Churu News: चूरू जिले के सुजानगढ़ शहर में भारी बारिश के आठ दिन बाद भी हालात सामान्य नहीं हो पाए हैं. एक और दौर की बारिश ने लोगों की मुसीबतें और बढ़ा दी हैं, जिससे आज शहर में स्कूलों की छुट्टी घोषित करनी पड़ी.
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Sujangarh water logging
जिले के सुजानगढ़ में एक सप्ताह पहले ही बरसात के बाद सुजानगढ़ में हालात बिगड़े हुए हैं. 8 दिन पहले आई बारिश का पानी अभी निकला भी नहीं था कि अब फिर बारिश होने से लोग बेहाल हैं. ऐसे में आज सुजानगढ़ में स्कूलों की छुट्टी की भी घोषणा की गई है.
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सुजानगढ़ में भारी बारिश को आठ दिन बीत चुके हैं, लेकिन शहर के नाथो तालाब बास, होली धोरा, दुलिया बास और भौजलाई बास जैसे इलाके आज भी पानी में डूबे हुए हैं. सैंकड़ों परिवारों के घरों में बरसाती पानी न सिर्फ कमरों और रसोई तक पहुंच गया है, बल्कि अब बदबू मारने लगा है, जिससे जनजीवन नारकीय हो चुका है. शहरवासियों की हालत बयां करती है, यह सिर्फ एक बारिश नहीं, बल्कि प्रशासन की अव्यवस्थाओं और नीति विफलताओं की पोल खोल रही हैं. 8 दिनों से घर में पानी जमा होने के चलते अब महामारी फैलने का खतरा भी बढ़ गया है. ऐसे में जिला प्रशासन की ओर से जिले से विशेष चिकित्सा टीमें भी सुजानगढ़ भेजी जा रही हैं.
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सुजानगढ़ में अतिवृष्टि से प्रभावित परिवारों की महिलाओं के आशु रुकने का नाम नहीं ले रहे, पीड़ित महिलाओं ने रोते बिलखते प्रशासन से गुहार लगाई पर इसके बाद भी प्रशासन की संवेदनाशीलता दिखाई नहीं दे रही है. पीड़ित महिलाओं का रोने व बिलखने का वायरल वीडियो देख कर लोगों का दिल पसीज रहा है, जिस पर लोग प्रशासन को कोसते नजर आ रहे हैं. हालात यह हैं कि कई मोहल्लों में दो से तीन फीट तक पानी जमा है. अब तक 40 से अधिक परिवार सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हो चुके हैं, जबकि कई परिवार चाह कर भी घर नहीं छोड़ पा रहे. पानी में डूबे घरों की दीवारें दरक गई हैं, लेकिन मजबूरी में लोग उनमें रहने को विवश हैं.
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स्थानीय प्रशासन के दावे सिर्फ कागजों तक सीमित हैं. पंप आए तो केबल नहीं मिली, केबल आई तो पाइप नहीं मिला. जल निकासी जैसे जरूरी कार्य में सुस्ती का आलम यह रहा कि सालासर से पंप मंगवाने में एक सप्ताह लग गया. जनता में चर्चा है कि उपखंड अधिकारी (एसडीएम) का पूरा ध्यान एफसीआई गोदाम से पानी निकालने में लगा है, जहां सड़ा हुआ अनाज पड़ा है-जबकि बाढ़ में फंसे लोगों की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा.
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सुजानगढ़ ही चूरू जिले का एकमात्र शहर है. जो इस समय बाढ़ जैसे हालात से जूझ रहा है. जिला कलेक्टर की ओर से मॉनिटरिंग की जा रही है. लेकिन स्थानीय प्रशासन की निष्क्रियता के चलते लोगों को राहत नहीं मिल पा रही. शहर के लोग अब कलेक्टर से अपील कर रहे हैं कि वे स्वयं सुजानगढ़ आकर हालात की निगरानी करें, जिससे राहत कार्यों में तेजी आ सके. हालांकि जिला कलक्टर ने सुजानगढ़ का दौरा कर अधिकारियों को दिशा निर्देश भी दिया है और मामले की मॉनिटरिंग भी कर रहे हैं.
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प्रभावित इलाकों में हालात इतने खराब हैं कि कई घरों में खाना-पीना तक समाप्त हो गया है. बिस्तर और कपड़े भीग चुके हैं. महिलाओं और बुजुर्गों ने आरोप लगाया है कि स्थानीय प्रशासन ने अब तक कोई पूछताछ तक नहीं की. यह एक प्रकार से अनकहा लॉकडाउन है, जिसमें लोग अपने ही घरों में बंद हैं, बिना किसी सहायता के.
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यह आपदा न केवल मौसम की मार है, बल्कि सुजानगढ़ प्रशासन की लापरवाही और असंवेदनशीलता की एक जीती-जागती मिसाल बन गई है. अब जनता की आखिरी उम्मीद जिला प्रशासन पर टिकी है. क्या प्रशासन उन्हें बरसाती कैद से आजादी दिला पाएगा, या फिर यह इंतजार और लंबा होगा-यह आने वाला समय बताएगा. चूरू सांसद राहुल कस्बा एवं विधायक मनोज मेघवाल जब जनता के बीच पहुंचे तो उन्हें आक्रोश का सामना भी करना पड़ा, पीड़ित परिवारों में उनका घेराव कर खरी खोटी सुनाई.