/Explainer: क्या किसी राज्य का सांसद दूसरे राज्य में खर्च कर सकता है सांसद निधि? आखिर क्यों राजस्थान छोड़, हरियाणा पर प्यार लुटा रहे कांग्रेस के MP...!
Explainer: क्या किसी राज्य का सांसद दूसरे राज्य में खर्च कर सकता है सांसद निधि? आखिर क्यों राजस्थान छोड़, हरियाणा पर प्यार लुटा रहे कांग्रेस के MP...!
Explainer on MPLADS Guidelines: राजस्थान की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है. बीजेपी ने तीन कांग्रेस लोकसभा सांसदों - भरतपुर से संजना जाटव, चूरू से राहुल कस्वां और झुंझुनूं से बृजेंद्र सिंह ओला - पर गंभीर आरोप लगाया है कि उन्होंने अपनी सांसद निधि (MPLADS) का बड़ा हिस्सा हरियाणा के कैथल क्षेत्र में खर्च कर दिया.
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राजस्थान की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है. बीजेपी ने तीन कांग्रेस लोकसभा सांसदों पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि उन्होंने अपनी सांसद निधि (MPLADS) का बड़ा हिस्सा हरियाणा के कैथल विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए खर्च कर दिया. ये सांसद हैं - भरतपुर से संजना जाटव, चूरू से राहुल कस्वां और झुंझुनूं से बृजेंद्र सिंह ओला. आरोप के अनुसार, संजना जाटव ने 45 लाख 55 हजार रुपये, राहुल कस्वां ने 50 लाख रुपये और बृजेंद्र सिंह ओला ने 24 लाख 71 हजार रुपये कैथल क्षेत्र में खर्च करने की सिफारिश की. कुल मिलाकर करीब 1.20 करोड़ रुपये हरियाणा में गए. बीजेपी का दावा है कि यह पैसा कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला के बेटे आदित्य सुरजेवाला के विधानसभा क्षेत्र में खर्च किया गया, ताकि इन सांसदों का राजनीतिक भविष्य सुरक्षित हो.
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बीजेपी का हमला और राजनीतिक कोण
राजस्थान के गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सांसद राजस्थान के करदाताओं के पैसे का दुरुपयोग कर हरियाणा में राजनीतिक लाभ ले रहे हैं. बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने भी इसे "वंशवाद और लूट" करार दिया. उनका कहना है कि पिछले 3-4 महीनों में ही यह खर्च हुआ, जबकि सांसदों के अपने इलाकों में विकास ठप पड़ा है.
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कांग्रेस का पक्ष क्या?
कांग्रेस ने अभी तक इस आरोप पर आधिकारिक जवाब नहीं दिया है, लेकिन नियमों की व्याख्या करते हुए कहा जा सकता है कि 25 लाख की सीमा का पालन न करने पर सिफारिश रद्द हो सकती है. यह मामला MPLADS की पारदर्शिता और दुरुपयोग पर नई बहस छेड़ रहा है. जांच की मांग उठ रही है कि क्या यह राजनीतिक लाभ के लिए नियमों की अनदेखी है? यह विवाद राजस्थान-हरियाणा की अंतर-राज्य राजनीति को भी उजागर करता है.
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MPLADS की गाइडलाइंस क्या कहती हैं?
MPLADS योजना के तहत हर सांसद को सालाना 5 करोड़ रुपये मिलते हैं, जो मुख्य रूप से उनके अपने संसदीय क्षेत्र में विकास कार्यों (सड़क, स्कूल, अस्पताल, पेयजल आदि) के लिए खर्च किए जाते हैं. हालांकि, नियमों में एक विशेष प्रावधान है - लोकसभा सांसद साल में अधिकतम 25 लाख रुपये तक अपने क्षेत्र या राज्य के बाहर कहीं भी विकास कार्यों की सिफारिश कर सकते हैं. यह प्रावधान राष्ट्रीय एकता और सद्भाव बढ़ाने के लिए है. इस मामले में, संजना जाटव और राहुल कस्वां ने 25 लाख से ज्यादा (क्रमशः 45.55 लाख और 50 लाख) खर्च किए, जो गाइडलाइंस के खिलाफ है. बृजेंद्र ओला का 24.71 लाख ठीक सीमा में है. बीजेपी का कहना है कि यह नियमों का उल्लंघन है और सांसदों के अपने क्षेत्रों (भरतपुर, चूरू, झुंझुनूं) में कई विकास कार्य अधूरे पड़े हैं.
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1-सासंद निधि में किसका पैसा है?
सांसद निधि (MPLADS) का पैसा भारत सरकार का होता है. यह करदाताओं के टैक्स से आने वाला सरकारी फंड है, जो पूरी तरह केंद्र सरकार द्वारा फंडेड सेंट्रल सेक्टर स्कीम है. यह पैसा Consolidated Fund of India से आता है और सांसदों के व्यक्तिगत फंड से नहीं जुड़ा होता.
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2- किसी राज्य के कितनी सासंद निधि मिलती है?
राज्य को सीधे निधि नहीं मिलती, बल्कि हर सांसद को व्यक्तिगत रूप से सालाना 5 करोड़ रुपये मिलते हैं. राज्य में जितने ज्यादा लोकसभा सांसद (और राज्यसभा सांसद) होंगे, उतनी ज्यादा कुल निधि राज्य के जिलों में खर्च होगी. राजस्थान में लोकसभा की 25 सीटें हैं, इसलिए लोकसभा सांसदों से सालाना करीब 125 करोड़ रुपये की निधि आती है (प्लस राज्यसभा के 10 सांसदों की निधि).
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3-बजट में सांसद निधि कैसे जनरेट होती है?
यह पैसा केंद्र सरकार के यूनियन बजट में अलग से आवंटित किया जाता है. वित्त मंत्रालय हर साल MPLADS के लिए कुल राशि तय करता है (लगभग 3940 करोड़ रुपये पूरे देश के लिए). यह राशि Ministry of Statistics and Programme Implementation (MoSPI) के जरिए जिलों को रिलीज की जाती है. बजट में यह "Central Sector Scheme" के तहत आता है और टैक्स कलेक्शन से फंड होता है.
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4. जिस राज्य में जितनी ज्यादा लोकसभा सीटें, उतनी ज्यादा निधि?
लोकसभा सांसदों की निधि मुख्य रूप से उनके अपने निर्वाचन क्षेत्र (constituency) में खर्च होती है, जो राज्य में ही होता है. इसलिए ज्यादा सीटों वाले राज्य (जैसे उत्तर प्रदेश 80 सीटें) को ज्यादा कुल MPLADS फंड मिलता है. राजस्थान की 25 लोकसभा सीटों से राज्य को सालाना करीब 125 करोड़ रुपये (केवल लोकसभा सांसदों से) मिलते हैं. राज्यसभा सांसद अपनी निधि राज्य के किसी भी जिले में खर्च कर सकते हैं.
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5. सांसद निधि कैसे खर्च करता है?
सांसद निधि (MPLADS) का खर्च सांसद सीधे नहीं करते, बल्कि वे केवल विकास कार्यों की सिफारिश करते हैं. जैसे – अपने क्षेत्र में सड़क बनवाना, स्कूल या अस्पताल की बिल्डिंग, पानी की टंकी, शौचालय, पार्क या अन्य छोटे-बड़े स्थानीय विकास कार्य.यह सिफारिश सांसद जिला कलेक्टर (District Collector) को भेजते हैं. कलेक्टर प्रस्ताव की जांच करता है, नियमों के अनुसार मंजूरी देता है, फंड सैंक्शन करता है और काम शुरू करवाता है. काम करवाने की जिम्मेदारी सरकारी एजेंसियों या लोकल बॉडी (जैसे पंचायत, नगर पालिका) की होती है.
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कलेक्टर ही पूरे प्रोजेक्ट की निगरानी, मॉनिटरिंग और ऑडिट करता है. नियम के अनुसार, वह कम से कम 10 प्रतिशत कार्यों की खुद जांच करता है ताकि गुणवत्ता और पारदर्शिता बनी रहे. सांसद का रोल सिर्फ सुझाव देने तक सीमित है – पैसा उनके हाथ में नहीं जाता, न ही वे ठेकेदार चुनते हैं या पेमेंट करते हैं. यह योजना दिसंबर 1993 से चल रही है. इसका मुख्य उद्देश्य सांसदों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर जरूरी विकास कार्यों को तेजी से पूरा करना है. अगर किसी कार्य में दुरुपयोग या अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित मंत्रालय जांच करवा सकता है और जरूरी कार्रवाई कर सकता है. इस तरह MPLADS योजना पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से काम करती है.