चित्तौड़गढ़ के राशमी थाना क्षेत्र में गूगल मैप ने एक परिवार को गुमराह कर दिया और रास्ता दिखाते हुए उन्हें टूटी पुलिया तक पहुंचा दिया. मंगलवार देर रात पुलिया पर उतारी गई कार तेज बहाव में बह गई. हादसे में तीन लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि छह साल की मासूम का कोई सुराग नहीं लग सका है.
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रात का अंधेरा...नदी पर टूटी पुलिया… ऊपर से तेज बहाव और अचानक उसमें समाती एक कार. अंदर से मदद के लिए चीखते-चिल्लाते लोग. यह कोई काल्पनिक दृश्य नहीं, बल्कि चित्तौड़गढ़ जिले का दिल दहला देने वाला हादसा है.
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मंगलवार देर रात गूगल मैप ने रास्ता दिखाया और परिवार उसी पर बढ़ चला, लेकिन यह रास्ता सीधे मौत की ओर ले गया. पुलिया से कार पानी में समा गई और देखते ही देखते बहाव में बह निकली.
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इस हादसे में 25 वर्षीय चंदा, 25 वर्षीय ममता और 4 साल की नन्हीं खुशी की मौत हो चुकी है. शव गांव पहुंचे तो चीख-पुकार मच गई. परिवार के घरों में मातम पसरा हुआ है लेकिन सबसे बड़ा दर्द यह है कि छह साल की मासूम रुत्वी अब तक लापता है. परिजन हर आवाज पर चौंक उठते हैं और उम्मीद लगाए बैठे हैं कि शायद उनकी रुत्वी लौट आए.
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तीन दिनों से SDRF और सिविल डिफेंस की टीमें लगातार तलाशी में जुटी है. बोट, सिलेंडर और डीप डाइविंग सहित हर तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है. पानी का बहाव तेज है, गहराई ज्यादा है, लेकिन जवान हार मानने को तैयार नहीं. बुधवार को तेज बहाव ने मुश्किलें बढ़ाई, गुरुवार को पानी कम हुआ तो तीन किलोमीटर तक सर्च किया गया. हर झाड़ी और हर कोना खंगाला गया, लेकिन रुत्वी का कोई सुराग नहीं मिला.
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प्रशासन का कहना है कि पुलिया पर चेतावनी बोर्ड और बैरिकेड लगे हुए थे, लेकिन परिवार ने उन्हें अनदेखा कर दिया. हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंचे और बचाव अभियान शुरू किया. अधिकारियों का दावा है कि शुक्रवार सुबह तलाशी और तेज की जाएगी.
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गांववाले भी लगातार रेस्क्यू टीम के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं. नाव चलाने से लेकर किनारों की तलाश तक ग्रामीण मदद कर रहे हैं लेकिन हादसे के तीन दिन बाद भी नन्हीं रुत्वी का कोई सुराग नहीं. अब हर किसी की निगाहें नदी के बहाव पर टिकी हैं. हादसे ने एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया है-क्या तकनीक पर आंख मूंदकर भरोसा करना इतना खतरनाक हो सकता है कि मासूम जिंदगियां दांव पर लग जाएं?
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गूगल मैप की एक गलती ने तीन जिंदगियां छीन लीं, चौथी अब तक अंधेरे में है. परिवार अब भी आंखें टिकाए बैठा है कि कब रुत्वी की झलक मिलेगी. तीसरे दिन की तलाश भी नाकाम रही और अब शुक्रवार सुबह से फिर नया सर्च ऑपरेशन शुरू हुआ.