरह का प्रसाद
यहां दो तरह के प्रसाद चढ़ाने की परंपरा है-हाजरी और अर्जी. हाजरी में दो बार प्रसाद चढ़ाया जाता है और तुरंत मंदिर से बाहर निकलना होता है. वहीं अर्जी में तीन थालियों में प्रसाद मिलता है, जिसे लौटते समय रास्ते में फेंकना होता है. मान्यता है कि इसे घर ले जाना या खुद खाना वर्जित है.
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क्यों मना है प्रसाद घर ले जाना?
मेहंदीपुर बालाजी में मान्यता है कि यहां आने वाले लोग नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति के लिए आते हैं. ऐसे में मंदिर परिसर में यह ऊर्जा मौजूद होती है. प्रसाद, झंडा या कोई अन्य वस्तु यदि घर ले जाई जाती है, तो यह ऊर्जा साथ जा सकती है.
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प्रसाद खाने का नियम
आमतौर पर मंदिर का प्रसाद खाने को पुण्य का कार्य माना जाता है, लेकिन मेहंदीपुर बालाजी मंदिर इसका अपवाद है. यहां के प्रसाद को खाना भी मना है.
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समर्पण और सावधानी ही हैं सबसे बड़ा उपाय
मेहंदीपुर बालाजी में दर्शन करने वाले भक्तों से अपेक्षा की जाती है कि वे मंदिर की मान्यताओं और नियमों का पूर्ण पालन करें. यहां का हर नियम किसी गहरे आध्यात्मिक उद्देश्य से जुड़ा हुआ है.