Swastidham Mandir: राजस्थान में घूमने के लिए एक से बढ़कर एक पर्यटन स्थल हैं. लेकिन आज हम आपको राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के एक ऐसे अद्भुत मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसकी बनावट देखने पर किसी जहाज जैसी लगती है.
1/8
अद्भुत मंदिर
आज हम आपको राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के एक ऐसे अद्भुत मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसकी बनावट देखने पर किसी जहाज जैसी लगती है, लेकिन अंदर जाकर पता चलता है कि यह एक भव्य जैन मंदिर है. यह मंदिर जहाजपुर कस्बे में स्थित है, और इसका नाम भी वहीं से प्रेरित होकर 'स्वस्तिधाम' रखा गया है.
2/8
स्वस्तिधाम मंदिर
जहाजपुर, जो पहले सिर्फ अपने इतिहास के लिए जाना जाता था, अब पूरे देश में इस अनोखे जिनालय की वजह से पहचान बना चुका है. इस मंदिर की खास बात यह है कि इसकी आकृति एक विशाल जहाज जैसी बनाई गई है. यह न केवल वास्तुकला का शानदार उदाहरण है, बल्कि समाज की आस्था और एकता का प्रतीक भी बन चुका है.
3/8
धरती से निकली थी प्रतिमा
इस आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत 23 अप्रैल 2013, महावीर जयंती के दिन से हुई, जब नगर में भगवान मुनिसुव्रतनाथ की एक प्राचीन प्रतिमा धरती से खुद निकल आई. प्रशासन ने इसे अपने अधीन लिया, लेकिन आर्यिका श्री 105 स्वस्ति भूषण माता जी के प्रयासों से 29 अप्रैल को यह प्रतिमा समाज को सौंप दी गई.
4/8
2016 में शुरू हुआ निर्माण कार्य
इसके बाद मंदिर निर्माण का विचार सामने आया. माता जी की प्रेरणा से तय किया गया कि मंदिर की आकृति एक जहाज के रूप में होनी चाहिए. मंदिर समिति ने जालोर जिले में स्थित एक छोटे से जहाजनुमा जैन मंदिर से प्रेरणा ली, और एक भव्य जिनालय की नींव रखी गई. साल 2016 में निर्माण कार्य शुरू हुआ, और चार वर्षों की मेहनत के बाद 7 फरवरी 2020 को पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के साथ भगवान की प्रतिमा को स्वर्ण वेदिका पर स्थापित किया गया.
5/8
रंग-बिरंगी लाइट
इस मंदिर की एक खास बात यह भी है कि शाम होते ही यह रंग-बिरंगी लाइटों से जगमगाने लगता है, और फव्वारों की छटा इसे और भी खूबसूरत बना देती है. इस मनोरम दृश्य को देखने के लिए रोज़ाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक यहां आते हैं.
6/8
पानी पर तैरता जहाज
पूरे जिनालय का क्षेत्र 150×80 वर्ग फीट में फैला हुआ है. इसका आगे से तिकोना आकार, ऊपर तीन शिखर और छत पर 24 तीर्थंकरों की चौबीसी इसे विशेष बनाते हैं. चारों ओर बने 8×5 फीट के जलकुंड, जिनमें फव्वारे और रंगीन रोशनी की व्यवस्था है, मंदिर को ऐसा रूप देते हैं जैसे यह पानी पर तैरता हुआ कोई जहाज हो.
7/8
2015 में मॉडल हुआ था तैयार
जानकारों के अनुसार, 2014 में भगवान मुनिसुव्रतनाथ की प्रतिमा को एक छोटे मंदिर में विराजित किया गया था. 2015 में जहाजनुमा मंदिर का मॉडल तैयार हुआ और इसके बाद निर्माण कार्य ने तेजी पकड़ ली. माता स्वस्ति भूषण जी के मार्गदर्शन में यह अद्भुत मंदिर कुछ ही वर्षों में आकार ले सका.
8/8
जहाजपुर की पहचान
आज यह स्वस्तिधाम न केवल जहाजपुर की पहचान बन गया है, बल्कि यह एक श्रद्धा और आध्यात्मिकता से भरा तीर्थ स्थल भी है, जहां लोग न केवल भगवान के दर्शन करने आते हैं, बल्कि यह देखने भी आते हैं कि समाज अगर मिलकर कुछ ठान ले, तो वह असंभव को भी संभव बना सकता है.